हिमाचल के जगास गांव में चेक डैम ने बदल दी किसानों की तकदीर, नकदी फसलें उगा कर रहे लाखों की कमाई

Jagas Village Farmers जगास गांव के किसान जो पहले सिंचाई सुविधा न होने के कारण मुख्यत खाद्यान्न फसलों जैसे गेहूं मक्की जौ आदि का ही उत्पादन करते थे। लेकिन अब सिंचाई सुविधा मिलने से नकदी फसलें टमाटर शिमला मिर्च फ्रासबीन मटर आदि पैदा करके लाखों रुपये कमा रहे हैं।

Rajesh Kumar SharmaThu, 16 Sep 2021 12:42 PM (IST)
हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर का जगास गांव में बनाया गया चेकडैम व किया सब्‍जी उत्‍पादन।

नाहन, राजन पुंडीर। Jagas Village Farmers, हिमाचल प्रदेश सरकार ने किसानों की आय को दोगुना करने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। किसान भी इन योजनाओं का भरपूर लाभ उठा रहे हैं और इससे किसानो को आर्थिक लाभ भी हो रहा है। इसी कड़ी में जिला सिरमौर के राजगढ़ उपमंडल के सेर जगास गांव में किसानों के लिए विभाग की ओर से चेक डैम का निर्माण करवाया गया। भू-संरक्षण विभाग राजगढ़ की ओर से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत निर्मित जल संग्रहण चेक डैम कृषक समूह जगास के लिए संजीवनी बूटी साबित हो रहा है। विकास खंड राजगढ़ की ग्राम पंचायत सैर जगास के जगास गांव के किसान जो पहले सिंचाई सुविधा न होने के कारण  मुख्यत: खाद्यान्न फसलों जैसे गेहूं, मक्की जौ आदि का ही उत्पादन करते थे। लेकिन गांव के किसान अब सिंचाई सुविधा मिलने से नकदी फसलें टमाटर, शिमला मिर्च, फ्रासबीन, मटर आदि पैदा करके लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं।

भू-संरक्षण विभाग के राजगढ़ कार्यलय की ओर से इस गांव के किसानों के आग्रह पर वर्ष 2017-18 में मौके पर जाकर गांव के निकट पड़ेन्द नाले में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सामुदायिक जल भंडारण  (चेक डैम) का निर्माण किया गया। इस चेक डैम में नाले का पानी एकत्र किया गया व इस पानी को खेतों के पास पाइपों से ले जाकर टैंक निर्माण कर भंडारण करने की योजना बनाई। इसका निर्माण  किसान विकास संघ जगास के माध्यम से किया गया।

उपमंडलीय भू संरक्षण अधिकारी चंद्रशेखर शर्मा ने बताया चार लाख 28 हजार 900 रुपये की लागत से बनी यह योजना वर्ष 2019 में संचालित हो गई। नाले में चेक डैम की कुल वर्षा जल भंडारण क्षमता 96 हजार लीटर है। जिससे अब कुल सात हेक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है।

किसान संघ के प्रधान गीता राम व सदस्‍य रविंद्र सिंह ठाकुर, प्रदीप कुमार, जिया लाल, शेर सिंह व चतर सिंह ने बताया पहले किसान परंपरागत फसलें जैसे गेहूं, मक्की (खाद्यान्न फसलें) तथा बरसाती मौसम में टमाटर, शिमला मिर्च व मटर (सब्जियां) इत्यादि का उत्पादन औसतन तीन चार  बीघा में करता था। लेकिन अब प्रत्येक किसान औसतन सात आठ बीघा में बैमोसमी सब्जी टमाटर, शिमला मिर्च, फ्रासबीन, फुलगोभी, बंदगोभी व लहसुन का उत्पादन करके अच्छी आय प्राप्त कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि अब प्रति किसान की औसतन वार्षिक आय करीब ढाई लाख रुपये तक बढ़ गई है, जो पहले कठिनाई से एक लाख रुपये भी नहीं हो पाती थी। अब किसान तीन से साढ़े तीन लाख की कमाई कर ले रहे हैं, जिससे इनकी आर्थिकी मजबूत हुई है।

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