हिमाचल में पहली से आठवीं कक्षा तक की मिड टर्म परीक्षा होगी आनलाइन, जानिए क्‍या रहेगी प्रक्रिया

Himachal Pradesh School Exam कोरोना महामारी के खतरे के बीच सरकारी स्कूलों में बच्चों की परीक्षाएं (फारमेटिव असेसमेंट) आनलाइन ही होंगी। कोरोनाकाल में स्कूल बंद हैं। ऐसे में विभाग ने परीक्षाएं आनलाइन करवाने की योजना तैयार की है।

Rajesh Kumar SharmaWed, 21 Jul 2021 08:47 AM (IST)
कोरोना महामारी के खतरे के बीच सरकारी स्कूलों में बच्चों की परीक्षाएं (फारमेटिव असेसमेंट) आनलाइन ही होंगी।

शिमला, जागरण संवाददाता। Himachal Pradesh Schools, कोरोना महामारी के खतरे के बीच सरकारी स्कूलों में बच्चों की परीक्षाएं (फारमेटिव असेसमेंट) आनलाइन ही होंगी। कोरोनाकाल में स्कूल बंद हैं। ऐसे में विभाग ने परीक्षाएं आनलाइन करवाने की योजना तैयार की है। समग्र शिक्षा अभियान (एसएसए) की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए सरकार को भेजा गया है। जल्द ही सचिव शिक्षा राजीव शर्मा की अध्यक्षता में अधिकारियों की बैठक होगी। इसमें परीक्षा पर चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह तय है कि परीक्षाएं अगस्त के दूसरे सप्ताह में होंगी। विभाग ने स्कूलों को परीक्षाएं करवाने के लिए तैयारी करने को कहा है।

हर घर पाठशाला कार्यक्रम के तहत बच्चों को जितना सिलेबस कवर करवाया गया है, उतना ही परीक्षा में पूछा जाएगा। जिन विद्यार्थियों के पास मोबाइल फोन की सुविधा नहीं है, वे आंसर शीट पर पेपर लिखकर इसकी हार्ड कापी स्कूल में जमा करवा सकते हैं। जो विद्यार्थी आनलाइन परीक्षा देंगे, उन्हें भी आंसरशीट बाद में स्कूल में जमा करवानी होगी।

परीक्षा का मूल्यांकन करने के बाद इसकी बाकायदा रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसमें देखा जाएगा कि कितने विद्यार्थी पढ़ाई में कमजोर हैं। एसएसए की योजना है कि परीक्षाएं शुरू होने से पहले जरूरतमंद विद्यार्थियों को स्मार्ट फोन दिए जाएं ताकि उनकी पढ़ाई में किसी तरह की बाधा न आए। विभाग के पास 23 जुलाई तक ऐसे विद्यार्थियों का डाटा उपलब्ध होगा, जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है।

बालिका शिक्षा को दें बढ़ावा : ममता

शिमला। बाल विकास परियोजना शिमला शहरी की ओर से लांगवुड व कृष्णानगर में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत नुक्कड़ नाटक व जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। इनमें बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच रखकर बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने, बालिकाओं का गर्भ से लेकर किशोरावस्था तक पोषण, शिक्षा व स्वास्थ्य से संबंधित जरूरतों के प्रति सजग किया गया। बाल विकास परियोजना अधिकारी शिमला शहरी ममता पाल ने बताया कि लोकगीतों, नाटी व नुक्कड़ नाटक से बेटियों के जन्म को अभिशाप न समझकर इसे जन्मोत्सव के रूप में मनाने का आह्ïान किया गया। उन्होंने बताया कि नवजात बेटियों के जन्म पर बधाई पत्र भेंट दिए जा रहे हैं। इस मौके पर पार्षद बिट्टू कुमार, तनुजा चौधरी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं उपस्थित रहीं।

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