रायल ने बिखेरी चमक लेकिन गोल्डन व रेड गोल्ड के नहीं मिल रहे दाम

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला में सेब सीजन पीक पर पहुंच गया है। बुधवार को शिमला जिले की मंडियों में 181925 सेब की पेटियां पहुंची। इस बार रेट कम मिलने से बागवान खासे परेशान है। बुधवार को मंडियों में रायल किस्म के सेब ने अपनी धमक बिखेर कर रखी।

Vijay BhushanWed, 01 Sep 2021 10:08 PM (IST)
रायल वैरायटी के सेब के मिले अच्छे दाम। प्रतीकात्मक

शिमला, जागरण संवाददाता। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला में सेब सीजन पीक पर पहुंच गया है। बुधवार को शिमला जिले की मंडियों में 1,81,925 सेब की पेटियां पहुंची। इस बार रेट कम मिलने से बागवान खासे परेशान है। बुधवार को मंडियों में रायल किस्म के सेब ने अपनी धमक बिखेर कर रखी। मार्केट में मंदी के बावजूद रायल किस्म का सेब 2200 से 2300 प्रति पेटी बिका जबकि गोल्डन, रेड गोल्ड और स्पर वेरायटी का सेब 300 से 1100 रुपये प्रति पेटी बिका है।

प्रदेश सहित दूसरे प्रदेशों की मंडियों में बढिय़ा क्वालिटी के सेब के भाव भी इसी तरह से रहे। इन दिनों सेब सीजन चरम पर है। अच्छे रेट न मिलने से प्रदेश के लाखों बागवानों की चिताएं बढ़ गई हैं। बागवान ज्यादा दिन तक तुड़ान भी नहीं रोक सकते। यदि वे तुड़ान रोकते हैं तो सेब तो खराब होगा ही पौधों को भी नुकसान का खतरा है। इस बार ओलावृष्टि ने भी सेब को प्रभावित किया है। सेब दागी होने के कारण बागवानों को अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं। ऊपरी क्षेत्र के सेब पहुंचने से दाम में उछाल की संभावना है।

कहां पहुंची कितनी पेटियां

भट्टाकुफर,27373 पेटियां

ठियोग, नारकंडा,67787 पेटियां

पराला,50503 पेटियां

नेरवा,340 पेटियां

रोहडू,31723 पेटियां

अणु,1618 पेटियां

खड़ापत्थर,2518 पेटियां

 

ढली मंडी में यह बिका सेब

वेैरायटी,दाम

रायल,400-2300 प्रति पेटी

रेड गोल्डन,300-1100 प्रति पेटी

गोल्डन,300-700 प्रति पेटी

पराला मंडी में यह रहा सेब का रेट

रायल,500-1800 प्रति पेटी

रेड गोल्डन,300-800 प्रति पेटी

गोल्डन,300-500 प्रति पेटी।

हिमफेड ने शुरू की खरीद

हिमफेड ने मंडी मध्यस्तता योजना (एमआइएस) के तहत सेब की खरीद शुरू कर दी है। हिमफेड के अध्यक्ष गणेश दत्त ने कहा कि एमआइएस के तहत बागवानों से 9.50 प्रति किलो के हिसाब से खरीदा जा रहा है। पिछले साल अभी तक 42118 बोरियां खरीदी गई थी लेकिन इस साल अभी तक 23,4174 बोरियां साढ़े पांच गुना अधिक खरीदी की जा चुकी हैं। 125 कलेक्शन केंद्रों में आउटसोर्स व अपने नियमित कर्मचारियों को तैनात किया गया है, जो पूरी मेहनत से कार्य कर रहे हैं।

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