ज्‍वालामुखी मंदिर झड़प मामला: पुलिस जांच में सहयोग से पीछे हट रहे श्रद्धालु, इस जिद के कारण हुआ था विवाद

Jawalamukhi Temple Dispute शक्तिपीठ श्री ज्वालमुखी मंदिर में 16 अक्टूबर की रात को श्रद्धालुओं तथा मंदिर कर्मियों के बीच हुई भिड़ंत के बाद पुलिस जांच तेज कर दी है। इंटरनेट मीडिया पर खुद के साथ न्याय की मांग कर रहे श्रद्धालु पुलिस जांच में शामिल नहीं हो रहे हैं।

Rajesh Kumar SharmaThu, 21 Oct 2021 02:01 PM (IST)
श्रीज्वालमुखी मंदिर में श्रद्धालुओं तथा मंदिर कर्मियों के बीच हुई भिड़ंत के बाद पुलिस जांच तेज कर दी है।

ज्वालामुखी, प्रवीण कुमार शर्मा। Jawalamukhi Temple Dispute, शक्तिपीठ श्री ज्वालमुखी मंदिर में 16 अक्टूबर की रात को श्रद्धालुओं तथा मंदिर कर्मियों के बीच हुई भिड़ंत के बाद पुलिस जांच तेज कर दी है। इंटरनेट मीडिया पर खुद के साथ न्याय की मांग कर रहे श्रद्धालु घटनाक्रम का दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए पुलिस जांच में शामिल नहीं हो रहे हैं। जिससे अंदेशा जताया जा रहा है कि ज्वालामुखी पुलिस पर कथित तौर पर झगड़े में शामिल दोनों पक्षों में समझौते के नाम पर 27,000 रुपये लेने की बात में दूर दूर तक कोई सच्चाई नहीं है, बल्कि अपनी बात को इंटरनेट मीडिया में मजबूत तरीक़े से रखने की मंशा से पैसे के लेनदेन को इस प्रकरण में हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

बुधवार को घटनाक्रम का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर चलने के बाद डीएसपी चंद्रपाल सिंह तथा थाना प्रभारी जीत सिंह महाल ने मंदिर परिसर समेत थाना के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली है। थाना के बाहर जहां दोनों पक्षों ने आपसी समझौता किया था, इसका भी रिकॉर्ड खंगाला गया है। जहां किसी भी तरह का लेनदेन दिखाई नहीं दे रहा है।

मामले में 27,000 की बड़ी रकम के लेनदेन के आरोपों से खिन्न पुलिस ने अमृतसर में श्रद्धालु इंद्रजीत से बात भी की है कि वे ज्वालामुखी पहुंचकर उन लोगों की शिनाख्त करें, जिन्हें वे यह रकम देने की बात कर रहे हैं। लेकिन श्रद्धालु टस से मस नहीं हो रहे। यात्री यह कहकर जांच में सहयोग नहीं दे रहे हैं कि मामला माता जी के मंदिर से संंबंधित है, इसलिए अब वे अपनी तरफ से कुछ नहीं कहेंगे। हालांकि वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि उनके साथ जो हुआ वो किसी और क साथ न हो।

सीसीटीवी कैमरों की रिकार्डिंग इस बात का पुख्ता सबूत है कि श्रद्धालुओं का पैसा देने का बयान कोरा झूठ का पुलिंदा है। जिसमें रती भर भी सच्चाई नहीं है। पुलिस अब भी चाह रही है कि श्रद्धालु ज्वालामुखी पहुंचकर उनके साथ मारपीट करने अथवा पैसा लेन देन करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करवाएं। लेकिन वे पुलिस की कोई भी बात मानने के लिए राजी नहीं हैं। ऐसे में पुलिस के पास जांच आगे बढ़ाने अथवा मारपीट में शामिल लोगों से पूछताछ का कोई भी विकल्प खुला नहीं है अब इस मामले में कोई भी कार्रवाई श्रद्धालुओं की भूमिका पर निर्भर करती है।

आधा घंटा ज्यादा कीर्तन करने की जिद ने किए कई लहूलुहान

शनिवार रात के प्रकरण के पीछे श्रद्धालुओं की आधा घंटा ज्यादा कीर्तन करने की जिद ने छह से ज्‍यादा लोगों को लहूलुहान किया। मंदिर की समय सारिणी के अनुसार रात्रि शयन आरती 9.30 से 10 बजे तक चलती है। आरती खत्म होते ही सभी श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर से बाहर भेजा जाता है। उस रात भीड़ भी अधिक थी। बावजूद इसके अधिकतर श्रद्धालु मंदिर छोड़ चुके थे। सुरक्षा कर्मी द्वारा बार-बार बोलने के बाद भी श्रद्धालु नहीं माने तथा मामला खून खराबे में बदल गया।

थाना प्रभारी ज्वालामुखी जीत सिंह महाल ने यह कहा

हमनें थाना समेत मंदिर में सीसीटीवी कैमरों को तसल्ली से खंगाला है। श्रद्धालु पुलिस को 27,000 तो क्या 27 रुपये भी देने की बात प्रमाणित कर दें तो हम उनसे मजीठा जाकर भी बयान लेने को तैयार हैं। यह गलत है कि बिना सबूतों के आप किसी पर भी आरोप जड़ दें।

डीएसपी चंद्रपाल सिंह ने यह कहा

पुलिस पर जबरन समझौता करवाने के पीछे भी कोई सच्चाई नहीं है। आपसी समझौते में पुलिस दखल नहीं देती है। फिर भी यह कमी रही है कि हमने समझौते की वीडियोग्राफी नहीं की। अब सभी मामलों में आपसी समझौते की वीडियोग्राफी की जाएगी। इसके लिए थाना प्रभारी को निर्देश दे दिए गए हैं।

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