धामी गोली कांड के शहीदों को आनलाइन संवाद से किया याद

प्रदेश भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से आजादी की 75वीं वर्षगांठ के उपल

JagranFri, 16 Jul 2021 07:44 PM (IST)
धामी गोली कांड के शहीदों को आनलाइन संवाद से किया याद

राज्य ब्यूरो, शिमला : प्रदेश भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से आजादी की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य पर आजादी का अमृत महोत्सव के तहत धामी गोली कांड पर आनलाइन संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भाषा एवं संस्कृति निदेशालय की ओर से करवाए गए आनलाइन संवाद में प्रदेश के लगभग 20 युवा साहित्यकारों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. ओम प्रकाश शर्मा ने की। उमा दत्त व दुर्गा दास के बलिदान को भी याद किया। शिमला के लेखक सुरेंद्र शर्मा ने हिमाचल के स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में बताया। सोलन के सत्येन शर्मा ने धामी गोली कांड पर विचार रखे। कुल्लू की रेखा ठाकुर ने पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम, 1939 के धामी गोली कांड व भागमल सोहटा के योगदान को याद किया। शिमला के लेखक प्रशांत शर्मा सहित कवियों में किन्नौर से दृष्टि नेगी, कुल्लू से श्वेता शर्मा व ओजस्विनी सचदेवा, ऊना से सुलेखा, कांगड़ा के कवि शिवा पंचकरण, मंडी के भोपाल ठाकुर व रूपेश, चंबा से युद्धवीर सिंह व आशीष बहल, सिरमौर से डा. मनोज शर्मा, स्पर्श चौहान, प्रकाश चंद व ऊषा और सोलन से केसी परिहार ने कविताओं से स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया। अतिरिक्त निदेशक डा. सुरेश जसवाल ने सबका आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में उपनिदेशक प्रेम प्रसाद पंडित, सहायक निदेशक अलका कैंथला, जिला भाषा अधिकारी अनिल हारटा व भाषा अधिकारी सरोजना भी कार्यक्रम से जुड़ीं। विभाग के निदेशक डा. पंकज ललित ने कहा कि इस कार्यक्रम को आयोजित करने का उद्देश्य स्वतंत्रता सेनानियों को याद करना व युवाओं को अपने गौरवपूर्ण इतिहास से परिचित करवाना था। इस अवसर पर साहित्यकार श्रीनिवास श्रीकांत को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

------

क्या था धामी गोली कांड

धामी रियासत के राणा से बेगार प्रथा को समाप्त करने, कर छूट और रियासती प्रजामंडल धामी की दोबारा स्थापना जैसी मांगों को लेकर 16 जुलाई, 1939 को करीब 1500 आंदोलनकारियों के एक समूह ने भागमल सोहटा के नेतृत्व में शिमला से धामी की और कूच किया था। आंदोलनकारियों की इस भीड़ पर गोली चलवा दी, जिसमें उमा दत्त व दुर्गादास की मौत हो गई और अनेक आंदोलनकारी घायल हुए। इस घटना ने साधारण प्रजा के साहस को सामने लाया था, जो आज भी याद किया जाता है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.