भरवाईं स्कूल के गणित के अध्यापक ने राज्यस्तरीय बैंच प्रेस प्रतियोगिता में जीता गोल्ड

राजकीय वरिष्‍ठ माध्‍यमिक पाठशाला भरवाईं में गणित विषय पढ़ाने वाले सतवीर सिंह ठाकुर उम्र 43 साल ने सोलन में आयोजित बैंच प्रेस प्रतियोगिता में 66 किलो भार वर्ग में गोल्ड जीता है। गौरतलब है की सतवीर सिंह ठाकुर दिव्यांग है। जब वह सिर्फ सात महीने के थे।

Richa RanaTue, 28 Sep 2021 12:28 PM (IST)
सतवीर सिंह ठाकुर ने सोलन में आयोजित बैंच प्रेस प्रतियोगिता में 66 किलो भार वर्ग में गोल्ड जीता है।

भरवाईं, संजीव ठाकुर। राजकीय वरिष्‍ठ माध्‍यमिक पाठशाला भरवाईं में गणित विषय पढ़ाने वाले सतवीर सिंह ठाकुर उम्र 43 साल ने सोलन में आयोजित बैंच प्रेस प्रतियोगिता में 66 किलो भार वर्ग में गोल्ड जीता है। गौरतलब है की सतवीर सिंह ठाकुर दिव्यांग है। जब वह सिर्फ सात महीने के थे तो उनको दाहिनी लात में पोलियो हो गया था। लेकिन उन्होंने कभी इसको अपनी सफलता में आड़े नहीं आने दिया।उन्होंने गणित विषय में एमएससी की व बीएड करके टीजीटी नॉन मेडिकल पद पर सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल की।

सतवीर सिंह चिंतपूर्णी के साथ लगते जिला कांगड़ा के मोइन गांव के रहने वाले है।वह राजकीय वरिष्‍ठ माध्‍यमिक पाठशाला भरवाई में कार्यरत है और गणित का विषय पढ़ाते हैं। सतवीर सिंह ने 26 व 27 सितंबर को सोलन ठोडो ग्राउंड स्थित निगम के सभागार में हिमाचल प्रदेश पावर लिफ्टिंग एसोसिएशन द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय पावर लिफ्टिंग और बेंच प्रेस प्रतियोगिता में मास्टर्स वर्ग की 66 किलोग्राम भार वर्ग में भाग लिया।उन्होंने अपने पहले प्रयास में 75किलो ग्राम का बेंच प्रेस लगाया वही दूसरे प्रयास में 80 किलोग्राम व अंतिम प्रयास में 87.5 किलोग्राम का बेंच प्रेस लगाकर सोना अपने नाम किया।

उनको विधायक धनी राम शांडिल ने ट्राफी व गोल्ड मेडल पहनाकर कर सम्मानित किया।उनको हिमाचल प्रदेश पावर लिफ्टिंग एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष केवल सिंह पठानिया ने जितने पर शुभकामनाएं दी।सतवीर सिंह ठाकुर ने दैनिक जागरण से बातचीत करते हुए बताया की उनकी तमन्ना अब नेशनल खेलने की है।उन्होंने बताया की वह इसके लिए रोज दो घंटे चिंतपूर्णी छिन्नमस्तिका जिम में वर्कआउट करते है।

उन्‍होंने बताया की उनका सपना पैराओलिंपिक्स खेलने का है। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम सरकार व केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से मांग की है की बेंच प्रेस को भी हिमाचल में खूब एक्सपोजर मिलें। वही इसमें दिव्यांग लोगों को भी मौका मिले ताकि वह अपनी क्षमता दिखा सके।उन्होंने बताया की अगर प्रदेश सरकार उनकी मदद करती है तो वह पैराओलिंपिकस में भी भाग लेना चाहते है और अपने प्रदेश व देश का नाम रोशन करना चाहते हैं।

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