देश खुल गया पर टांडा अस्‍पताल में अभी भी सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं, आइजीएमसी से सीखने की जरूरत

Tanda Medical College किसी भी राज्य में आ-जा सकते हैं। कई जगह स्कूल भी खुल गए हैं। हिमाचल में भी खोलने की तैयारी है लेकिन प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कालेज एवं अस्पताल कांगड़ा स्थित टांडा में सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं ही मिल रही हैं।

Rajesh SharmaTue, 06 Oct 2020 09:07 AM (IST)
टांडा अस्‍पताल में सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं ही मिल रही हैं।

टांडा, जागरण संवाददाता। कोरोना संक्रमण के मामले रोज आ रहे हैं, लेकिन देशभर में आम जनजीवन बहाल हो गया है यानी देश खुल गया है। किसी भी राज्य में आ-जा सकते हैं। कई राज्यों में स्कूल भी खुल गए हैं। हिमाचल में भी खोलने की तैयारी है, लेकिन प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कालेज एवं अस्पताल कांगड़ा स्थित टांडा में सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं ही मिल रही हैं। मरीज की हालत गंभीर है तो आइजीएमसी शिमला या पीजीआइ चंडीगढ़ रेफर। सामान्य ओपीडी बंद हैं।

जी हां, टांडा मेडिकल कालेज में एक माह से कुछ ऐसा ही चल रहा है। सुपर स्पेश्येलिटी ब्लाक की पांचवीं मंजिल पर कोविड वार्ड बनाया गया है। इसलिए यह भवन सील है। धरातल मंजिल पर आनकोलाजी यानी रेडियोलाजी विभाग के विशेषज्ञ वार्ड में ही कैंसर पीडि़तों की जांच कर रहे हैं। कार्डियोलाजी विभाग पूरी तरह बंद है। कैथ लैब बंद होने से हृदय रोगी दाखिल ही नहीं किए जा रहे हैं। इन्हेंं रेफर करने के अलावा विशेषज्ञों के पास कोई विकल्प नहीं है। न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञ सर्जरी विभाग के एक कमरे में मरीजों की जांच कर रहे हैं तो गेस्ट्रोएंट्रोलाजी विशेषज्ञ व न्यूरोलाजी विशेषज्ञ मेडिसिन विभाग में मरीजों की जांच तो कर रहे हैं, लेकिन दाखिल नहीं किया जा रहा है।

टांडा मेडिकल कॉलेज पर छह जिलों के लाखों लोगों की सेहत का जिम्मा है, लेकिन कोरोना की आड़ में अस्पताल प्रशासन से जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया है। 23 अगस्त को विशेषज्ञों को आदेश दिए हैं कि वे सिर्फ आपातकालीन सेवाएं देंगे यानी जो मरीज रेफर होकर आएंगे उनकी जांच करेंगे। सामान्य ओपीडी बंद रहेगी। अभी तक उन्हीं आदेशों पर अमल हो रहा है। गंभीर मरीजों को तो उपचार मिल रहा है, लेकिन सामान्य ओपीडी बंद होने से लोगों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज करवाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

छह माह में कोविड वार्ड नहीं बना पाया अस्पताल प्रशासन

कोविड-19 महामारी के कारण मार्च के अंतिम सप्ताह में हिमाचल में कफ्र्यू लगा था। उसके बाद टांडा मेडिकल कालेज में कोविड वार्ड बनाया गया। बाद में क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला को कोविड अस्पताल बना दिया गया, लेकिन छह माह में टांडा मेडिकल कालेज प्रशासन कोरोना मरीजों के इलाज के लिए एक वार्ड नहीं बना पाया है। टीबी सैनिटोरियम को कोविड अस्पताल बनाने की बात उठी तो सेंट्रल आक्सीजन व्यवस्था न होने का तर्क दिया गया, लेकिन लोगों का कहना है कि आपातकालीन वार्ड से टीबी सेनिटोरियम तक आक्सीजन पहुंचाने के लिए अस्पताल प्रशासन को क्या छह माह कम थे?

निजी अस्पताल कूट रहे चांदी

टांडा मेडिकल कालेज में सामान्य ओपीडी बंद होने से निजी अस्पतालों में मरीजों की लाइनें लग रही हैं। निजी अस्पतालों के डाक्टरों व स्टाफ को कोरोना संक्रमण का डर नहीं सताता। वहां कम स्टाफ के बावजूद धड़ाधड़ मरीजों की जांच व टेस्ट हो रहे हैं। टांडा मेडिकल कालेज के एक डाक्टर के सीटी स्कैन के 8500 रुपये ले लिए गए थे तो गरीब मरीजों का क्या हो रहा होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि यह सीटी स्कैन टांडा मेडिकल कालेज में 1350 रुपये में हो जाता है।

500 से अधिक डाक्टर फिर भी सामान्य ओपीडी बंद

टांडा मेडिकल कालेज में करीब ढाई सौ विशेषज्ञ व दो से अधिक पीजी प्रशिक्षु हैं। पीजी व एमबीबीएस इंटर्न अलग से। इसके बावजूद सामान्य ओपीडी बंद हैं। 400 से अधिक नर्सिंग स्टाफ व सौ से अधिक पैरा मेडिकल स्टाफ भी है। इतने तामझाम के बाद भी टांडा मेडिकल कालेज प्रशासन गरीब मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है।

आइजीएमसी से सीखने की जरूरत

टांडा मेडिकल कालेज प्रशासन को आइजीएमसी शिमला से सीखने की जरूरत है। आइजीएमसी में कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल भी हो रही है और अन्य बीमारियों से पीडि़त मरीजों को भी स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है। न सामान्य ओपीडी बंद और न ही कोई विभाग या ब्लाक सील। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की देखभाल के लिए अलग ब्लाक में व्यवस्था की गई है।

सामान्‍य ओपीडी जल्‍द शुरू करने के लिए प्रयासरत

अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अमिताभ अवस्थी का कहना है टांडा मेडिकल कॉलेज में कोरोना से संक्रमित मरीजों के लिए अलग फेब्रिकेटेड अस्पताल का निर्माण प्रस्तावित है। कोविड वार्ड को सुपर स्पेश्येलिटी ब्लाॅक से शिफ्ट करने पर भी विचार हो रहा है। सामान्य ओपीडी जल्द बहाल करने के लिए प्रयास जारी हैं।

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