ट्राउट फि‍श फार्म से शुरू करें स्‍वरोजगार, नोहराधार के वीरेंद्र सिंह हर महीने कमा रहे दो लाख रुपये तक

Trout Fish Farm कुछ नया करने की चाह में बढ़ती उम्र को वीरेंद्र सिंह ने बाधा नहीं बनने दिया। 70 वर्ष की आयु में नोहरधार निवासी वीरेंद्र सिंह ने बर्फीली ट्राउट फिश का उत्पादन कर लोगों को रोजगार के साथ-साथ नया व्यवसाय भी दिया है।

Rajesh Kumar SharmaThu, 21 Oct 2021 06:24 AM (IST)
नोहराधार निवासी वीरेंद्र सिंह ने ट्राउट फिश का उत्पादन कर लोगों को रोजगार के साथ-साथ नया व्यवसाय भी दिया है।

नाहन, राजन पुंडीर। Trout Fish Farm, कुछ नया करने की चाह में बढ़ती उम्र को वीरेंद्र सिंह ने बाधा नहीं बनने दिया। 70 वर्ष की आयु में जिला सिरमौर के नोहरधार तहसील के चौरास गांव में नोहराधार निवासी वीरेंद्र सिंह ने बर्फीली ट्राउट फिश का उत्पादन कर लोगों को रोजगार के साथ-साथ नया व्यवसाय भी दिया है। खेतीबाड़ी व बागवानी से हटकर जिला सिरमौर में पहली बार चूड़धार चोटी की तलहटी में बसे नोहराधार के समीप चौरास गांव में साढ़े 3 बीघा जमीन में 12 टैंक निर्मित कर ट्राउट फिश तैयार की है।

वीरेंद्र सिंह ने शिक्षा विभाग में सेवाएं दी, बीपीईओ के पद से सेवानिवृत्ति लेने के बाद 20 साल तक जीवन बीमा निगम में सेवाएं दीं। उसके बाद कुछ नया करने की चाह ने उनको मछली पालन का विचार आया। इसके लिए उन्होंने कुल्लू जिला के मनाली के समीप पतलीकूहल व लाहुल स्पीति से ट्राउट फिश का बीज लाया। जिसे अपनी जमीन में बनाए 12 टैंकों में डाला तथा अब वह ट्राउट फिश का बीज भी तैयार करने की तैयारी में हैं। इसके लिए उन्होंने प्रदेश सरकार से दस लाख की हैचरी स्वीकृत करवाई है। जिसमें 6 लाख का खर्चा वह स्वयं करेंगे तथा चार लाख की सहायता सरकार सब्सिडी के रूप में देगी। 

2015 में शुरू किए गए ट्राउट फिश के मत्स्य पालन से अब अच्छी आमदनी शुरू हो गई है। प्रतिमाह 1 से 2 लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है। ट्राउट फिश की नोहरधार से चंडीगढ़ व दिल्ली के लिए सप्‍लाई की जाती है। इस समय वीरेंद्र सिंह 75 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं। लेकिन अभी भी वह प्रतिदिन नोहरधार अपने घर से फार्म हाउस में 10 किलोमीटर प्रति दिन तीन टाइम मछलियों को फीड देने के लिए सुबह, दोपहर व शाम स्वयं आते हैं। इसके साथ उन्होंने फार्म में तीन लोगों को नियमित रूप से रोजगार दिया है। साथ ही जब टैंकों की सफाई करवानी हो, तो समय-समय पर कर्मचारियों की संख्या बढ़ जाती है तथा वह इसके अतिरिक्त चार पांच लोगों को रोजगार भी देते हैं।

15 से माइनस 3 डिग्री तक चाहिए होता है तापमान

बर्फीली ट्राउट फिश के लिए 15 से माइनस तीन डिग्री तापमान चाहिए होता है, जो वर्ष भर में छह महीने तक बर्फ से ढकी रहने वाली चूड़धार चोटी की तलहटी में रहता है। ट्राउट फिश के लिए खाद्य सामग्री पहले बाहर से लाते थे, जो कि उन्हें महंगी पड़ती थी। अब उन्होंने फार्म हाउस में ही फीड मील लगा ली है।

