कोटखाई मामले में परिजनों ने इंसाफ को अधूरा बताया

हिमाचल प्रदेश के कोटखाई क्षेत्र में छात्रा दुष्कर्म एवं हत्या मामले में बेशक देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की थ्योरी कोर्ट में सही साबित हुई हो लेकिन पीडि़त परिवार जांच और फारेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर सवाल उठा रहा है।

Vijay BhushanFri, 18 Jun 2021 11:50 PM (IST)
कोटखाई मामले में अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं स्वजन। प्रतीकात्मक

रमेश सिंगटा, शिमला। हिमाचल प्रदेश के कोटखाई क्षेत्र में छात्रा दुष्कर्म एवं हत्या मामले में बेशक देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की थ्योरी कोर्ट में सही साबित हुई हो, लेकिन पीडि़त परिवार जांच और फारेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर सवाल उठा रहे हैं। पीडि़ता के स्वजन का आरोप है कि सीबीआइ ने अधूरा सच ही सामने लाया है। मृतका के माता-पिता की नजरें अब हाईकोर्ट में लंबित याचिका पर टिकी हुई हैं।

शिमला स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत में शुक्रवार को दोषी अनिल उर्फ नीलू चिरानी को जैसे ही कोर्ट से सजा हुई 'दैनिक जागरणÓ ने पीडि़त परिवार से बात की। मां बोलीं, हम संतुष्ट नहीं है। अकेला व्यक्ति इतना बड़ा जुर्म नहीं कर सकता। वह दोषी होगा, लेकिन बाकी दोषी कहां है? उनको सीबीआइ ने अब तक क्यों नहीं पकड़ा है। पिता का कहना है कि चलो चिरानी भी गुनाहगार होगा, लेकिन और लोग कहां है? अगर नीलू ही होता तो पुलिस वाले अपनी नौकरी दांव पर लगाते, कुछ तो गड़बड़ है। सुप्रीम कोर्ट तक गए हम, अब थक चुके हैं। हाईकोर्ट से उम्मीद लगी है। देखते हैं क्या होता है। कुछ देर बाद भावुक होकर मां बोलीं, मेरी बेटी तो रही नहीं... दङ्क्षरदों को जरा भी दया नहीं आई। कुछ संदिग्धों की फोटो वायरल हुई थी, उसे वायरल करने वालों को क्यों नहीं पकड़ा, सुराग मिल जाता है।

क्या कहती है जांच

सीबीआइ के अनुसार छात्रा की मौत दिन के भोजन के दो घंटे के बाद हुई, लेकिन पीडि़त परिवार इससे सहमत नहीं है। चार जुलाई, 2017 को लंच तीन बजे किया था। सवा चार बजे तक वह स्कूल परिसर में देखी गई। इसके बाद एक घंटे के अंदर हुई मौत हो गई। स्वजन के अनुसार मौत चार नहीं पांच जुलाई को हुई थी। हाईकोर्ट में दाखिल जवाब में सीबीआइ ने तर्क दिया था कि मौत के असली समय का निर्धारण कोई भी चिकित्सा विशेषज्ञ नहीं कर सकता है। वह केवल समय की रेंज बता सकता है। छात्रा के केस में अंतिम भोजन के दो घंटे के अंदर या फारेंसिक परीक्षण के दो- तीन दिन के अंदर हुई होगी। मृतका का पोस्टमार्टम आइजीएमसी शिमला में सात जुलाई को हुआ। जवाब में कहा गया था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ है कि छात्रा की मौत चार जुलाई की शाम को हुई न की पांच जुलाई को।

टाइम लाइन

4 जुलाई, 2017: कोटखाई क्षेत्र के एक स्कूल की छात्रा गायब।

5 जुलाई, 2017: स्वजन ने छात्रा की जंगल में तलाश की।

6 जुलाई, 2017: हलाइला के जंगल में शव मिला, पुलिस ने की जांच शुरू।

7 जुलाई, 2017: पोस्टमार्टम में दुष्कर्म की पुष्टि।

10 जुलाई, 2017: राज्य सरकार ने एसआइटी गठित की, आइजी जहूर हैदर जैदी को जिम्मा सौंपा।

11 जुलाई, 2017: चार युवकों को पूछताछ के लिए पकड़ा।

18 जुलाई, 2017: आधी रात को पुलिस हिरासत में एक आरोपित की हत्या।

19 जुलाई, 2017: हाईकोर्ट ने सीबीआइ को सौंपा जांच का जिम्मा।

22 जुलाई, 2017: सीबीआइ ने दिल्ली में किए दो अलग-अलग मामले दर्ज।

29 अगस्त, 2017: आइजी जैदी सहित आठ पुलिस कर्मी गिरफ्तार।

16 नवंबर, 2017: पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी को सीबीआइ ने किया गिरफ्तार।

25 नवंबर, 2017: सीबीआइ द्वारा एसआइटी के खिलाफ चार्जशीट दायर।

25 अप्रैल, 2018 : सीबीआइ ने कोर्ट में फाइनल स्टेट्््स रिपोर्ट पेश की।

5 अप्रैल, 2019: आइजी जैदी को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत।

18 अप्रैल, 2019 : पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी को हाईकोर्ट से मिली जमानत।

28 अप्रैल, 2021 : अभियुक्त नीलू दोषी करार।

15 जून,2021 : सुनवाई के दौरान दोषी की सजा पर बहस पूरी, सीबीआइ ने की फांसी देने की मांग। बचाव पक्ष ने उम्र कैद की अपील की।

18 जून,2021 : दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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