धर्मशाला में पवित्र डल झील का वैभव लौटाने के लिए आज करेगा प्रशासन मंथन, सूखी डल झील, लाखों रुपये खर्चने पर उठा सवाल

पवित्र डल झील का वैभव लौटाने को जिला प्रशासन आज मंथन करने जा रहा है। सूखी डलझील पर लाखों रुपये खर्चेने के बावजूद भी लीकेज होने के कारण जिला प्रशासन पर्यटन विभाग व इससे जुड़े रहे क्षेत्रीय नेताओं को भी सवालों के कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।

Richa RanaFri, 26 Nov 2021 10:21 AM (IST)
पवित्र डल झील का वैभव लौटाने को जिला प्रशासन आज मंथन करने जा रहा है।

धर्मशाला, नीरज व्यास। पवित्र डल झील का वैभव लौटाने को जिला प्रशासन आज मंथन करने जा रहा है। हालांकि सूखी डलझील पर लाखों रुपये खर्चेने के बावजूद भी लीकेज हो जाने के कारण जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग व इससे जुड़े रहे क्षेत्रीय नेताओं को भी सवालों के कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। बीते करीब पंद्रह दिनों से धीरे धीरे डल झील में लीकेज हो रही थी। जिस कारण इस पवित्र झील में डाली गई मछलियों के मरने का क्रम शुरू हो गया था। इन्हें सुरक्षित करने के लिए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से गुहार लगाई।

स्थानीय लोगों व तिब्बति समुदाय के लोगों ने मिलकर इन मछलियों को जिला के अन्य जलाश्यों में सुरक्षित पहुंचाने का कार्य किया। लेकिन एक बड़ा सवाल यहां पर यह जरूर खड़ा हुआ है कि आखिरकार डल झील में लाखों रुपये खर्चेने के बाद भी इसकी लीकेज कैसे हो गई। जबकि लीकेज को पूरी तरह से खत्म करने के लिए ‌विशेषज्ञों की भी मदद ली गई थी। ऐसे में अब यह पूरा मामला एक बड़ी जांच का बन जाता है, जिसमें सबकी जवाबदेही सुनिश्चित हो।

लीपापोती हुई, नहीं बंद हुई लीकेज

झील का ऐसा आलम एक बार पहले भी हुआ था। 2014 में जब झील सुखी थी तो वहां की मछलियां मर गईं थी और कुतों उन मछलियां को खाते पाए गए थे। वर्ष 2014 से झील से पानी का रिसाव शुरू हुआ था, लेकिन प्रशासन आज दिन तक इसे रोकने में नाकाम रहा है। झील के सुंदरीकरण के नाम पर सरकारें और प्रशासन अब तक लाखों रुपये खर्च कर चुके हैं, लेकिन परिणाम आज दिन तक शून्य ही हैं। मई, 2014 में डल झील में पहली बार लीकेज के कारण झील खाली होनी शुरू हुई थी।

उस समय प्रशासन ने लीपापोती कर केवल लीकेज वाले स्थान पर कंकरीट डाल दी। बावजूद इसके समस्या का समाधान नहीं हो पाया। उसके बाद भी बार-बार यह लीकेज हो रही है। नौ अगस्त, 2017 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने डल झील के सुंदरीकरण के दो करोड़ रुपये से प्रस्तावित कार्य का शिलान्यास किया था। यह कार्य एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के माध्यम से किया जाना था। हालांकि इसको लेकर कुछ काम हुआ भी, लेकिन परिणाम शून्य हैं

ऐतिहासिक महत्व रखती है यह पवित्र डलझील

मणिमहेश के बाद डल झील दूसरी ऐसी पवित्र झील है, जहा हर वर्ष राधाष्टमी के दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु पवित्र स्नान करते हैं। इसलिए इसे छोटा मणिमहेश के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2007-08 में इसके सुंदरीकरण को लेकर उस समय हाथ आगे बढ़े थे। सबसे पहले लोक निर्माण विभाग को डल झील में पानी की लीकेज रोकने का काम सौंपा गया था, लेकिन विभाग इस कार्य में सफल नहीं हुआ।

यह बोली एसडीएम शिल्पी बैक्टा

एसडीएम शिल्पी बैक्टा ने कहा कि इस बारे में जिलाधीश व अन्य अधिकारियों की बैठक आज होगी उस बैठक में ही आगामी रणनीति क्या होगी। कहां से तकनीकी सहयोग व विशेषज्ञों का सहयोग लिया जाएगा। स्थानीय लोगों ने मिलकर मछलियों को सुरक्षित किया है। बैठक के बाद ही ज्यादा जानकारी दे सकेंगे।

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