चार साल से भाजपा के अंदर सुलग रही चिंगारी अब भड़की, परमार के त्यागपत्र के बाद और गरमाई राजनीति

Himachal Pradesh BJP चार साल से भाजपा के अंदर चल रही कलह की ज्वाला अब उपचुनाव के परिणाम के बाद बाहर आने लगी है। भाजपा के कांगड़ा जिला के कद्दावर नेता एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य कृपाल परमार ने मंगलवार को पार्टी के उपाध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया।

Rajesh Kumar SharmaWed, 24 Nov 2021 09:05 AM (IST)
चार साल से भाजपा के अंदर चल रही कलह की ज्वाला अब उपचुनाव परिणाम के बाद बाहर आने लगी है।

शिमला, जागरण संवाददाता। Himachal Pradesh BJP, चार साल से भाजपा के अंदर चल रही कलह की ज्वाला अब उपचुनाव के परिणाम के बाद बाहर आने लगी है। भाजपा के कांगड़ा जिला के कद्दावर नेता एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य कृपाल परमार ने मंगलवार को पार्टी के उपाध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने साफ कहा कि वह अब और अनदेखी सहन नहीं कर सकते। सूत्र बताते हैं कि परमार उपचुनाव में टिकट न मिलने से नाराज चल रहे थे। चार साल से पार्टी और सरकार दोनों में ही कोई ज्यादा तरजीह नहीं दी गई। सत्ता में आने के बाद कोई पद सरकार में नहीं दिया।

पार्टी ने चुनाव हारने के बावजूद कई नेताओं को सरकार में स्थान दिया, संगठन में महत्वपूर्ण काम दे रखे हैं। संगठन के नेताओं के साथ भी इंटरनेट मीडिया पर परमार कई बार आमने-सामने हो गए। उपचुनाव से पहले माना जा रहा था कि परमार को भाजपा फतेहपुर से प्रत्याशी बनाएगी लेकिन पार्टी ने टिकट बदल दिया।

सूत्रों की मानें तो पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी बलदेव ठाकुर की ओर से पार्टी मुख्यालय में एक पत्र भेजा गया है। इसमें कृपाल परमार पर उपचुनाव में पार्टी के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया गया। इसके बाद फतेहपुर भाजपा में काफी संघर्ष की स्थिति पैदा हो गई थी।

राजनीतिक जानकार भी मानते हैं कि फतेहपुर में दोनों में से किसी एक का ही पार्टी में रहना तय माना जा रहा था। लेकिन ये इतनी जल्दी होगा यह किसी को उम्मीद नहीं थी। सभी यह मानकर चल रहे थे कि 2022 तक सभी इंतजार करेंगे। इसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा, लेकिन परमार ने पद से त्यागपत्र के साफ कर दिया है कि वह पार्टी में अगली बार शायद ही दावेदारी पेश करें।

किसी दूसरे दल में जाने की सुगबुगाहट

परमार के त्यागपत्र के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा के नाराज नेताओं से लगातार ही दूसरे दल संपर्क कर रहे हैं। ऐसे में कहीं पार्टी से टिकट न मिलने से नाराज नेता किसी नए राजनीतिक दल को राज्य में लांच करने की तैयारी में तो नहीं लगे हैं। ऐसी ही स्थिति कांग्रेस में भी हाशिए पर पड़े नेताओं की भी है।

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