न घाटियां हुर्ई एक, न पर्यटन को लगे पंख

पर्यटन की अपार संभावनों से लवरेज चौहारघाट व बरोट क्षेत्र पर सरकार की नजर-ए-इनायत की जरूरत है।

JagranThu, 07 Oct 2021 05:43 PM (IST)
न घाटियां हुर्ई एक, न पर्यटन को लगे पंख

खुशी राम ठाकुर, बरोट

पर्यटन की अपार संभावनों से लवरेज चौहारघाट व बरोट क्षेत्र पर सरकार की नजर-ए-इनायत आज तक नहीं पड़ी। घोषणाओं में तो पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अकसर वादे हुए लेकिन जमीनी कवायद कुछ नहीं, साथ ही चौहारघाटी और छोटा भंगाल को एक करने की घोषणा पर भी काम नहीं हुआ।

चौहार घाटी तथा छोटाभंगाल घाटी के साथ लगती 15 पंचायतों में लगभग 15000 आबादी है। अलग- अलग विधानसभा क्षेत्रों में होने के चलते क्षेत्र विकास कार्य में हमेशा पिछड़ जाता है, जो कार्य एक कार्यालय से हो सकता है उसके लिए यहां पर अलग-अलग कार्यालय खोलने पड़ते हैं, दोनों घाटियों को समायोजित करने की मांग कई बार उठ चुकी है, लेकिन संकीर्ण राजनीति के चलते आजतक कोई भी निर्णय नहीं हो पाया है।

1983 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और 2003 में प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने दोनों घाटियों को एक करने की घोषणा की लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर सिविल अस्पताल बनाया गया है, लेकिन आज दिन इसका भवन नहीं बन पाया है। वहीं पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद इस ओर कोई पुख्ता कार्रवाई नहीं हो पाई है। बरोट पंचायत के प्रधान डा. रमेश तठा, मुल्थान की प्रधान दुर्गेश व पूर्व प्रधान भाग सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर ही पूरी तरह टिकी हुई है।

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क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक है कि सुविधाओं में इजाफा किया जाए। कई मूलभूत सुविधाएं न होने के कारण लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सरकार को घोषणाएं पूरी करनी चाहिए।

रामसरन चौहान, निवास थुजी।

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दोनों घाटियों को अगर एक कर दिया जाता है तो इसका लाभ होगा। न तो अलग-अलग कार्यालय खोलने की जरूरत होगी न ही लोगों को ज्यादा भाग दौड़ करनी पड़ेगी। इसके लिए नेताओं को मजबूत राजनीति इच्छाशक्ति रखनी होगी।

-निहाल चंद, निवासी थुजी।

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पर्यटन क्षेत्र के रूप में अगर क्षेत्र को विकसित किया जाता है, तो इससे क्षेत्र के लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इस क्षेत्र की ओर आज दिन तक कोई पुख्ता कार्रवाई नहीं की गई है।

बजिद्र सिंह, निवासी बरोट।

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अग्निशमन केंद्र 40 किलोमीटर दूर पद्धर या जोगेंद्रनगर में है। सर्दियों में अग्निकांड के समय लाखों का नुकसान होता है। सरकार को टिक्कन के पास अग्निशमन केंद्र खोलना चाहिए।

-प्रेम चंद, निवासी झरवाड़।

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क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं रखी गई है। अगर घाटियों के मिलान के लिए पंचायत प्रस्ताव देती हैं तो जरूर कोशिश करूंगा। अस्पताल भवन के लिए भी जमीन मिलते ही कार्य शुरू होगा। लोगों को सुविधा मुहैया करवाना मेरी प्राथमिकता है।

जवाहर ठाकुर, विधायक द्रंग।

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