हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक है हिमाचल का यह मंदिर, मुस्लिम भी नवाते हैं इस देव स्थल पर शीश, जानिए

देव भूमि हिमाचल धर्मशाला के खनियारा में एक देवस्थल एेसा भी है, जो हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक है।

देव भूमि हिमाचल धर्मशाला के खनियारा में एक देवस्थल एेसा भी है जो हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक है। खनियारा के प्रसिद्ध एेतिहासिक इंद्रू नाग मंदिर में हिंदू ही नहीं बल्कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी शीश नवाते हैं।

Publish Date:Mon, 30 Nov 2020 09:45 AM (IST) Author: Rajesh Sharma

धर्मशाला, नीरज व्यास। जहां हिंदू मुस्लिम के विवाद अक्सर ऊंची अावाज में सुनाई देते हैं। वहीं देव भूमि हिमाचल धर्मशाला के खनियारा में एक देवस्थल एेसा भी है, जो हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक है। खनियारा के प्रसिद्ध एेतिहासिक इंद्रू नाग मंदिर में हिंदू ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी शीश नवाते हैं। यही नहीं मुस्लिमों के वाद्य यंत्रों के बजाने से ही हिंदू गूर देव खेल खेलते हैं अौर देववाणी (भविष्यवाणी) करते हैं।

धूप व बारिश के लिए लोग अाते हैं मंदिर

धर्मशाला से अाठ किलोमीटर दूर धौलाधार की तलहटी में बसा सुंदर सा गांव है खनियारा व इसकी देव परंपरा। इंद्रू नाग मंदिर में अकसर क्षेत्र के लोग व किसान धूप व बारिश के लिए यहां पर अाते हैं। किसान साल में दो बार अपनी फसलें कटने पर यहां पर अनाज अर्पित करते हैं। साथ ही फसलों को सुरक्षित रखने के लिए देव खेल व देववाणी के लिए खेलपात्र का भी अायोजन करते हैं। इस देव खेलपात्र में मुस्लिम समुदाय के लोग ही वाद्य यंत्र बजाते हैं। जिस पर हिंदू गूर देव खेल के दौरान देववाणी सुनाता है। इस मंदिर में हिंदू व मुस्लिम का कोई भेद नहीं है।

बरसात के दो माह करते हैं विशेष अारती

मुस्लिम समुदाय के लोग बरसात में भाद्र पद (काले महीने) में विशेष तौर पर अारती करते हैं। यही नहीं मंदिर में हिंदू परिवारों सहित मुस्लिम समुदाय के परिवारों के सदस्य अाकर दीपक जलाना व धूप लगाने सहित अारती में भाग लेते हैं। यह देव परंपरा है। यह मंदिर हिंदू देव परंपरा के साथ-साथ हिंदू-मुस्लिम एकता का भी प्रतीक है।

धर्मशाला के क्षेत्रपाल देवता के रूप में पूजे जाते हैं इंद्रूनाग

भगवान इंद्रू नाग देवता को धर्मशाला क्षेत्र के क्षेत्रपाल के रूप में पूजा जाता है। नाग देवता धर्मशाला व 18 टीकों की फसल की रखवाली करते हैं अौर देव संदेश देकर जरूरी पूजा अर्चना व हवन की अाज्ञा भी देते हैं। दूर-दूर से लोग यहां पर माथा टेकने, जातर लेकर पानी व बारिश की मांग के लिए अाते हैं, जो पूर्ण होती है।

अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट मैच से पहले होती है विशेष पूजा

कोई भी मैच करवाने से पहले हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन इस देव स्थल में पहुंचकर देवता को मनाती है। देवता मानते हैं तो मैच के दौरान बारिश नहीं होती, लेकिन पूजा अर्चना में कोताही व लापरवाही बरतने पर क्रिकेट मैच तक नहीं हो पाता।

जय इंद्रू नाग मंदिर सेवा समिति देख रही है व्यवस्था

जय इंद्रू नाग मंदिर सेवा समिति मंदिर के विकास कार्य करवा रही है व अन्य कार्य भी देख रही है। जबकि इंद्रू नाग देवता के अपने गूर, वाद्य यंत्र बजाने वाले बजंतरी, पुजारी, कोहली व अन्य लोग टीम में हैं। जो लंबे समय से इंद्रू नाग देवता के मंदिर की सेवा कर रहे हैं।

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