लोक निर्माण विभाग में 250 करोड़ के गड़बड़झाले में ये दस अधिकारी होंगे दंडित, विभागीय जांच में दोषी पाए

लोक निर्माण विभाग में 250 करोड़ के गड़बड़झाले में सरकार ने रिपोर्ट ऑफ इन्क्वायरी को मंजूरी दे दी है।

Himachal PWD Scam लोक निर्माण विभाग के 52 मंडलों में 250 करोड़ के गड़बड़झाले में सरकार ने रिपोर्ट ऑफ इन्क्वायरी को मंजूरी दे दी है। अब विभागीय जांच में दोषी पाए गए 10 अधिकारी दंडित होंगे। इन्होंने सरकार को नोटिस का जवाब दे दिया है

Rajesh Kumar SharmaTue, 23 Feb 2021 09:14 AM (IST)

शिमला, रमेश सिंगटा। Himachal PWD Scam, लोक निर्माण विभाग के 52 मंडलों में 250 करोड़ के गड़बड़झाले में सरकार ने रिपोर्ट ऑफ इन्क्वायरी को मंजूरी दे दी है। अब विभागीय जांच में दोषी पाए गए 10 अधिकारी दंडित होंगे। इन्होंने सरकार को नोटिस का जवाब दे दिया है, जिसमें खुद को बेकसूर बताया है। आरोपित इंजीनियर करीब ढाई साल पहले चार्जशीट किए गए थे। सूत्रों के अनुसार सरकार इन्हें मेजर पेनल्टी लगा सकती है। इसके तहत सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन तक बंद हो सकती है। प्रारंभिक जांच के बाद सरकार ने तत्कालीन चीफ इंजीनियर बीके शर्मा को विभागीय जांच करने का जिम्मा सौंप था।

ये हैं दोषी

अनिल परमार, तत्कालीन एक्सईएन उदयपुर, अब एक्सईएन डिजाइन मंडी। अनिल संगराय, तत्कालीन एक्सईएन जोङ्क्षगद्रनगर, अब एसई, कुल्लू। भागमल ठाकुर, तत्कालीन एक्सईएन, बैजनाथ, अब एक्सईएन पालमपुर। हिमांशु बिष्ट, तत्कालीन एक्सईएन मंडल-1 कुल्लू, अब सेवानिवृत्त जगतार ठाकुर, तत्कालीन एक्सईएन डलहौजी, अब एक्सईएन जवाली। जितेंद्र गुप्ता, तत्कालीन एक्सईएन मंडल- दो, अब एक्सईएन मंडी-एक। विपन कुमार शर्मा, तत्कालीन एक्सईएन जुब्बल, अब एसई, डिजाइन ईएनसी कार्यालय। बीआर शर्मा, तत्कालीन एसडीओ कोटखाई, अब सेवानिवृत्त। मनोज कुमार, तत्कालीन जेई हाटकोटी, अब एसडीओ हाटकोटी। प्रेमलाल शर्मा, तत्कालीन जेई जुब्बल, अब सेवानिवृत्त।

क्या है मामला

प्रारंभिक जांच में 52 मंडलों में अनियमितताएं सामने आईं। छोटे ठेकेदारों के हिस्से के ठेके ए और बी क्लास के ठेकेदारों को दे दिए, जबकि ये इनके पात्र ही नहीं थे। मामला 2016-17 का है। तब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी।

यह है नियम

नियमों के मुताबिक ए और बी क्लास के ठेकेदार डी क्लास के ठेके नहीं ले सकते हैं। हाईकोर्ट ने भी 2015 के नियमों पर मुहर लगाई । नियम के अनुसार डी क्लास के ठेकेदार 30 लाख रुपये तक का कार्य कर सकते हैं। सी क्लास के ठेकेदार 80 लाख , बी क्लास के ठेकेदार दो करोड़ तक और ए क्लास के ठेकेदार दो करोड़ और इससे ऊपर के ठेके ले सकते हैं। ठेकों के आवंटन में अधिकारियों ने बड़ा खेल खेला।

क्या होती है रिपोर्ट ऑफ इन्क्वायरी

मौजूदा सरकार ने आरोपों पर प्रारंभिक जांच के बाद अधिकारियों को चार्जशीट किया व नियमित विभागीय जांच के आदेश दिए गए। जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर आरोपितों को नोटिस जारी किए गए थे। इसी जांच रिपोर्ट को सरकार ने स्वीकार कर लिया है। इसे ही रिपोर्ट ऑफ इन्क्वायरी करते हैं।

कार्रवाई सरकार पर निर्भर

जांच अधिकारी एवं ईएनसी लोक निर्माण विभाग बीके शर्मा का कहना है मैंने जांच रिपोर्ट सरकार को काफी पहले सौंप दी थी। क्या सिफारिश की थी, इसके बारे में कुछ भी कहना उचित नहीं होगा। यह सरकार पर निर्भर है कि इस पर क्या कार्रवाई करती है।

सरकार दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे

ठेकेदार एवं मामले को हाईकोर्ट में पहुंचाने वाले रामस्वरूप का कहना है ठेकों के आवंटन में बड़े पैमाने पर धांधली हुई। मैं मामला हाईकोर्ट तक ले गया। शुरू में कुछ अफसरों को चार्जशीट किया गया, इसके बाद विभागीय जांच में उलझाए रखा। सरकार दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करें। सभी मंडलों के लिए एक जैसे मानक हों।

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