हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मुकदमा निगरानी समिति को सुचारू करने का दिया आदेश

हाईकोर्ट ने अदालतों पर अवांछित भार कम करने को लेकर राज्य सरकार द्वारा बनाई विभागीय मुकदमा निगरानी समिति को सुचारू करने के आदेश जारी किए है। निगरानी समिति के मुकदमों और कामकाज की आवधिक लेखा जांच होनी चाहिए और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी परिणामी कार्रवाई होनी चाहिए।

Vijay BhushanWed, 28 Jul 2021 09:48 PM (IST)
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मुकदमा निगरानी समिति को सुचारू करने का आदेश दिया। जागरण आर्काइव

शिमला, जागरण संवाददाता। हाईकोर्ट ने अदालतों पर अवांछित भार कम करने को लेकर राज्य सरकार द्वारा बनाई विभागीय मुकदमा निगरानी समिति को सुचारू करने के आदेश जारी किए है। राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए है कि ऐसे सभी प्रकार के मामले संबंधित अधिकारी, कर्मचारी द्वारा विभागीय मुकदमा निगरानी समिति के समक्ष रखे जाए, जिनका निपटारा कानूनन संभव हो सकता है। ऐसा करने में विफल रहने वाले अधिकारी, कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। साथ ही निगरानी समिति के मुकदमों और कामकाज की आवधिक लेखा जांच होनी चाहिए और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी परिणामी कार्रवाई होनी चाहिए।

न्यायाधीश विवेक ङ्क्षसह ठाकुर ने एक याचिका का निपटारा करते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को निर्देशानुसार नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के आदेश जारी किए है। उन्हें 31 अगस्त या उससे पहले इस संबंध में अनुपालना हलफनामा दाखिल करने के आदेश जारी किए गए हैं। इस मामले को सात सितंबर को केवल इस उद्देश्य के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव (गृह) ने सात मार्च, 201 1को हिमाचल प्रदेश राज्य मुकदमा नीति को अनुमोदित किया था। इसे न केवल, हिमाचल प्रदेश सरकार के सभी प्रधान सचिवों और हिमाचल प्रदेश के सभी विभागाध्यक्षों को, लेकिन गृह विभाग की वेबसाइट के ङ्क्षलक से अभियोजन विभाग की वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया है। सभी को यह भी सूचित किया गया था कि यह नीति राज्य सरकार या उसकी एजेंसियों द्वारा मुकदमेबाजी पर परिहार्य लागत से बचाने के लिए मुकदमेबाजी को कम करने के लिए मुकदमेबाजी रणनीतियों के व्यापक दिशानिर्देशों की रूपरेखा तैयार की है। प्रेरित मुकदमेबाजी नीति के अनुसार, दावों और मुकदमों को संभालने में ईमानदारी और निष्पक्षता से कार्य करने के लिए राज्य और उसकी एजेंसियों पर अनिवार्य दायित्व निर्धारित किया है, जिसमें दावों से तुरंत निपटना और दावों के संचालन में अनावश्यक देरी नहीं करना, दावों के आंशिक निपटान या अंतरिम भुगतान सहित, मुकदमेबाजी के बिना वैध दावों का भुगतान करना शामिल है।

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