रोमांचक होगा भानुपल्ली से बिलासपुर तक रेल का सफर, 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलेगी रेलगाड़ी

अंग्रेजों के भारत छोडऩे के बाद अब भारतीय रेलवे हिमाचल प्रदेश में आकर्षक व ऐतिहासिक रेल ट्रैक बनाएगा। यह ट्र्रैक प्रथम चरण में भानुपल्ली से बिलासपुर के बैरी तक बनेगा। इसके बाद लेह तक रेल मार्ग प्रस्तावित है।

Vijay BhushanThu, 15 Jul 2021 10:00 PM (IST)
भानुपल्ली से बिलासपुर रेललाइन के लिए बनाई जा रही सुरंग। जागरण

सुनील शर्मा, बिलासपुर। अंग्रेजों के भारत छोडऩे के बाद अब भारतीय रेलवे हिमाचल में आकर्षक व ऐतिहासिक रेल ट्रैक बनाएगा। यह ट्र्रैक प्रथम चरण में भानुपल्ली से बिलासपुर के बैरी तक बनेगा। इसके बाद लेह तक रेल मार्ग प्रस्तावित है। यह पहला मौका होगा जब हिमाचल के पहाड़ों में आधुनिक रेलवे ट्रैक बनेगा। भानुपल्ली से बिलासपुर के बैरी तक रेल का सफर भव्य होगा।

ब्रिटिश सरकार ने 19वीं सदी में जिला सोलन में सुरंगें बनाकर कालका से शिमला तक नैरोगेज रेलमार्ग बनाया था। भानुपल्ली से बिलासपुर के बैरी तक ब्राडगेज रेलमार्ग बनेगा। भारतीय रेलवे विभाग ने इसका काम तेजी से शुरू कर दिया है। कालका-शिमला ट्रैक पर रेलगाड़ी की अधिकतम रफ्तार 25 है, जबकि भानुपल्ली से बैरी ट्रैक पर 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी।

तीन हिस्सों में बनेगा रेलमार्ग

भानुपल्ली से बैरी तक तीन चरणों में 63 किलोमीटर रेलमार्ग बनाया जाएगा। इन दिनों भूमि अधिग्रहण के साथ कार्य में भी तेजी लाई गई है। पहला चारण 3.5 किलोमीटर से 20 किलोमीटर तक, दूसरा 20 से 52 किलोमीटर व तीसरा 52 से 63 किलोमीटर तक बांटा गया है। पहले चरण का काम पंजाब व हिमाचल की सीमा तक होगा, ोज 20 फीसद पूरा हो चुका है। चार सुरंगें तैयार हैैं और अब इनकी फिनिङ्क्षशग और रेलट्रैक बिछाना शेष है।

पांच फीट छह इंच होगी रेललाइन की चौड़ाई

निर्माण कार्य में जुटी कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि भानुपल्ली-बैरी रेललाइन की चौड़ाई पांच फीट छह इंच होगी, जबकि कालका-शिमला रेललाइन की दो फीट छह इंच है। रेलट्रैक में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इसमें अधिक मोड़ व ऊंचाई न हो। इस ट्रैक पर कई सुरंगें व पुल बनाए जाएंगे।

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रेल ट्रैक आधुनिक तकनीक से बनाया जा रहा है। यह ट्रैक पंजाब की जमीन के लेवल के हिसाब से बिलासपुर तक बनाया जाएगा ताकि रेलगाड़ी की रफ्तार पर असर न पड़े। इस प्रोजेक्ट को गुणवत्ता के साथ तैयार किया जा रहा है।

-करण मित्तल, सीनियर डीजीएम, रेल विकास निगम लिमिटेड चंडीगढ़

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