दिल्‍ली में रहने वाले हिमाचलियों ने भी धूमधाम से मनाया सायर पर्व

दिलवालों की दिल्ली में बसे हिमाचली अपनी संस्कृति और त्यौहारों से कितना लगाव रखते हैं। इसकी अनूठी छाप सायर उत्सव पर देखने को मिली है। दिल्ली में बसे हिमाचलियों ने वीरवार को जय ज्वाला डोगरा मंदिर कर्मपुरा में हिमाचली सायर पर्व धूमधाम से मनाया।

Richa RanaThu, 16 Sep 2021 04:01 PM (IST)
दिल्ली में बसे हिमाचलियों ने वीरवार को जय ज्वाला डोगरा मंदिर कर्मपुरा में हिमाचली सायर पर्व धूमधाम से मनाया।

सुरेश बसन, ऊना। दिलवालों की दिल्ली में बसे हिमाचली अपनी संस्कृति और त्यौहारों से कितना लगाव रखते हैं। इसकी अनूठी छाप सायर उत्सव पर देखने को मिली है। दिल्ली में बसे हिमाचलियों ने वीरवार को जय ज्वाला डोगरा मंदिर कर्मपुरा में हिमाचली सायर पर्व धूमधाम से मनाया। उत्सव मनाने के दौरान बाकायदा हिमाचल वासियों ने पूरी तैयारी की। अपनी संस्कृति और पर्व के महत्व को बताने के लिए स्थानीय अन्य राज्यों की वासियों को भी इस पर्व में शामिल किया।

विभिन्न राज्यों से आए गणमान्यों ने सायर पर्व के महत्व तथा पूजन में भाग लेकर खुशी जाहिर की। मंदिर समिति के अध्यक्ष किशोरी लाल शर्मा द्वारा हिमाचली सांस्कृति को दर्शाने वाले सभी उत्सवों को मनाने की पहल पर इस वर्ष दिल्ली में बसे हिमाचलियों ने अपने घरों में सायर उत्सव का आयोजन किया तथा धान के पौधे, तिल के पौधे,पेठा, मक्की, ककड़ी आदि फसलों और फलों का पूजन किया ।आपदा भरी बरसात के बाबजूद जान माल की सुरक्षा के लिए सायर की पूजा के माध्यम से भगवान का धन्यवाद किया। जय ज्वाला मन्दिर समिति के अध्यक्ष किशोरी लाल शर्मा ने कहा की इस बार सायर पूजा में हिमाचलियों ने बिहार, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु जैसे दूसरे प्रांतों के लोगों को आमंत्रित किया गया। ताकि हिमाचली सांस्कृति को दर्शाया जाए और सांस्कृतिक सदभाव स्थापित किया जा सके।

यह है सायर पर्व का महत्व

देवभूमि हिमाचल प्रदेश में साल भर बहुत से त्योहार मनाए जाते हैं और लगभग हर सक्रांति पर कोई न कोई उत्सव मनाया जाता है । प्रदेश की पहाड़ी संस्कृति का प्राचीन भारतीय सभ्यता या यूं कहें तो देसी कैलेंडर के साथ एकरसता का परिचायक है । सायर उत्सव भी इन्हीं त्योहारों में से एक है । प्रदेश में आज सायर उत्सव मनाया जा रहा है । सायर त्योहार अश्विन महीने की संक्रांति को मनाया जाता है । यह उत्सव वर्षा ऋतु के खत्म होने और शरद ऋतु के आगाज के उपलक्ष्य में मनाया जाता है ।

इस समय खरीफ की फसलें पक जाती हैं और काटने का समय होता है , तो भगवान को धन्यवाद करने के लिए यह त्योहार मनाते हैं । सायर के बाद ही खरीफ की फसलों की कटाई की जाती है । इस दिन " सैरी माता " को फसलों का अंश और मौसमी फल चढ़ाए जाते हैं और साथ ही राखियां भी उतार कर सैरी माता को चढ़ाई जाती हैं । वर्तमान में त्योहार मनाने के तरीके भी बदलें हैं और पुराने रिवाज भी छूटे हैं ।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.