मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बोले, पुलिस कर्मियों की मदद के लिए रास्ता निकालेगी सरकार

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि सरकार पुलिस कर्मचारियों की मदद के लिए कोई न कोई रास्ता जरूर निकालेगी। उन्होंने कहा कि अभी तक असमंजस यही था कि पुलिस कर्मी अनुबंध के आठ साल के बाद नियमित होकर पूरा वेतनमान पाते होंगे।

Virender KumarPublish:Sun, 28 Nov 2021 10:20 PM (IST) Updated:Sun, 28 Nov 2021 10:20 PM (IST)
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बोले, पुलिस कर्मियों की मदद के लिए रास्ता निकालेगी सरकार
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बोले, पुलिस कर्मियों की मदद के लिए रास्ता निकालेगी सरकार

शिमला, राज्य ब्यूरो। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि सरकार पुलिस कर्मचारियों की मदद के लिए कोई न कोई रास्ता जरूर निकालेगी। उन्होंने कहा कि अभी तक असमंजस यही था कि पुलिस कर्मी अनुबंध के आठ साल के बाद नियमित होकर पूरा वेतनमान पाते होंगे। ऐसा ही प्रतिनिधित्व इनकी मांगों का होता आया। हम इसे विभाग को भेजते रहे, लेकिन पुलिस कर्मियों की नियुक्ति तो अनुबंध पर होती ही नहीं है। 2015 में सेवा शर्ते बदली, इसके लिए हमारी सरकार दोषी नहीं है।

शनिवार को शिमला स्थित अपने सरकारी आवास ओकओवर में बड़ी संख्या में आए पुलिस कर्मियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आप 2013 से पहले की व्यवस्था बहाल देखना चाहते हैं। सरकार को इसके वित्तीय प्रभावों को भी देखना होगा। आपकी ही तर्ज पर अन्य भी लाभ मांगेंगे। पहले क्लर्क भर्ती होते थे, अब जूनियर आफिस असिस्टेंट होते है। काम दोनों का एक जैसा है, पर वेतनमान में फर्क है। सरकार पूरे मामले का अध्ययन करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस कर्मियों को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली।

अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रहे मौजूद

ओकओवर में अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अश्वनी ठाकुर भी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने भी पुलिस कर्मियों के हितों की पैरवी की। अब सोमवार को चुङ्क्षनदा पुलिस कर्मियों की अतिरिक्त वित्त सचिव के साथ बैठक होगी। इसमें पूरे मामले पर चर्चा की जाएगी।

खेल नीति के लिए दें पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन

किसी भी सरकारी विभाग के नीति प्रारूप को स्वीकृति देने से पहले वित्त विभाग उस को हर स्तर पर जांचता है और उसके बाद ही स्वीकृति प्रदान करता है। प्रदेश की खेल नीति पिछले छह माह से इधर से उधर घूम रही है। अब नई खेल नीति वित्त विभाग के पास पहुंची है और इसे लेकर वित्त विभाग ने युवा सेवाएं एवं खेल विभाग ने खेल नीति को देखना चाहा है। इसमें किस स्तर के खिलाडिय़ों के लिए क्या-क्या रखा गया है। इस संबंध में संबंधित विभाग को पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन देनी होगी। इस नए पेंच के कारण खेल नीति खिलाडिय़ों तक पहुंचने में कुछ समय लगेगा। राज्य के युवाओं के साथ-साथ खेल संघ खेल नीति बनने का इंतजार कर रहे हैं।

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश के खिलाडियों के बेहतर प्रदर्शन और पुरस्कार से जुड़ी खेल नीति नई समस्या में फंस गई है। खेल विभाग करीब एक वर्ष से अधिक समय से खेल नीति को तैयार कर रहा था और इसमें कई तरह के संशोधन भी किए गए। सचिव खेल एसएस गुलेरिया ने माना कि खेल नीति को लागू करने से पहले वित्त विभाग पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन देखना चाहता है।