Kinnaur Landslide Alert: अब नहीं डराएंगे किन्‍नौर के पहाड़, भूस्‍खलन से पहले मिलेगी चेतावनी

Kinnaur Landslide Alert जनजातीय जिला किन्नौर में अब पहाड़ दरकने से पहले चेतावनी मिलेगी। जिले के भूस्खलन की दृष्टि से अतिसंवेदनशील 15 स्थानों पर अग्रिम चेतावनी सेंसर तकनीक स्थापित की जाएगी। आइआइटी के शोधार्थी जल्द ही मुख्य सचिव राम सुभाग सिंह के समक्ष सेंसर तकनीक का प्रस्तुति देंगे।

Rajesh Kumar SharmaTue, 14 Sep 2021 11:44 AM (IST)
जनजातीय जिला किन्नौर में अब पहाड़ दरकने से पहले चेतावनी मिलेगी।

मंडी, हंसराज सैनी। Kinnaur Landslide Alert, जनजातीय जिला किन्नौर में अब पहाड़ दरकने से पहले चेतावनी मिलेगी। जिले के भूस्खलन की दृष्टि से अतिसंवेदनशील 15 स्थानों पर अग्रिम चेतावनी सेंसर तकनीक स्थापित की जाएगी। सरकार के निर्देश के बाद किन्नौर जिला प्रशासन ने सेंसर तकनीक स्थापित करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) मंडी के शोधार्थियों से संपर्क साधा है। आइआइटी के शोधार्थी जल्द ही मुख्य सचिव राम सुभाग सिंह के समक्ष सेंसर तकनीक का प्रस्तुति देंगे।

सरकार प्रदेशभर में भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सेंसर तकनीक स्थापित करने पर विचार कर रही है। मंडी जिले में कोटरोपी हादसे के बाद प्रशासन के आग्रह पर आइआइटी के शोधार्थियों ने भूस्खलन की अग्रिम चेतावनी के लिए सेंसर तकनीक विकसित की है। पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोटरोपी, गुम्मा, मनाली-चंडीगढ़ हाईवे पर हणोगी व कुल्लू जिले को जोडऩे वाले वैकल्पिक मार्ग मंडी-कमांद-कटोला बजौरा पर कांढी के पास यंत्र लगाए हैं। यहां तीन साल में कई बार पहाड़ दरके हैं। अग्रिम चेतावनी सेंसर तकनीक की वजह से जानमाल का कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है।

किन्नौर जिला में वैसे तो हर साल पहाड़ दरकते रहते हैं, लेकिन अब वहां के पहाड़ जानलेवा बनने लगे हैं। सांगला के बटसेरी व शिमला-रिकांगपिओ मार्ग पर नियुगलसेरी में पहाड़ दरकने से करीब 35 लोगों की मौत हो गई थी। आए दिन किन्नौर में पहाड़ दरक रहे हैं। इससे स्थानीय लोग भी सहमे हुए हैं। चिह्नित स्थानों पर सेंसर तकनीक स्थापित करने के अलावा भूस्खलन संभावित पहाड़ों की सेटेलाइट मैपिंग होगी।

कैसे काम करती है सेंसर तकनीक

पहाड़ में मिट्टी की चाल या उसमें होने वाली हलचल को मापने के लिए यंत्र में मोशन सेंसर का उपयोग होता है। इसे मिट्टी में जमाकर रखा जाता है। मिट्टी में होने वाली हलचल से एक्सीलेरोमीटर सक्रिय हो जाता है। मिट्टी में हलचल तभी होती है जब उस पर किसी तरह का बल या दबाव पड़ता है। सेंसर नियंत्रण कक्ष के अलावा सड़क किनारे लगाई गई चेतावनी लाइट व सायरन से जुड़े होते हैं। पहाड़ में कम हलचल होने पर रेडलाइट ब्लिंक होना शुरू हो जाती है। इससे वाहन चालक सतर्क हो जाते हैं। प्रशासन हरकत में आकर ऐसे स्थानों पर यातायात की आवाजाही रोक देता है। हलचल अधिक होने पर सायरन बजना शुरू हो जाता है।

क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ व अधिकारी

आइआइटी मंडी के एसोसिएट प्रोफेसर डाक्‍टर वरुण दत्‍त का कहना है किन्नौर जिला प्रशासन ने सेंसर तकनीक को लेकर संपर्क किया है। जल्द तकनीक के संबंध में प्रस्तुति देंगे। उपायुक्‍त किन्‍नौर आबिद हुससैन सादिक का कहना है किन्नौर जिले में 15 ऐसे स्थल चिह्नित किए गए हैं जहां पहाड़ों में भूस्खलन हो रहा है या होने की संभावना है। ऐसे स्थानों पर सेंसर तकनीक स्थापित की जाएगी। आइआइटी मंडी के शोधार्थियों से बातचीत चल रही है।

ये स्थान चिह्नित

किन्नौर जिला प्रशासन ने पागल नाला के नजदीक ककस्थल, ग्राम पानी टापरी, खरोगला नाला नजदीक के बटसेरी, राली, रुतुरंग, टिंकू नाला, मलिंग नाला, नियुगलसेरी को भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील माना है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.