हिमाचल पर भारी ईरान का सेब

हिमाचल की करीब साढ़े चार हजार करोड़ रुपये की सेब की आर्थिकी पर विदेश से आने वाला सेब भारी पड़ रहा है

JagranThu, 26 Aug 2021 06:46 PM (IST)
हिमाचल पर भारी ईरान का सेब

यादवेन्द्र शर्मा, शिमला

हिमाचल की करीब साढ़े चार हजार करोड़ रुपये की सेब की आर्थिकी पर ईरान का सेब, ओले से पड़ने वाले दाग, कम गुणवत्ता और लोगों की बदलती जरूरतें भारी पड़ रही हैं। कोरोना काल में लोग की आमदनी कम हुई है तो उनकी खरीद करने की आदत में बदलाव हुआ है। यही वजह है कि हिमाचल हा जो सेब 2500 से 3800 रुपये प्रति पेटी तक बिकता था, आज वह मात्र 400 से 1800 रुपये तक जा रहा है। ऐसे में पिछले साल की अपेक्षा सेब के दाम तीस फीसद तक कम मिल रहे हैं।

इस बार सेब की फसल भी अधिक है और ईरान का सेब हिमाचली को पछाड़ रहा है। सेब बागवानों को पहले सूखा, उसके बाद ओलावृष्टि और अब बाजार ने ऐसा प्रभावित किया है कि मुनाफा तो दूर उत्पादन और बाजार तक पहुंचाने में आने वाले खर्च की भरवाई भी नहीं हो पा रही है।

ईरान का सेब रंग और स्वाद में श्रीनगर और किन्नौर की सेब की बराबरी करता है, जबकि वह एक हजार से 1500 रुपये प्रति पेटी तक उपलब्ध है। यह सेब मई से आना शुरू हो जाता है। वहीं हिमाचली सेब का आकार भी नहीं है और दागदार भी है। ऐसे में अब साफ सेब के भी अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं।

पिछले साल हिमाचली सेब 4200 रुपये प्रति पेटी तक भी बिका था। इस बार शुरू में तीन हजार रुपये की पेटी बिकने के बाद अब मुश्किल से दो हजार तक पहुंच रहा है। तीन सप्ताह में तो सेब के सबसे कम दाम मिल रहे हैं। प्रदेश की मंडियों में सेब का पूरा लाट बिक रहा है, जबकि देश की अन्य मंडियों में नग के आधार पर। ओलावृष्टि से दाग वाला सेब 400 से 1000 रुपये तक बिक रहा है। बीते वर्ष 4.81 लाख मीट्रिक टन यानी बीस किलो के हिसाब से 2.40 करोड़ पेटियां बिकी थी। इस बार 6.43 लाख मीट्रिक टन यानी 3.21 करोड़ से अधिक पेटियों का बाजार में पहुंचने का अनुमान है।

दो दिन में पहुंची साढ़े पांच लाख पेटियां

देश की विभिन्न मंडियों में 24 और 25 अगस्त को साढ़े पांच लाख के करीब सेब की पेटियों बिकने के लिए पहुंचीं। करीब डेढ़ सप्ताह से सेब सीजन में भी तेजी आई है। प्रदेश में जब से सेब सीजन शुरू हुआ है तब से 88,26,746 पेटियां विभिन्न मंडियों में पहुंची हैं। ---------

ईरान का सेब जो गुणवत्ता व स्वाद में श्रीनगर व किन्नौर के बराबर है, वह 1000 से 1500 रुपये प्रति पेटी मिल रहा है। हिमाचल से आ रहा सेब 65 से 70 फीसद दागी और छोटे आकार का है। बड़े प्रदेशों और प्रमुख शहरों में बड़े आकार के सेब की मांग रहती है, इसलिए कम मांग के कारण भी दाम प्रभावित हुए हैं। कोरोना ने लोगों की जरूरत और सोच बदली है। आय पर विपरीत प्रभाव पड़ने से सेब की मांग भी कम हुई है। असम और बिहार को छोड़ दें तो बाकी राज्यों में बड़े आकार के सेब की मांग रहती है। हिमाचली सेब में इस बार वह चमक और आकार नहीं है।

सुशांत श्याम, आढ़ती, शिमला फूड कंपनी दिल्ली हिमाचल से सेब की 88.26 लाख पेटियां देश की विभिन्न मंडियों में पहुंच चुकी हैं। पिछले साल केवल 42 लाख पेटियां ही बाजार में पहुंची थी। इस बार सेब का अधिक उत्पादन हुआ है, जबकि दाम अपेक्षाकृत कम हैं।

डा. जेपी शर्मा, निदेशक बागवानी विभाग

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