Mandi By Election : 2019 मंडी लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस उपचुनाव में 7.81 फीसद कम रहा मतदान प्रतिशत

Mandi By Election हिमाचल प्रदेश में हुए चार उपचुनाव के मतदान में से मंडी लोकसभा उपचुनाव सबकी नजरों में है। इसके पीछे राजनीतिक गणित है कि मंडी जिला से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर हैं। यहां से मिलने वाले मत प्रदेश की राजनीति में अपना प्रभाव छोड़ेंगे।

Virender KumarSun, 31 Oct 2021 08:00 PM (IST)
2019 के मुकाबले इस उपचुनाव में 7.81 फीसद कम रहा मतदान प्रतिशत। जागरण आर्काइव

शिमला, राज्य ब्यूरो। Mandi By Election, हिमाचल प्रदेश में हुए चार उपचुनाव के मतदान में से मंडी लोकसभा उपचुनाव सबकी नजरों में है। इसके पीछे राजनीतिक गणित है कि मंडी जिला से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर हैं। यहां से मिलने वाले मत प्रदेश की राजनीति में अपना प्रभाव छोड़ेंगे।

ऐसा माना जाता है कि आम चुनाव की अपेक्षा उपचुनाव में मतदान अपेक्षाकृत कम रहता है। मंडी लोकसभा सीट पर हुए पिछले तीन चुनाव में इस बार हुए उपचुनाव में अब तक का सबसे कम मतदान हुआ। कांग्रेस व भाजपा दोनों ही दलों के ङ्क्षथक टैंक मंडी उपचुनाव में कम मतदान का विश्लेषण करने में जुटे गए हैं। कम मतदान के साथ-साथ उपचुनाव में महिलाओं की अपेक्षा पुरुष मतदाताओं का पोङ्क्षलग बूथ पर अधिक संख्या में पहुंचना राजनेताओं को हैरान कर रहा है। उपचुनाव में 17 विधानसभा क्षेत्रों में 57.71 फीसद मतदान हुआ है।

यदि पिछले तीन लोकसभा चुनाव को आधार माना जाए तो मंडी में औसत मतदान 64 फीसद के करीब रहता है। 2009 के लोकसभा चुनाव में 64.11 फीसद मतदान हुआ और वीरभद्र ङ्क्षसह मंडी से विजयी हुए थे। 2014 में यहां पर 63.15 तथा 2019 के लोकसभा चुनाव में 66.19 फीसद मतदान हुआ। दोनों बार भाजपा के राम स्वरूप शर्मा विजयी रहे थे। उपचुनाव में 57.17 फीसद मतदान ने भाजपा के विधायकों व मंत्रियों की नींद उड़ा दी है।

2019 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले करीब आठ फीसद कम मतदान से एक बात तो साफ है कि उपचुनाव में जीत का अंतर बड़ा नहीं होने वाला। इसके साथ यह मतदाताओं की उदासीनता को भी दर्शाता है। मतदाताओं को रिझाने के लिए कांग्रेस ने महंगाई व बेरोजगारी को मुद्दा बनाया था। विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई अगर मुद्दा है तो रसोई को चलाने वाली महिला को घर से मतदान करने के लिए निकलना चाहिए था, मगर महिला मतदाता घरों से कम निकलीं। यदि सरकार की ओर से प्रचारित किया गया विकास का मुद्दा मतदाताओं को लुभाता तो मतदान प्रतिशत अधिक रहना चाहिए था, मगर ऐसा नहीं हुआ। जाहिर है कि मतदाताओं ने सत्तारूढ़ भाजपा व विपक्षी कांग्रेस के नेताओं को असमंजस में डाल दिया है। कम मतदान के बाद अब दोनों दलों के नेता अपने-अपने हिसाब से मतदान का विश्लेषण कर रहे हैं।

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