मंड के किसान बोले, मुकेरियां शुगर मिल को ही बेचेंगे गन्ना

गन्ना किसानों ने कहा कि वे गन्ने की फसल मुकेरियां मिल को ही बेचेंगे। इंडियन सुक्रोज गन्ना मिल मुकेरियां वर्ष 1992 से हिमाचल के किसानों से गन्ना खरीदती आ रही है। 90वें के दशक में मंड क्षेत्र में मात्र 100 एकड़ से भी कम गन्ने की बिजाई हुई थी।

Richa RanaTue, 07 Dec 2021 12:00 PM (IST)
किसानों ने फैसला लिया है कि वह अपने गन्ने की फसल मुकेरियां मिल को ही बेचेंगे।

भदरोआ, मुकेश सरमाल। गन्ना किसानों ने फैसला लिया है कि वह अपने गन्ने की फसल मुकेरियां मिल को ही बेचेंगे। इंडियन सुक्रोज गन्ना मिल मुकेरियां वर्ष 1992 से हिमाचल के किसानों से गन्ना खरीदती आ रही है। विधानसभा क्षेत्र फतेहपुर व इंदौरा में पड़ते मंड क्षेत्र के 37 गांवों के 753 से ऊपर किसान कुल 5000 एकड़ भूमि पर गन्ने की काश्त करते आ रहे हैं ओर अन्य फसलों के मुकाबले अधिकतर किसान गन्ने की फसल की ही काश्त करते है। यह सब गन्ना मुकेरिया स्थित शुगर मिल को बेचते हैं।

90वें के दशक में मंड क्षेत्र में मात्र 100 एकड़ से भी कम ही गन्ने की बीज बिजाई हुई थी। जब शुगर मिल मुकेरियां द्वारा किसानों को गन्ना बीजाई के लिए सबसीडी पर गन्ने का बीज,खादे और कीटनाशक दवाई देने शुरू हुई तो मंड के किसानों का गन्ने की बिजाई की ओर अधिक रूझान बढ़ा और समय समय पर मिल का सहयोग लेकर अपनी वर्षो से बंजर पड़ी हुई सैंकड़ो एकड़ भूमि पर गन्ने की बिजाई शुरू की ओर आज 5000 एकड़ से अधिक भूमि पर गन्ने की काश्त कर किसान अच्छा आर्थिक लाभ कमाकर साधन संपन्न बना है। मंड में अभी गन्ने की कटाई का सीजन शुरू हो गया है और रोजाना पूरे मंड एरिया से लगभग 15000 हजार क्विंटल गन्ना जोकी 100 से ऊपर ट्रॉलियों में लोड कर मुकेरिया मिल में बेचने के लिए ले जाने का मिल का लक्ष्य है। जोकी अभी रोजाना 25 से 30 ट्रालियां मिल में भेजी जा रही है।

मिल शुरू होने से किसानों में खुशी की लहर है तो वही मंड क्षेत्र से ही संबंध रखने बाले कुछ किसानों द्वारा अपने आर्थिक लाभ के चलते मंड के कुछ किसानों को मुकेरिया शुगर मिल के खिलाफ गुमराह कर उन्हें तरह तरह के प्रलोभन ओर सब्जबाग दिखाकर पंजाब के अमृतसर में स्थित एक गन्ना मिल का धर्मकांटा मंड सनोर में स्थापित कर उन्हें अमृतसर की मिल में गन्ना बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है। अगर मुकेरिया मिल की मंड से दूरी मापी जाए तो मात्र 10 से 12 किलोमीटर है और अमृतसर की दूरी 120 से 150 किलोमीटर है।

