सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट भी आरटीआइ के दायरे में : डा. संघाईक

सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय तक सूचना के अधिकार के दायरे में आते हैं।

JagranTue, 19 Oct 2021 12:07 AM (IST)
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट भी आरटीआइ के दायरे में : डा. संघाईक

जागरण संवाददाता, शिमला : सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय तक सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर नहीं हैं। कुछ अपवादों को छोड़कर आम नागरिक के आवेदन पर वे सूचनाएं उपलब्ध करवाने के लिए बाध्य हैं। सूचना का अधिकार एक मौलिक अधिकार है।

यह जानकारी प्रदेश के वरिष्ठ आरटीआइ विशेषज्ञ और शिमला के राजकीय महाविद्यालय कोटशेरा में एसोसिएट प्रोफेसर डा. गोपाल कृष्ण संघाईक ने उमंग फाउंडेशन के वेबिनार 'आरटीआइ कानून और उसका उपयोग' विषय पर दी। इसमें हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला, विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों, एपीजी शिमला यूनिवर्सिटी के एनसीसी कैडेट्स के अलावा कई शिक्षकों ने भी हिस्सा लिया। उमंग फाउंडेशन के ट्रस्टी और कार्यक्रम के संयोजक संजीव शर्मा ने बताया कि फाउंडेशन आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य पर मानवाधिकारों पर जागरूकता के लिए वेबिनार श्रृंखला आयोजित कर रहा है। डा. गोपाल कृष्ण संघाईक ने बताया आरटीआइ कानून के तहत भारत का कोई भी नागरिक साधारण कागज पर संबंधित विभाग के जनसूचना अधिकारी को पत्र लिखकर 10 रुपये का पोस्टल आर्डर लगाकर सूचनाएं मांग सकता है। इसमें किसी विशेष फार्म या वकील की सहायता नहीं चाहिए। हिमाचल में बीपीएल परिवारों के लिए सूचना बिल्कुल निश्शुल्क उपलब्ध करवाई जाती है। अन्य लोगों से प्रति पेज दो रुपये की दर से शुल्क लिया जाता है। राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त को इसकी शिकायत भी की जा सकती है। दोषी पाए जाने पर जनसूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाया जाता है, जो उसे स्वयं भरना पड़ता है। केंद्र सरकार के कार्यालयों संबंधी शिकायतें केंद्रीय सूचना आयोग के पास भेजी जानी चाहिए।

उन्होंने बताया की सूचना के दायरे में सिर्फ वही दस्तावेज आते हैं, जो रिकार्ड में होते हैं। दस्तावेजों का मुआयना करने का भी प्रविधान है। इसके अलावा किसी भी सरकारी निर्माण कार्य में उपयोग की जाने वाली सामग्री के सैंपल भी देखे और लिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय समेत कोई भी सरकारी विभाग अथवा सरकार से सहायता लेने वाली निजी संस्थान एवं स्वयंसेवी संगठन भी पब्लिक अथारिटी के तौर पर आरटीआइ के दायरे में आते हैं। अदालतों से उनके न्यायिक कार्यो और भविष्य में दिए जाने वाले फैसलों आदि से संबंधित जानकारियां इस कानून के दायरे में नहीं आती हैं। विभागों के कुछ चुनिंदा मामलों के बारे में सूचनाएं न देने के प्रविधान के बारे में भी बताया।

फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने कहा कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को जागरूक करके समाज के सबसे कमजोर वर्गो के लिए काम करने को प्रेरित करना है। कार्यक्रम के संचालन में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के पीएचडी स्कालर श्वेता शर्मा, अभिषेक भागड़ा, सवीना जहां, मुकेश कुमार और बबीता ठाकुर ने सहयोग किया।

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