मोबाइल गेम्स छीन रही बचपन

मंडी, जेएनएन। आजकल बच्चे सिर्फ सिर्फ मोबाइल फोन तक ही सीमित होकर रह गए हैं। बच्चे मोबाइल फोन पर इतने व्यस्त हो चुके हैं कि मैदान में खेलना तो भूल ही गए हैं। इनका बचपन तो मोबाइल फोन के इर्द-गिर्द ही घूम रहा है। जिले में अधिकतर घरों में इन दिनों ऐसा देखने को मिल रहा है। स्मार्ट फोन की इस लत ने बच्चों से उनका बचपन छीन लिया है। पहले गली, मोहल्लों के खेल मैदान में सुबह-शाम बच्चों को खेलते देखा जा सकता था, लेकिन अब मैदान सूने पड़े हुए हैं और बचपन एक कमरे तक सिमट कर रह गया है। बच्चे पूरा दिन मोबाइल फोन पर गेम खेलते रहते हैं।

गेम्स के अलावा कई तरह की चीजें इंटरनेट पर सर्च करते रहते हैं। इससे उनकी स्मरण शक्ति व एकाग्रता कम हो रही है। साथ ही लगातार स्मार्टफोन से चिपके रहने से आंखों को भी नुकसान होता है। कमरे में बैठकर मोबाइल पर गेम खेलते रहने से बच्चों का शारीरिक विकास नहीं हो पा रहा है और मोटापा भी जकड़ रहा है। इसके अलावा बच्चे कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल मंडी के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नागराज कहते हैं कि लगातार मोबाइल फोन के इस्तेमाल से बच्चों की स्मरण शक्ति कमजोर हो रही है। जिनको मोबाइल की लत लग चुकी है अगर आप उनकी तुलना उन बच्चों से करेंगे जो इससे दूर हैं तो पाएंगे कि मोबाइल उपयोग करने वाले बच्चे सिर्फ वर्चुअल व‌र्ल्ड में जी रहे हैं। घर वालों से उन्हें कोई मतलब नहीं है।

उनका स्वभाव भी चिड़चिड़ा हो चुका होता है। इसके घातक नतीजे सामने आ रहे हैं। इसके लिए बच्चों के अभिभावक भी कुछ हद तक जिम्मेदार हैं। कम उम्र में ही बच्चों को मोबाइल थमा दिया जाता है और उन्हें उसकी लत लग जाती है। बच्चों को पर्याप्त नींद लेना जरूरी है, लेकिन मोबाइल की लत लगने रात को स्मार्टफोन पर गेम खेलते रहते हैं या फिर कोई फिल्म आदि देखते हैं। इससे उनके सोने के समय में तो कटौती होती ही है और कई बीमारियां लग रही हैं। इंटरनेट पर कई ऐसे गेम्स हैं जो हिंसक हैं। इसे लगातार खेलते रहने से स्वभाव हिंसक हो जाता है।

सुझाव शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नागराज का कहना है कि बच्चों को बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें और उनके साथ खुद भी खेलें। इससे बच्चों का शारीरिक विकास भी होगा। बच्चा स्वस्थ रहेगा। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखें। उनसे बात करें। बच्चों को ज्यादा समय तक अकेला न छोड़ें।

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