नायब तहसीलदार कोटला ने एक दिन में भूमि के साठ इंतकाल कर लोगों को दी राहत

वाह! अफसर हो तो ऐसा। यह बात सुनने में तो अच्छी लगती है। लेकिन देखने को बहुत ही कम मिलती है। लेकिन नायब तहसीलदार कोटला जीवन कुमार शर्मा के कार्य को देखकर हर किसी की जुबान पर यही बात है।

Richa RanaWed, 04 Aug 2021 01:32 PM (IST)
जीवन कुमार शर्मा ने कोटला में भूमि के 60 इंतकाल एक दिन में किए हैं।

कोटला, जीवन कुमार। वाह! अफसर हो तो ऐसा। यह बात सुनने में तो अच्छी लगती है। लेकिन देखने को बहुत ही कम मिलती है। लेकिन नायब तहसीलदार कोटला जीवन कुमार शर्मा के कार्य को देखकर हर किसी की जुबान पर यही बात है। नायब तहसीलदार कोटला जीवन कुमार शर्मा ने प्रशासनिक कार्यों को घर-द्वार जाकर निपटाने की सुविधा दे रहे हैं जिससे कोटला क्षेत्र के लोगों मे खुशी है।

नायब तहसीलदार कोटला जीवन कुमार शर्मा ने कोटला के अधीन आने वाले पटवार वृत को कोटला, सोहलदा, जांगल, को तीन जोनों में बांट दिया है तथा अब जोनबाइज घर-द्वार जाकर प्रशासनिक कार्य निपटाने में लग गए हैं। मंगलवार को नायब तहसीलदार कोटला जीवन कुमार शर्मा ने ग्राम पंचायत सोलदा में प्रथम जोन सोलदा में जाकर घर-द्वार सुविधा दी। उन्होंने वहां पर जाकर वर्ष 2018 से लेकर 2021 तक के करीबन भूमि के 60 इंतकाल एक दिन में किए। लोग घर-द्वार सुविधा मिलने पर बहुत खुश हैं।

स्थानीय निवासी मेघराज, पूर्व प्रधान विजय कुमार, जोगिंदर सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत सोलदा गांव में काफी अरसे के बाद इंतकाल हुए है। नायब तहसीलदार जीवन कुमार शर्मा ,एवं उनके साथ आए पटवारी पंकुश कुमार ने गांव सोहलदा, भलूं, ललियाड़, भरील, धार आदि के अति निर्धन परिवारों के इंतकाल किए। जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। कई परिवारों के जिनके घर से कोई स्वर्गवास हो चुका है।

लेकिन अभी तक बारिस प्रमाण पत्र नहीं बने, उनके प्रमाण पत्र नायब तहसीलदार जीवन कुमार शर्मा ने मौके पर ही बना कर लोगों की सहायता की। बारिस प्रमाण पत्र न होने से ऐसे लोगों के कार्य रुके हुए थे। लोगों में जीवन कुमार शर्मा के कार्य को लेकर काफी खुशी है तथा लोगों ने उनकी प्रशंसा की है।

यह बोले नायब तहसीलदार कोटला

नायब तहसीलदार कोटला जीवन शर्मा ने कहा कि पटवार वृत्त में लगभग 20 गांव आते हैं यह वृत्त बहुत बड़ा है। और इसको तीन भागों में बांटा गया है। कोटला, सोहलदा, जांगल । मंगलवार को प्रथम भाग सोहलदा में 1918 से 1921 तक लगभग 60 इंतकाल एक ही दिन में घर द्वार जाकर किए गए ताकि लोगों को परेशानी और समय की बचत हो।

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