21 माह बाद भी श्रद्धालु भोग प्रसाद से वंचित

प्रवीण कुमार शर्मा ज्वालामुखी कोरोना की पहली लहर के बीच 17 मार्च 2020 से प्रदेश के बड़े मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए बंद पड़ी लंगर व्यवस्था 21 माह बाद भी शुरू नहीं हो पाई है। मां चिंतपूर्णी में पिछले सप्ताह से ही प्रशासन ने लंगर शुरू कर यात्रियों के लिए प्रसाद वितरण की अनुमति दी थी लेकिन श्री ज्वालामुखी श्री बज्रेश्वरी देवी व श्री चामुंडा देवी मंदिर में व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई है।

JagranThu, 02 Dec 2021 06:00 AM (IST)
21 माह बाद भी श्रद्धालु भोग प्रसाद से वंचित

प्रवीण कुमार शर्मा, ज्वालामुखी

कोरोना की पहली लहर के बीच 17 मार्च, 2020 से प्रदेश के बड़े मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए बंद पड़ी लंगर व्यवस्था 21 माह बाद भी शुरू नहीं हो पाई है। मां चिंतपूर्णी में पिछले सप्ताह से ही प्रशासन ने लंगर शुरू कर यात्रियों के लिए प्रसाद वितरण की अनुमति दी थी लेकिन श्री ज्वालामुखी, श्री बज्रेश्वरी देवी व श्री चामुंडा देवी मंदिर में व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई है।

इन मंदिरों में लंगर तो दूर की बात भोग के रूप में चढ़ाए जाना वाला हलवा भी गर्भगृह तक न ले जा पाने से श्रद्धालु निराश हो रहे हैं। विवाह व अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान स्थानीय लोग धाम को शुरू करने से पहले भोग की परंपरा को मंदिरों में निभाते हैं। उन्हें भी भोग लगाने की अनुमति नहीं मिल पा रही है। श्री ज्वालामुखी, श्री बज्रेश्वरी व श्री चामुंडा देवी मंदिरों में भीड़ रहती है। यदि श्री चितपूर्णी मंदिर में लंगर व भोग की व्यवस्था बहाल हुई है तो प्रदेश के बाकी मंदिरों में व्यवस्था के नाम पर अलग-अलग पैमाने क्यों हैं।

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लाखों लोग खाते हैं लंगर का प्रसाद

सभी बड़े मंदिरों में सालाना लाखों लोग लंगर के रूप में प्रसाद ग्रहण करते हैं। मौजूदा समय में श्री चितपूर्णी मंदिर को छोड़कर कहीं भी श्रद्धालुओं को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। लंगर शुरू न होने से उस तबके को मुश्किलें हैं जो आर्थिक तंगी के बावजूद मंदिरों तक तो पहुंच जाते हैं, लेकिन खाने पीने की व्यवस्था के लिए लंगरों पर ही निर्भर होते हैं।

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न्यास सदस्य बोले-शुरू हो व्यवस्था

मंदिर न्यास ज्वालामुखी के सदस्य शशि चौधरी, प्रशांत शर्मा, सौरभ शर्मा, जितेंद्र पाल दत्ता, बाबा बालक नाथ मंदिर न्यास के सदस्य सोमदत्त शर्मा व नयना देवी मंदिर न्यास सदस्य प्रदीप शर्मा ने प्रशासन से लंगर व्यवस्था शुरू करने की गुहार लगाई है।

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जिला कांगड़ा के मंदिरों में हलवे के भोग को गर्भगृह तक ले जाने व लंगर व्यवस्था शुरू करने की कोई योजना नहीं है। हम सरकार की ओर से जारी एसओपी के तहत ही धार्मिक स्थानों में नियमों का पालन करवा रहे हैं। सरकार के निर्देश हुए तो व्यवस्था बहाल की जा सकती है। अभी तक इस बाबत कोई निर्णय जिला प्रशासन ने नहीं लिया है। फिलहाल जिले के मंदिरों में कोरोना एसओपी में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

-डा. निपुण जिदल, उपायुक्त कांगड़ा

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