बिलिंग से लापता हो चुके हैं कई पैराग्लाइडर पायलट

बिलिंग से लापता हो चुके हैं कई पैराग्लाइडर पायलट

मुनीष दीक्षित बीड़ (बैजनाथ) पैराग्लाइडिंग के लिए प्रसिद्ध बीड़ बिलिग घाटी जितनी खूबसूरत है उतनी

JagranSun, 10 Jan 2021 07:49 AM (IST)

मुनीष दीक्षित, बीड़ (बैजनाथ) पैराग्लाइडिंग के लिए प्रसिद्ध बीड़ बिलिग घाटी जितनी खूबसूरत है, उतनी ही खतरनाक भी है। इस घाटी से पैराग्लाइडिग पायलट या तो लापता हो चुके हैं या फिर उनकी जान जा चुकी है। यहां हवा के रुख व भौगोलिक परिस्थितियों को आसान आक लेना इसका एक कारण बन चुका है। दुनियाभर में हवाबाजी के खेल में निपुण पायलट भी यहां जान गंवा चुके हैं। यहां पैराग्लाइडिग के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुकाबले हो चुके हैं। यह साइट जितनी खूबसूरत है उतनी ही खतरनाक भी है। 2003 से लेकर अब तक यहां से करीब 10 विदेशी पायलटों की मौत हो चुकी है। एक ब्रिटिश मूल के पायलट जियोल किचन का आज तक कोई पता नहीं चल पाया है। नवंबर में यहां फ्रांस के एक पायलट की प्रशिक्षण के दौरान मौत हो गई। अब फिर से शुक्रवार को दिल्ली का एक पायलट लापता हो गया है। संचार के उपकरण न होने से उसके साथ संपर्क भी नहीं हो पा रहा है।

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ये बरतें सावधानी

प्रशासन ने उड़ान भरने के लिए स्थान चयनित किए हैं और पायलटों को निर्देश दिए जाते हैं कि वे निर्धारित जगह से ही उड़ान भरें। बावजूद इसके कई पायलट मनमर्जी से उड़ान भरते हैं और खराब परिस्थितियों में उलझकर हादसों का शिकार हो जाते हैं। स्थानीय पायलटों का पंजीकरण करते समय उन्हें निर्देश दिए जाते हैं कि अगर कोई बाहर का पायलट यहां से उड़ान भरता है तो उसे यहां की भौगोलिक परिस्थितियों की जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा लंबी उड़ान पर जाने से पहले अपने अन्य साथियों को जानकारी दें और अपने साथ सभी संचार के उपकरण व किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए जरूरी चीजें रखें।

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क्या है पैराग्लाइडिंग

पैराग्लाइडिग दो प्रकार से होती है। एक टेंडम व दूसरी सोलो। टेंडम में एक प्रशिक्षित पायलट किसी भी अंजान व्यक्ति को अपने साथ उड़ा सकता है। सोलो पैराग्लाइडिग में केवल पायलट उड़ता है। प्रदेश में अधिकांश पर्यटक लाइसेंस व अनुभव न होने से केवल टेंडम पैराग्लाइडिग ही करते हैं। यह पूरी तरह से हवा पर निर्भर रहने वाला खेल है।

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छह बार प्री व एक दफा हो चुका व‌र्ल्ड कप

बिलिंग घाटी में छह बार पैराग्लाइडिग प्री व‌र्ल्ड कप का आयोजन हो चुका है। 2015 में पहली दफा देश के पहले पैराग्लाइडिग व‌र्ल्ड कप का आयोजन यहां हुआ था। बिलिग बैजनाथ उपमंडल के बीड़ गांव से 14 किलोमीटर ऊपर धौलाधार की पहाड़ी पर स्थित है। यहां इटली के बाद विश्व की दूसरी बेहतरीन पैराग्लाइडिग साइट है। यहां से 200 किमी तक उड़ान की सुविधा है। यहां पैराग्लाइडिग गतिविधियों को संभालने के लिए केवल एक ही कर्मचारी है। उसके कंधों पर साडा यानी स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी की भी जिम्मेदारी है तथा पैराग्लाइडिग सुपरवाइजर की भी है।

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प्रशासन पायलटों को जरूरी दिशानिर्देश जारी करता है। कुछ हादसे भौगोलिक परिस्थितियों की जानकारी न होने व मौसम के कारण होते है। लगातार यहां सुरक्षा पर काम करवाया जा रहा है।

- छवि नांटा, एसडीएम, बैजनाथ।

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घाटी में अब तक हुए हादसे

2003 : ब्रिटिश पायलट जियोल किचन उड़ान के बाद लापता, आज तक कोई सुराग नहीं।

2004 : चंडीगढ़ के एक पर्यटक की टेंडम फ्लाइंग के दौरान गिरने से मौत।

2009 : रूस के डेनिस व फायल ने उड़ान भरी थी और आदि हिमानी चामुंडा की पहाड़ियों में फंसकर घायल हुए थे।

2009 : रूस के फ्री फ्लायर उड़ान के बाद लापता, एक साल बाद शव पहाड़ियों में भेड़पालकों को मिला था।

2012 : अमेरिका के 75 वर्षीय पैराग्लाइडर पायलट रोन व्हाइट की उतराला की पहाड़ियों में मौत।

2015 : उज्बेकिस्तान के पायलट कोनस्टेनटिन की लैंडिग के दौरान गिरने से हुई थी मौत।

2015 : यूनाइटेड किग्डम की रूथ फ्री फ्लाइंग के दौरान गिरने से घायल हो गई थी।

2016 : पद्धर की घोघरधार की पहाड़ी पर 11 केवी एचटी लाइन से टकराने के बाद रूस के पायलट युडिन निकोलेय की मौत।

2018 : सिगापुर में कई साल तक कमांडो के रूप में सेवाएं देने वाले 53 साल के एनजी कोक चूंग की मौत।

2018 : ब्रिटिश पायलट मैथ्यू का 12 घंटे के बाद पालमपुर की धौलाधार रेंज में 3650 मीटर की ऊंचाई से रेस्क्यू।

2018 : ऑस्ट्रेलिया के 50 वर्षीय पायलट संजय कुमार रामदास की जोगेंद्रनगर के डुगली गांव के समीप क्रैश लैंडिग, मौत।

2020 : फरवरी में टेंडम फ्लाइंग का प्रशिक्षण लेते समय छोटा भंगाल के 24 साल के युवक की मौत।

2020 : नवंबर में फ्रांस के पायलट की प्रशिक्षण के दौरान मौत। इसके अलावा भी यहां कई हादसे हो चुके हैं।

2021 : आठ जनवरी को दिल्ली का एक पायलट सोलो उड़ान के बाद लापता।

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