धर्मपुर में जल्द बनेगी टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट

हिमाचल प्रदेश की पहली टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट सोलन जिला के धर्मपुर में लगेगी। मार्केट कमेटी सोलन की ओर से धर्मपुर में पांच बीघा भूमि का चयन कर लिया है। वन विभाग की इस भूमि को मार्केट कमेटी के नाम किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।

Neeraj Kumar AzadThu, 14 Oct 2021 06:56 PM (IST)
धर्मपुर में जल्द बनेगी टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट। जागरण आर्काइव

सोलन, जागरण संवाददाता । हिमाचल प्रदेश की पहली टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट सोलन जिला के धर्मपुर में लगेगी। मार्केट कमेटी सोलन की ओर से धर्मपुर में पांच बीघा भूमि का चयन कर लिया है। वन विभाग की इस भूमि को मार्केट कमेटी के नाम किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

प्रदेश में सबसे अधिक टमाटर का उत्पादन सोलन जिला में किया जाता है। प्रदेश में कुल पैदावार का 40 फीसद सोलन में होता है। इसके अलावा सिरमौर व शिमला में भी अब टमाटर का उत्पादन बड़े स्तर पर किया जा रहा है। करीब 20 साल से सोलन में टमाटर आधारित उद्योग स्थापित किए जाने की मांग की जा रही है। सोलन व सिरमौर में यह राजनीतिक मुद्दा भी रहा है। भाजपा ने अपने घोषणापत्र में भी टमाटर प्रोसेङ्क्षसग यूनिट लगाए जाने का वादा जनता से किया है।

अब टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किए जाने की उम्मीद जगी है। धर्मपुर में यदि यह यूनिट स्थापित होती है तो इसका लाभ प्रदेश के किसानों को काफी अधिक मिलेगा। विशेष रूप से सोलन, शिमला व सिरमौर जिला के टमाटर उत्पादकों के लिए यह यूनिट सबसे अधिक लाभदायक साबित होगी। कई बार किसानों को टमाटर का उचित दाम नहीं मिल पाता, जिससे लागत पूरी करनी भी मुश्किल होती है। इस वर्ष भी मंडी में टमाटर तीन से चार रुपये प्रतिकिलो तक बिका है। टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट लगने के बाद किसानों को टमाटर का अच्छा दाम मिलेगा। बी व सी ग्रेड के टमाटर किसानों को मंडी में ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी। टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट में इसका अच्छा दाम मिलेगा। मार्केट कमेटी सोलन के सचिव रविंद्र शर्मा का कहना है कि धर्मपुर में भूमि का चयन कर लिया गया है। भूमि मार्केट कमेटी के नाम होने के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा।

मार्केट कमेटी की आय भी बढ़ेगी

सोलन सब्जी मंडी में हर वर्ष औसतन पांच से सात लाख क्रेट टमाटर पहुंचता है। इसमें 80 फीसद टमाटर बी व सी ग्रेड का होता है। साइज छोटा होने की वजह से किसानों को यह तीन से चार रुपये प्रतिकिलो तक बेचना पड़ता है। प्रत्येक वर्ष मंडी में करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक का टमाटर का कारोबार होता है। टमाटर प्रोसेङ्क्षसग यूनिट लगने के बाद मार्केट कमेटी की आय में भी वृद्धि होगी।

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