दुर्गम क्षेत्रों में अब दवा के लिए दुआ नहीं, ड्रोन करेगा सहायता, प्रधानमंत्री मोदी के सुझाव के बाद स्वास्थ्य विभाग मंडी की पहल

अब प्रदेश के दुर्गम इलाकों से बीमार लोगों के सैंपल लेने और आपात स्थिति में दवाएं पहुंचाने का काम ड्रोन करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुझाव पर स्वास्थ्य विभाग मंडी ने इस ओर पहल की है। जिला के दुर्गम इलाकों में ड्रोन का सफल ट्रायल किया गया है।

Richa RanaSat, 04 Dec 2021 05:41 PM (IST)
दुर्गम इलाकों से बीमार लोगों के सैंपल लेने और आपात स्थिति में दवाएं पहुंचाने का काम ड्रोन करेगा।

मंडी, मुकेश मैहरा। अब प्रदेश के दुर्गम इलाकों से बीमार लोगों के सैंपल लेने और आपात स्थिति में दवाएं पहुंचाने का काम ड्रोन करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुझाव पर स्वास्थ्य विभाग मंडी ने इस ओर पहल की है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से मिली मंजूरी के बाद जिला के दुर्गम इलाकों में ड्रोन का सफल ट्रायल किया गया है। पहले ट्रायल में थूक के सैंपल लाए गए और दवाएं भेजी गई।

कोरोना की पहली डोज का लक्ष्य पूरा होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश के लोगों से किए संवाद के दौरान स्टार्टअप के तहत इलाज प्रक्रिया में ड्रोन का सहारा लेने की बात कही थी। मंडी जिला में भी कई दुर्गम इलाके हैं, ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने सरकार को एक प्रारूप तैयार करके भेजा। सरकार ने इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को भेजा। यहां से मंजूरी आने के बाद मंडी जिला में इसके लिए ट्रायल आरंभ किए गए। इस प्रोजेक्ट में इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर), इंडियन इंस्टीट्यूट आफ एपेडैमोलाजी, आइआइटी चेन्नई सहयोगी है।आइआइटी की टीम ने सोमवार से जिला के दुर्गम इलाकों का दौरा कर ट्रायल किया। टीम के समन्वयक डा. विशाल शर्मा हैं, जबकि आइआइटी के प्रो. सत्यव्रत चक्रवर्ती व उनकी टीम साथ है।

छह गुणे छह का ड्रोन आठ किलोग्राम वजन ले जाने में सक्षम

कार्यक्रम के समन्वयक डा. विशाल ने बताया कि आइआइटी चेन्नई के छह वाइ छह के ड्रोन में सात से आठ किलोग्राम वजन उठाने में सक्षम है। मंडी के दुर्गम इलाकों गाढ़ागुशैणी, सरोआदेवी, बाडू, कांगणीधार व बरोट में ट्रायल हुआ। इसमें गाढ़ागुशैणी को 5000 दवा की गोलियां भेजी गई, जबकि स्पूटम के सैंपल वहां से लाए गए। ये इलाके 35 से 40 किलोमीटर दूर हैं। आसमान से छह से आठ किलोमीटर की इनकी दूरी को ट्रायल में ड्रोन ने तय किया। हालांकि मंडी में हुए ट्रायल में कुछ तकनीकी खामी आई है। उन्होंने बताया कि इस ड्रोन में दो बैटरी लगी होती हैं। इससे ड्रोन दो से तीन घंटे तक आसानी से उड़ान भर सकता है।

तीन चरणों में होगा ट्रायल

ड्रोन का ट्रायल तीन चरणों में हो रहा है। इसमें पहले चरण में हवा के अनुरूप इसे कैसे उड़ाया जा सकता है, चल रहा है। इसके बाद दूसरे चरण में इसका पे-लोड जांचा जाएगा और तीसरा अंतिम ट्रायल होगा। इसके बाद रिपोर्ट केंद्र को जाएगी। अभी ड्रोन चेन्नई आइआइटी का है। केंद्र से ड्रोन के लिए बजट मिल सकता है। डा. विशाल ने बताया कि वर्ष, 2018 में चंबा जिला में ट्रायल कर फिजिविलटी स्टडी हुई थी।

यह मिलेगा लाभ

इस तकनीक से समय व बजट दोनों की बचत तो होगी ही साथ ही दुर्गम इलाकों में आपात स्थिति में लोगों को समय पर उपचार व दवाएं भी मुहैया हो जाएंगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी मंडी, डा देवेंद्र शर्मा कहते हैं कि ड्रोन से दवाएं भेजने और सैंपल लाने की तकनीकी का मंडी के दुर्गम इलाकों में सफल ट्रायल हुआ है। आइआइटी चेन्नई के सहयोग से इसे किया जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में यह कारगर पहल है। इससे दुर्गम इलाकों के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।

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