पुलिस उप निरीक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश

पुलिस उप निरीक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश

अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बाद रद करने का आरोप विधि संवाददाता शिमला उच्च न्

Publish Date:Thu, 26 Nov 2020 04:18 AM (IST) Author: Jagran

अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बाद रद करने का आरोप

विधि संवाददाता, शिमला : उच्च न्यायालय ने पुलिस उप निरीक्षक के खिलाफ ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने के आरोप में विभागीय कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है। पुलिस उप निरीक्षक के खिलाफ उसकी लापरवाही के कारण मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम के तहत दर्ज आपराधिक मामले का चालान देरी से दायर करने का आरोप है। आरोप है कि पुलिस उप निरीक्षक ने अपना स्थानांतरण ऊना से किन्नौर होने पर अभियोजन से संबंधित फाइलें एसएचओ ऊना को समय पर नहीं सौंपीं। फाइलें न सौंपने को लेकर उसके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी, जिसे बाद में रद कर दिया था। आरोप है कि उप निरीक्षक पुलिस विभाग में होने के कारण उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में कैंसिलेशन रिपोर्ट तैयार करवाने में कामयाब हो गया।

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने पुलिस महानिदेशक को इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखने के निर्देश जारी किए हैं। सब इंस्पेक्टर अंकुश डोगरा के खिलाफ गैरकानूनी ढंग से आपराधिक मामले की फाइल अपने पास रखने के लिए कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने के आदेश जारी किए। उसके खिलाफ इस कृत्य के लिए उचित कार्रवाई न करने व मामले की एफआइआर की कैंसिलेशन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के पीछे रही मंशा की जांच व्यक्तिगत तौर पर करने के आदेश जारी किए। चालान पेश करने में देरी के कारण की व्याख्या करने में विफल रहे अधिकारी से भी स्पष्टीकरण लेने को कहा कहा गया है। पुलिस महानिदेशक को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह जांच अधिकारियों को निर्देश जारी करें ताकि उन्हें चालान व अंतिम रिपोर्ट में तथ्यों और परिस्थितियों की ठीक से व्याख्या करने में मदद मिल सके।

अभियोजन पक्ष के अनुसार मादक पदार्थ की तस्करी के आरोपित से 16 नवंबर 2016 को 4.60 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी, जबकि इस मामले को लेकर चालान 24 मई 2018 को कोर्ट के समक्ष दाखिल किया गया था। प्रार्थी ने हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दाखिल कर उसके खिलाफ दर्ज एफआइआर को इस कारण रद करने की गुहार लगाई गई थी कि उसके खिलाफ चालान देरी से दायर किया गया है। सक्षम न्यायालय के समक्ष चालान दायर करने में हुई देरी के लिए सही स्पष्टीकरण देना आवश्यक था। जिसे अभियोजन पक्ष दाखिल करने में विफल रहा। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए और उक्त अधिकारी के कारण हुई देरी के स्पष्टीकरण के दृष्टिगत प्रार्थी द्वारा उसके खिलाफ दर्ज मामले को रद करने की गुहार को नामंजूर कर दिया। अनुपालना रिपोर्ट पांच जनवरी 2021 तक न्यायालय के समक्ष पेश करने के आदेश जारी किए हैं।

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