स्वतंत्रता सेनानी के गांव में 74 साल बाद भी नहीं पहुंची सड़क

स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय फतेह सिंह व स्वर्गीय कालीदास के गांव रिड़ी चमेडू का खस्ताहाल रास्ता। जागरण

उपमंडल जयसिंहपुर की सूआं पंचायत के रिड़ी चमेडू गांव के स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय फतेह सिंह व कालीदास का गांव सड़क सुविधा से वंचित है। सरकारें सड़क सुविधा पहुंचाने का दावा करती हैं लेकिन यह इस गांव में यह सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों में रोष है।

Vijay BhushanMon, 19 Apr 2021 05:53 PM (IST)

तिनबड़, संवाद सूत्र। आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी उपमंडल जयसिंहपुर की सूआं पंचायत के रिड़ी चमेडू गांव के स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय फतेह सिंह व कालीदास का गांव सड़क सुविधा से वंचित है। सरकारें हर गांव को सड़क सुविधा पहुंचाने का दावा करती हैं, लेकिन यह इस गांव में यह सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों में रोष है।

स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय फतेह सिंह की 90 वर्षीय पत्नी धर्मी देवी बीमार हैं और उन्हें अस्पताल ले जाना हो तो पालकी में मुख्य रोड तक पहुंचाया जाता है। स्वतंत्रता सेनानी कालीदास का एक बेटा कैंसर पीडि़त है, उसे भी घर से सड़क तक पहुंचाने के लिए परिजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

धर्मी देवी ने कहा कि मात्र एक किलोमीटर का एंबुलेंस सड़क मार्ग उनके गांव तक नहीं पहुंच पाई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह कई बार विभिन्न मंचों पर आवाज उठा चुकी हैैंं, लेकिन आश्वासन ही मिले।

उनका कहना है कि अब उनका एक ही सपना है कि कम से कम वह गांव तक गाड़ी पहुंचती देखें। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री के पालमपुर दौरे के दौरान गांव का प्रतिनिधिमंडल मिला था। मुख्यमंत्री ने भी सकारात्मक रवैया दिखाते हुए स्थानीय विधायक आदेश दिए थे कि इस विषय को गंभीरता से लें। विधायक ने भी उसी समय आश्वासन दिया कि तीन दिन के अंदर आपके गांव में आएंगे तथा इस विषय पर बातचीत करेंगे। लेकिन ढाई महीने व्यतीत होने के बाद भी कोई नहीं आया।

स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय फतेह ङ्क्षसह व स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय कालीदास के घर पर ग्रामीणों की एक बैठक हुई। इसमें किसान नेता मनजीत डोगरा व बाबा भोजी सिद्ध विकास सभा के सदस्य सचिव संदीप राणा विशेष तौर पर उपस्थित रहे। बैठक में ग्रामीणों ने गांव रिड़ी चमेड़ू के लिए एंबुलेंस रोड बनवाने के बारे चर्चा की। किसान नेता मंजीत डोगरा ने कहा कि देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर देने वाले महान स्वतंत्रता सेनानियों के परिजन आजादी के 74 साल बाद भी कष्ट में हैं, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मांग उठाई कि गांव को सड़क से जोड़ा जाए।

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