अबकी बार आम नहीं खास होगा आम

अबकी बार 'आम' नहीं खास होगा आम

अश्वनी शर्मा जसूर फलों का राजा आम इस बार आम न होकर खास होगा। जिले में इस बार आम की फ

JagranTue, 20 Apr 2021 03:40 AM (IST)

अश्वनी शर्मा, जसूर

फलों का राजा आम इस बार आम न होकर खास होगा। जिले में इस बार आम की फसल का ऑफ ईयर है। पैदावार में कमी से मांग अधिक रहती है। इस कारण आम उत्पादकों एवं बागवानों को बेहतर दाम मिलेंगे।

क्षेत्रीय बागवानों के बगीचे व्यापारियों ने बौर प्रक्रिया के दौरान ही खरीद लिए हैं। जिले में उपमंडल नूरपुर और इंदौरा आम के उत्पादन के मुख्य केंद्र बिदु हैं। बागवानों की आर्थिक स्थिति इस फसल पर अधिक निर्भर रहती है। बागवानों के अनुसार, ऑफ ईयर के बावजूद इस बार आम के पौधों पर प्रचुर मात्रा में बौर खिला था और फल की सेटिग भी बढि़या हो गई है। अभी आम की फसल को तेला व झाड़ा रोग समेत आंधी और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से गुजरना पड़ेगा।

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ये किस्में होती हैं मुख्य

उपमंडलों में आम की दशहरी, लंगड़ा, चौसा, रामकेला, आम्रपाली, फजली व ग्रीन आदि किस्मों की पैदावार होती है। दशहरी किस्म के आम की सबसे ज्यादा फसल होती है। इस वैरायटी को प्रदेश के साथ- साथ देश के अन्य मंडियों में भी भेजा जाता है।

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नूरपुर में 3767 हेक्टेयर क्षेत्र में होती है पैदावार

नूरपुर में 3767 हेक्टेयर भूमि में आम की फसल होती है। औसतन 5800 मीट्रिक टन पैदावार होती है। इंदौरा में 6772 हेक्टेयर भूमि पर करीब 7400 मीट्रिक टन की पैदावार होती है। इस बार बागवानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है।

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ऑफ ईयर के बावजूद भड़वार, नागनी, रिन्ना व बानी क्षेत्रों में इस बार आम की अच्छी खासी फसल है। बागवानों को बेहतर दाम मिलेंगे।

-फूला सिंह

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ग्योरा, छतरोली, नगलाहड़, कुट्टा, बासा व बरंडा क्षेत्रों में फल की सेटिग बढि़या हुई है। मौसम ने साथ दिया तो फसल के बेहतर दाम मिलेंगे।

-विजय सेन

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भरमोली, रोड, गनोह, अघार, पंजाहड़ा व सुतराहड़ क्षेत्रों में अच्छी फसल होने का अनुमान है। उम्मीद है कि इस बार बेहतर दाम मिलेंगे।

-विक्रम पठानिया

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जौंटा, पुंद्र, खज्जियां व खेल क्षेत्रों में फसल काफी हद तक अच्छी है। आशा है कि बागवानों को राहत मिलेगी लेकिन मौसम की मेहरबानी भी जरूरी है।

-गणेश पराशर

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फल की सेटिग हो चुकी है। बागवान फल की ग्रोथ व मजबूती के लिए 50 मिलीलीटर हेक्साकोनाजोल दवा 100 लीटर पानी तथा तेला रोग से बचाव के लिए 100 मिलीलीटर मोनोक्रोटोफास को 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

-डा. राजेश कलेर, वैज्ञानी क्षेत्रीय बागवानी फल अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र जाच्छ।

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