बीज भी तैयार करेंगे, स्‍थानीय लोगों को भी मिलेगा रोजगार

वीरेंद्र सिंह ने बताया कि वह कुछ समय के बाद ट्राउट फिश का बीज भी तैयार करेंगे। जिसे की क्षेत्र के अन्य किसानों को वितरित किया जाएगा, ताकि वह भी ट्राउट फिश से रोजगार कमा सकें। वीरेंद्र सिंह ने बताया भविष्य में वह अपने इस ट्राउट फिश फार्म को पर्यटकों के लिए खोलेंगे। इसके साथ ही वह यहां पर कैंपिंग साइट का भी निर्माण करने का विचार बना रहे हैं, ताकि इससे अतिरिक्त आय के साथ-साथ कुछ और लोगों को भी रोजगार दिया जा सके।

उछल कूद के लिए बनाया जाता है लंबा टैंक

ट्राउट फिश के लिए जो टैंक बनाया जाता है। उसकी लंबाई 50 फीट से अधिक, ऊंचाई तथा चौड़ाई 6 फीट रखी जाती है। 50 फीट लंबाई रखने का उद्देश्य यह होता है, ताकि मछलियां उस में तेजी व आसानी से  उछल कूद कर सकें।

अधिक वर्षा तथा नाले में बाढ़ आने से भारी संख्या में मर जाती है ट्राउट

चूड़धार चोटी की तलहटी के चौरास गांव में बने ट्राउट फिश फार्म में कई बार अधिक बारिश व एक साथ बर्फ भारी मात्रा में पिघलने से पानी के साथ सिल्ट आता है, तो इससे मछलियां मर जाती हैं। जिससे कि भारी नुकसान होता है। दो माह पूर्व हुई भारी बरसात से नाले में पानी के साथ भारी मात्रा में सिल्ट आने से करीब तीन लाख रुपये की मछलियां मारी गईं। इसकी भरपाई भी नहीं होती है, क्योंकि फिश का कोई कंपनी इंश्योरेंस नहीं करती है। जिसका खामियाजा फार्म मालिक को ही भुगतना पड़ता है।

पांच हजार रुपये प्रतिदिन होती है आय

वर्ष 2015 में शुरू किए गए ट्राउट फिश फार्म से अब वीरेंद्र सिंह को प्रतिदिन पांच हजार रुपये औसतन आय हो जाती है। कड़ी मेहनत तथा परिश्रम के बाद अब ट्राउट फिश को नोहरधार से चंडीगढ़ व दिल्ली के होटलों में भेजा जाता है।

500 ग्राम से एक किलो तक ट्राउट की रहती है अधिक मांग

देश-विदेश के बाजारों में बर्फीली ट्राउट की काफी मांग है। बाजार में 500 ग्राम से एक किलो तक की ट्राउट की अधिक मांग रहती है। ट्राउट का स्‍वाद व गुण इसे अपने आप में मछलियों में सबसे बेहतर बनाता है। जिसके चलते यह 500 से 700 प्रति किलो आसानी से बाजार में बिक जाती है।

ओमेगा प्रोटीन से भरपूर होती है ट्राउट

ट्राउट मछली सेहत के लिए खासकर हृदय के लिए फायदेमंद मानी जाती है। यह ओमेगा प्रोटीन से भरपूर होती है। ओमेगा प्रोटीन कोलेस्ट्राल को हृदय में जमा होने से रोकता है। ट्राउट मछली में कांटे नहीं होते हैं, इसलिए भी यह खाने के शौकीनो की पहली पसंद मानी जाती है।

सरकार देती है 40 फीसद सब्सिडी

वीरेंद्र सिंह ने अब तक एक करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च कर 12 टैंकों का निर्माण, फार्म हाउस व कर्मचारियों के रहने के लिए आवास आदि की व्यवस्था पर खर्च किया है। मत्स्य विभाग द्वारा टैंकों के निर्माण के लिए 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है, जबकि 60 प्रतिशत का खर्चा स्वयं वहन करना पड़ता है।

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