जिन व्यक्तियों द्वारा यह धर्मकांटा मंड में लगवाया जा रहा है उन लोगों को अमृतसर मिल के स्टाफ व अन्य लोगों के साथ अच्छी सांठ गांठ बताई जा रही है। उनके द्वारा किसानों को यह भी प्रलोभन दिया जा रहा है कि गन्ने की पेमेंट भी 72 घंटे में कर दी जाएगी। कुछ एक किसान अपने निजी आर्थिक लाभ लेने के लिए ही मंड में धर्मकांटा लगाने पर जोर दे रहे है और उक्त अमृतसर की गन्ना मिल द्वारा सब्सिडी पर खाद ,वीज व अन्य कीटनाशक दवाइयां किसानों को दिए जाने की बात कर रहे हैं। इस पर कड़ा रुख लेते हुए मंड के किसानों का यह कहना है कि अमृतसर मिल द्वारा जो भी खाद, बीज व कीटनाशक दवाइयां भेजी गई है वो मात्र कुछेक आर्थिक लाभ लेने वाले किसानों ने ही प्रयोग में ली है।

ज्ञात रहे के वर्ष 1995 में मंड एरिया ओपन जोन होता था और 700 एकड़ गन्ने की बिजाई हुई थी और उस समय मिल द्वारा किसी कारण गन्ना को लेने के लिए मनाई कर दी गई थी और किसानों को सारे गन्ने को आग लगानी पड़ी थी। उसके पश्चात हिमाचल सरकार ने पंजाब सरकार को पत्र लिखकर मंड क्षेत्र का गन्ना अपनी मिल में खरीद करने को लिखा था। उसके बाद दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों में सहमति होने पर पंजाब सरकार ने लिखित में माना था कि हम मंड के किसानों का गन्ना खरीदेंगे ओर जो भी सहूलियत हम पंजाब के गन्ना काश्त किसानों को देते हुए वो सहूलियत मंड के किसानों को देकर उनसे गन्ने की खरीद किया करेंगे। मुकेरिया मिल उसी के आधार पर लगातार 20 वर्षों से मंड के किसानों से गन्ने की खरीद करती आ रही है। मंड में एक मिल द्वारा धर्मकांटा लगाने को लेकर अब फिर से किसानों पर 1995 बाला की संकट छानेे को है।

मंड एरिया में दूसरी मिल के हस्तक्षेप के चलते मुकेरिया मिल द्वारा किसानों को गन्ना बेचने ले जाने के लिए दी जाने बाली गन्ना पर्ची को भी बंद कर दिया है जिससे किसानों केे चेहरों पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी है कि अगर वो अपना गन्ना अमृतसर मिल को भेजे जा फिर मुकेरिया मिल को भेजे।वही अगर मुकेरिया मिल गन्ना लेने में पूर्णता बन्द कर देगी और आनन फानन में अगर अमृतसर की मिल भी गन्ना लेने बंद कर देगी तो किसानों को मजबूरन अपना गन्ना जलाने के ही हालात न बन जाए। जिस कारण गन्ना उत्पादक किसान एक बार फिर संकट में आ गया है।

यह लिया है किसानों ने फैसला

मुकेरिया शुगर मिल के समर्थन में मंड में एकत्रित हुए किसान जिनमें इंदौरा खंड व जिला नूरपुर किसान मोर्चा के महामंत्री जयदीप राणा व जसविंदर मोनू किसान कुलदीप चंद सहित दर्जनों किसानों ने एकत्रित होकर अमृतसर की मिल को सिरे से नकारते हुए कहा कि जब तक मंड क्षेत्र में हिमाचल सरकार अपनी गन्ना मिल नहीं खोल लेती कब तक हम किसान मुकेरियां मिल के साथ ही जुड़े रहना चाहते हैं ओर इस मिल के सिवाए दूसरी किसी भी मिल को गन्ना सप्लाई नही करेंगे और न ही मंड में किसी अन्य शुगर मिल का हस्तक्षेप भी बर्दाश्त नही करेंगे।

यह बोले मुकेरिया मिल प्रबंधक

मुकेरिया मिल मैनेजमेंट से प्रबंधक संजय जी से बात हुई तो उन्होंने बताया कि गन्ने की सप्लाई संबंधी मामला अब हिमाचल सरकार के समक्ष जा चुका है और जो भी आगामी आदेश हिमाचल सरकार के होंगे उनको ही माना जाए।

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