गनोह कामधेनु गोशाला में दीपावली के लिए तैयार किए जा रहे गोबर के दीये, पांच रुपये का दीया भी है खास

Gobar Diyas हिमाचल प्रदेश में गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी कामधेनु गोशाला गनोह अहम भूमिका निभा रही है। उपमंडल नूरपुर के तहत गनोह गांव में स्वदेशी कामधेनु गोशाला में गाय के गोबर से दीये धूप व अन्य सामान तैयार किया जा रहा है।

Rajesh Kumar SharmaThu, 21 Oct 2021 01:46 PM (IST)
गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी कामधेनु गोशाला गनोह अहम भूमिका निभा रही है।

नूरपुर, प्रदीप शर्मा। Gobar Diyas, हिमाचल प्रदेश में गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी कामधेनु गोशाला गनोह अहम भूमिका निभा रही है। उपमंडल नूरपुर के तहत गनोह गांव में स्वदेशी कामधेनु गोशाला में गाय के गोबर से दीये, धूप व अन्य सामान तैयार किया जा रहा है। गोशाला के संचालक रिषी डोगरा ने बताया उन्होंने अपनी गोशाला में भारतीय साहनीवाल, राठी व गीर प्रजाति की 30 गायें रखी हुई हैं व गाय के दूध, गोबर व मूत्र से विभिन्न उत्पाद तैयार कर गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका यह प्रयास है कि जो व्यक्ति किसी कारणवश अपने घर में गाय नही पाल सकता, उसे गोशाला के माध्यम से शुद्ध उत्पाद मुहैया करवाए जा सकें।

दीपावली से पहले गोशाला में गाय के गोबर से दीये व धूप अगरबत्ती तैयार की जा रही है। इस साल गनोह की गोशाला में पांच हजार दीये तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले साल भी गोबर से दीयें बनाए गए हैं, जिनकी ज्यादातर बिक्री दिल्ली, चंडीगढ़ व पठानकोट में हुई है, जबकि स्थानीय बाजार में लोगों ने गौशाला में तैयार हुए उत्पाद खरीदने में कुछ ज्यादा रुचि नहीं दिखाई।

स्वदेशी कामधेनु गोशाला में तैयार होने वाले उत्पाद

स्वदेशी कामधेनु गोशाला गनोह में इस समय गाय के गोबर से दीपावली के लिए दीये व नवग्रह धूप तैयार किए जा रहा है। गोशाला में रंगीन दीया सात रुपये व सामान्य दीया पांच रुपये में उपलब्ध है। नवग्रह धूप 175 रुपये का पैकेट है। गोशाला में देसी तकनीक से तैयार शुद्ध व आर्गेनिक देसी घी करीब तीन हजार रुपये लीटर है। गाय के गूत्र से गोशाला फ्लोर क्लीनर, गोअर्क ,खाद व कई प्रकार की आयुर्वेदिक दवाएं तैयार की जा रही है।

क्या कहते हैं गोशाला के संचालक

स्वदेशी कामधेनु गोशाला गनोह के संचालक रिषि डोगरा ने बताया गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना उनका मुख्य उद्देश्य है। यह तभी संभव है जब लोग गोशाला में बने उत्पादों का उपयोग करें। उन्होंने बताया कि उनकी गोशाला में भारतीय नस्ल की 30 गायें है व तीन लोग उनकी देखभाल में लगे हुए हैं। गोशालाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए वह स्वयं गोशाला के संचालकों को प्रशिक्षण दे रहे हैं, ताकि गोशाला में विभिन्न तरह के उत्पाद तैयार किए जा सकें। उन्होंने बताया कि वह नालागढ़ व सोलन में कुछेक गोशालाओं में जाकर वहां प्रशिक्षण दे चुके हैं। उन्होंने बताया सरकार यदि गोशाला में तैयार उत्पादों की मार्केटिंग में मदद करे तो इससे गोशाला में तैयार उत्पाद बेचने में आसानी होगी। उन्होंने सरकार से यह भी मांग की है कि गोशाला में तैयार होने वाली आयुर्वेदिक दवाओं का आसानी से लाइसेंस मुहैया करवाया जाए ताकि लोगों को गोशाला में बनी आयुर्वेदिक दवाएं आसानी से मिल सकें। उन्होंने लोगों से दीपावली पर गाय के गोबर से तैयार दीये व धूप उपयोग करने की अपील की। उन्होंने बताया कि गोशाला में तैयार उत्पादों को आनलाइन उपलब्ध करवाने का भी प्रयास किया जा रहा है।

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