ठिठुरते बेसहारा गरीबों की सुध लेगा मानवाधिकार आयोग : डा. भंडारी

हिमाचल प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग सर्दियों में सड़कों पर ठिठुरने को मजबूर बेसहारा लोगों की सुध लेगा। आयोग के सदस्य डा. अजय भंडारी ने मानवाधिकार जागरूकता पर उमंग फाउंडेशन के साप्ताहिक वेबिनार में कहा कि इस मामले में सरकार को निर्देश जारी किए जाएंगे।

Neeraj Kumar AzadMon, 29 Nov 2021 05:02 PM (IST)
ठिठुरते बेसहारा गरीबों की सुध लेगा मानवाधिकार आयोग। जागरण आर्काइव

शिमला, जागरण संवाददाता। हिमाचल प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग सर्दियों में सड़कों पर ठिठुरने को मजबूर बेसहारा लोगों की सुध लेगा। आयोग के सदस्य डा. अजय भंडारी ने मानवाधिकार जागरूकता पर उमंग फाउंडेशन के साप्ताहिक वेबिनार में कहा कि इस मामले में सरकार को निर्देश जारी किए जाएंगे। उनका कहना था कि आयोग स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से मानवाधिकार जागरूकता अभियान भी चलाएगा।

वेबिनार में करीब 70 युवाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के संयोजक और उमंग फाउंडेशन के ट्रस्टी डा. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव और हिमाचल के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में उमंग फाउंडेशन की ओर से साप्ताहिक वेबिनार शृंखला का आयोजन किया जा रहा है। 11वें कार्यक्रम में 'मानवाधिकार संरक्षण में राज्य मानवाधिकार आयोग की भूमिकाÓ विषय पर डा. अजय भंडारी मुख्य वक्ता थे। उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रो. अजय श्रीवास्तव ने प्रदेश में मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं की जानकारी दी।

डा. अजय भंडारी ने कहा कि प्रदेश में 1995 में मानवाधिकार आयोग का गठन किया था। इसके बाद में दुर्भाग्य से लगभग 15 वर्ष तक आयोग अस्तित्व में ही नहीं रहा। अब उसके गठन के बाद काम की शुरुआत हुई है। इस पहाड़ी प्रदेश में मानवाधिकारों के संबंध में जागरूकता की काफी कमी है। आयोग में ज्यादातर शिकायतें पारिवारिक विवादों से संबंधित होती हैं। मानवाधिकारों को एक विषय के रूप में स्कूल और कालेज स्तर पर पढ़ाया जाना चाहिए। इस बारे में आयोग सरकार को सुझाव देगा। समाज में जागरूकता लाने और मानवाधिकार उल्लंघन रोकने में स्वयंसेवी संस्थाएं आयोग के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

डा. सुरेंद्र कुमार के एक प्रश्न पर डा. भंडारी ने कहा कि सर्दियों में प्रदेश की सड़कों पर ठिठुरते बेसहारा लोगों को शेल्टर उपलब्ध करवाने के लिए आयोग सरकार को निर्देश जारी करेगा। उन्होंने कहा कि यह मानवाधिकार उल्लंघन का गंभीर मुद्दा है। उन्होंने युवा प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। कार्यक्रम के संचालन में डा. सुरेंदर कुमार, विनोद योगाचार्य, संजीव शर्मा और उदय वर्मा ने सहयोग किया।

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