आयुर्वेदिक अस्पताल पपरोला की पार्किग उखड़ी, धूल से मरीज परेशान

आयुर्वेदिक अस्पताल पपरोला की पार्किग उखड़ी, धूल से मरीज परेशान

मुनीष दीक्षित बैजनाथ प्रदेश के सबसे बड़े आयुर्वेदिक अस्पताल पपरोला के प्रवेश द्वार में मरीजों क

JagranThu, 15 Apr 2021 02:04 AM (IST)

मुनीष दीक्षित, बैजनाथ

प्रदेश के सबसे बड़े आयुर्वेदिक अस्पताल पपरोला के प्रवेश द्वार में मरीजों का स्वागत दो साल से टूटी हुई पार्किग कर रही है। इस पार्किग में जगह-जगह छोटे छोटे पत्थर बिखरे हुए हैं। ऐसे में कई बार वाहनों की आवाजाही से छोटे पत्थर उछलकर लोगों को भी लग चुके हैं। इसके साथ ही पार्किग का फर्श उखड़ा हुआ होने के कारण धूल से लोगों को परेशानी होती है। यहां रोजाना दो सौ से पांच सौ तक ओपीडी रहती है। आजकल कोरोना वैक्सीन से लेकर टेस्ट का कार्य भी चल रहा है, लेकिन पार्किग का हाल बेहाल है।

लोगों का कहना है कि सूबे के सबसे बड़े आयुर्वेदिक अस्पताल का ही यह हाल है, तो अन्य स्थानों में कैसी व्यवस्था होगी। अस्पताल का जिम्मा आयुर्वेदिक विभाग के पास है। यहां मरम्मत तथा अन्य कार्यो की जिम्मेवारी लोग निर्माण विभाग के पास रहती है। स्थानीय विधायक मुल्खराज प्रेमी द्वारा क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित होने वाली अधिकारियों की बैठक में भी आयुर्वेदिक अस्पताल की मरम्मत से लेकर अन्य व्यवस्थाओं को ठीक करने का मसला उठ चुका हैं। बावजूद अस्पताल की पार्किग को ठीक करने का अभी तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। अस्पताल के एमएस डा. कुलदीप बरवाल ने बताया कि इसको लेकर समाधान का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल बजट का अभाव है। इस संबंध में स्थानीय विधायक से भी चर्चा हुई है। यहां पार्किग अस्पताल के मुख्य मार्ग में है। पूरा फर्श उखड़ चुका है। यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। कभी लोगों पर पत्थर गिरते हैं, तो कभी धूल से मरीज बेहाल हो रहे हैं। सरकार इसकी कोई सुध नहीं ले रही है।

- नीशू जम्वाल, वार्ड पंच, खड़ानाल पंचायत। अगर प्रदेश के सबसे बड़े आयुर्वेदिक अस्पताल का ही यह हाल है। तो आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि प्रदेश में आयुर्वेदिक की व्यवस्था क्या होगी। इस अस्पताल से लेकर पार्किग तक की कोई सुध नहीं ले रहा है।

- राजीव राणा, पहलून। आयुर्वेदिक अस्पताल में पार्किग से होकर गुजरना किसी खतरे से खाली नहीं है। यहां काफी पत्थर बिखरे हुए हैं। कई बार लोगों को टायरों से टकराकर पत्थर लग चुके हैं। हर समय धूल उड़ रही है।

- चंद्रभान रांझा, पूर्व प्रधान कुदैल।

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