कांग्रेस नेता रोहित ठाकुर का सरकार पर हमला, सेब सीज़न की तैयारी के प्रति नहीं गंभीर, कार्टन के बढ़ा दिए रेट

Himachal Congress Leader Rohit Thakur कोरोना काल में पिछले वर्ष के अनुभवों के बावजूद प्रदेश सरकार सेब सीज़न की तैयारियों को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नही है। कार्टन फैक्ट्रियों ने पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष पैकेजिंग सामग्री के दामों में 25 फीसद तक बढ़ोतरी कर ली है।

Rajesh Kumar SharmaMon, 14 Jun 2021 06:19 AM (IST)
प्रदेश सरकार सेब सीज़न की तैयारियों को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नही है।

शिमला, जागरण संवाददाता। कोरोना काल में पिछले वर्ष के अनुभवों के बावजूद प्रदेश सरकार सेब सीज़न की तैयारियों को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नही है। पूर्व मुख्य संसदीय सचिव व जुब्बल नावर कोटखाई के पूर्व विधायक रोहित ठाकुर ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि सरकार के हस्तक्षेप के अभाव व कोरोना की आड़ में कार्टन फैक्ट्रियों ने पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष पैकेजिंग सामग्री के दामों में 25 फीसद तक बढ़ोतरी कर ली है। जिससे अब बागवानों को प्रति पेटी कार्टन और ट्रे पर 25 से 30 रुपये अतिरिक्त देने पड़ेंगे। कार्टन व ट्रे के दाम में कोई बढ़ोतरी न होने का बागवानी मंत्री का बयान जनता को गुमराह करने वाला हैं या मंत्री इस सच्चाई से परिचित नही हैं।

रोहित ठाकुर ने कहा कि सरकार ने अपने स्तर पर कार्टन और ट्रे के टेंडर तो आमंत्रित कर दिए लेकिन अभी तक इन्हें अंतिम रूप नहीं दिया गया जबकि कुछ दिनों में ही कम ऊंचाई वाले स्थानों में अर्ली वैरायटी के सेब का तुड़ान शुरू हो जाएगा और स्टोन फ्रूट का सीज़न जोरों से चला हुआ हैं। रोहित ठाकुर ने कहा कि उपरी शिमला में ओलावृष्टि और तूफ़ान का क्रम रुकने का नाम नहीं ले रहा। तूफ़ान से सेब सहित अन्य फसलों के साथ घरों व गौशालाओं को भारी नुक़सान पहुंचा हैं।

उन्होंने सरकार से ओलावृष्टि और तूफान से प्रभावित किसानों को अविलंब राहत देने की मांग की है। अप्रैल माह में भी बेमौसमी बर्फबारी और ओलावृष्टि से सरकारी आंकलन के अनुसार सेब की बागवानी को 254 करोड का नुकसान हुआ हैं जिसकी भरपाई के लिए सरकार ने कोई भी कार्रवाई नहीं की हैं। रोहित ठाकुर ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बागवानी क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित 1134 करोड रुपए का बागवानी विकास प्रोजेक्ट जनता को समर्पित किया गया था लेकिन भाजपा सरकार के उदासीन रवैए के चलते पिछले 3 वर्षों में प्रोजेक्ट के तहत मात्र 296 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं, जो कि स्वीकृत प्रोजेक्ट राशि का मात्र 26 फीसद है।

कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने प्रदेश की आर्थिकी में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कृषि क्षेत्र को प्रभावित किया हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष कोरोना काल में जहां हर क्षेत्र ने पूरी तरह से घुटने टेक दिए थे वही किसानों की कड़ी मेहनत और इच्छाशक्ति से कृषि और बागवानी क्षेत्र मजबूती से खड़ा रहा। रोहित ठाकुर ने कहा कि जिला शिमला में सड़कों की दुर्दशा बनी हुई है। पिछले 3 वर्षों में जिला शिमला में सड़क का एक भी नया प्रोजेक्ट केंद्रीय सड़क निधि के तहत स्वीकृत नहीं हुआ और ना ही कोई सड़क वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट में डाली गई। रोहित ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार जिला शिमला के साथ सौतेला व्यवहार कर रही हैं।

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