धर्मशाला में बहरूपिया समाज पर भी महंगाई पड़ रही भारी, महंगा हुआ साजो सामान

बहरूपिया होना भी कहां आसान रह गया है। इस समय बढ़ती महंगाई में बहरूपिया की साजो सज्जा का सामान भी इतना महंगा हो गया है कि अब मेकअप भी उतना ही करना पड़़ रहा है जिससे गुजारा चल जाए।

Richa RanaTue, 26 Oct 2021 01:10 PM (IST)
बढ़ती महंगाई का असर बहरूपिया समाज पर भी दिख रहा है।

धर्मशाला, नीरज व्यास। बहरूपिया होना भी कहां आसान रह गया है। इस समय बढ़ती महंगाई में बहरूपिया की साजो सज्जा का सामान भी इतना महंगा हो गया है कि अब मेकअप भी उतना ही करना पड़़ रहा है जिससे गुजारा चल जाए। बेशक अब बहरूपिया बनने व अलग अलग किरदार निभाने व लोगों को रोमांचित करने की पंरपरा को निभाने वाला राहुल अब उस कुल का अकेला दीपक है जो इस परंपरा को निभा रहा है। लेकिन महंगाई ने बहरूपिया को भी अपने भार से दबाना शुरू कर दिया है।

बहरूपिया राहुल इन दिनों झियोल में रह रहा है। जबकि मूल रूप से राजस्थान का निवासी है। झिलोल में पिछले 12 सालों से रहकर अपने परिवार का पालन पौषण कर रहा है। राहुल बताते हैं कि बहरूपिया का काम उनकी पुरखों से चलता आ रहा है। लेकिन वर्तमान में अब कला व कलाकारों की कद्र ही कम नहीं हुई है बल्कि सामाजिक मूल्य भी कम हुए हैं। सामाजिक मूल्यों के गिरने व रामायण, महाभारत व श्रीमद्भागवत महाकाव्यों से लोगों की दूरी व जागरूकता तथा जानकारी के अभाव में बहरूपियां भी अब आदर व सम्मान की जगह कई स्थानों पर तिरस्कार की नजरों से देका जा रहा है।

राहुल बताते हैं कि जब वह अपने पिता के साथ भगवान श्रीराम, श्री कृष्ण, हनुमान के किरदारों में लोगों के बीच जाते थे तो लोग भाव से भर जाते थे, लेकिन अब वह भाव देखने को बहुत कम लोगों में ही रह गए हैं। राहुल ने बताया कि वह 52 अलग अलग किरदार निभाते हैं। जिनमें भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, हनुमान, देवऋषि नारद, रावण, चंद्रकांता धारावाहिक के किरदार क्रूर सिंह, राधा, डाकू मंगल सिंह सहित 52 किरदार लोगों को दिखा कर उनका मनोरंजन करते हैं।

महंगाई व लोगों का तिरस्कार पड़ रहा बहरूपिया प्रचलन पर भारी

मंहगाई व लोगों का तिरस्कार बहरूपिया प्रचलन पर भारी पड़ रहा है। महंगाई के कारण जहां मेकअप का सामान महंगा हो गया है वहीं लोगों में भी वह भावना नहीं रही है जो पहले हुआ करती थी। जो मेकअप का सामान पहले आता था अब उससे यह मूल्य कहीं अधिक बढ़ गया है। अभी भी अलग अलग किरदार करके दिल को तसल्ली होती है। जब बच्चे उन्हें अलग अलग किरदार में देकर कर रोमांच से भर जाती है।

ऐसे चलता है राहुल का घर परिवार का खर्च

राजस्थान मलू के राहुल बताते हैं कि वह अपने परिवार में आखिरी व्यक्ति हैं जो इस पेशे से जुड़े हैं और लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। एक सप्ताह तक एक जगह लगातार किरदार दिखाते हैं और अगले दिन वहां पर पैसों को इकट्ठा करते हैं। जो जितने दे देता है उसी से उनका घर चलता है।

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