छात्रवृत्ति घोटाले के दो आरोपितों को सशर्त जमानत

छात्रवृत्ति घोटाले के दो आरोपितों को सशर्त जमानत
Publish Date:Sun, 27 Sep 2020 06:20 AM (IST) Author: Jagran

विधि संवाददाता, शिमला : हाईकोर्ट ने छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपित व ऊना के केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के वाइस चेयरमैन हितेश गांधी व उच्चतर शिक्षा निदेशालय में तैनात तत्कालीन अधीक्षक अरविद राज्टा की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें सशर्त जमानत दी है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने प्रार्थी हितेश गांधी को एक करोड़ रुपये के निजी मुचलके व 25-25 लाख रुपये के दो श्योरिटी बॉंड भरने की शर्त के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिए। कोर्ट ने अरविद राजटा को भी 25 लाख रुपये के निजी मुचलके व इतनी ही राशि के दो श्योरिटी बांड भरने की शर्त के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

तीन जनवरी को हिमाचल में 250 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में जुटी सीबीआइ ने पहली बार तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें शिक्षा विभाग के तत्कालीन अधीक्षक अरविद राज्टा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की नवांशहर शाखा के हेड कैशियर एसपी सिंह व ऊना के केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के वाइस चेयरमैन हितेश गांधी शामिल हैं। जांच में राज्टा की भूमिका संदिग्ध मिली थी। आरोप है कि वह घोटाले के दौरान उस सीट पर तैनात था जहां से छात्रवृत्ति वितरण का काम संचालित होता था। सीबीआइ ने ऊना के केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट में दबिश देकर दस्तावेज सीज किए थे।

2019 में दर्ज हुई थी एफआइआर

प्रदेश सरकार की सिफारिश पर सीबीआइ ने नौ मई 2019 को एफआइआर दर्ज की थी। पांच दिन बाद हिमाचल, पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ में 22 शैक्षणिक संस्थानों के ठिकानों पर दबिश दी थी। यह कार्रवाई शिमला, सिरमौर, ऊना, बिलासपुर, चंबा, कांगड़ा, करनाल, मोहाली, नवांशहर, अंबाला व गुरदासपुर स्थित कई शैक्षणिक संस्थानों पर की गई। साथ ही बैंकों में भी दबिश दी गई थी। शिक्षा विभाग की जांच के दौरान 2013-14 से 2016-17 तक 2.38 लाख एससी, एसटी व ओबीसी के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति जारी करने के दौरान हुई गड़बड़ी की बात सामने आई। इस दौरान 2772 शिक्षण संस्थानों को छात्रवृत्ति बंटी। इसमें 266 निजी शिक्षण संस्थान शामिल थे।

छात्रवृत्ति के लिए जारी हुई थी करोड़ों की राशि

निजी शिक्षण संस्थानों को 210 करोड़ व सरकारी संस्थानों को 56 करोड़ की राशि दी गई। 2.38 लाख विद्यार्थियों में से 19915 को चार मोबाइल फोन नंबरों से जुड़े बैंक खातों में राशि जारी की गई। मामला बड़े शिक्षण संस्थानों व दूसरे राज्यों से भी जुड़ा था। ऐसे में सरकार ने सीबीआइ जांच की सिफारिश की थी।

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