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कोटखाई में छात्रा की दुष्‍कर्म के बाद हत्‍या मामले में सीबीआइ का दोबारा जांच से इंकार, सामूहिक दुष्कर्म नहीं हुआ

बहुचर्चित कोटखाई दुष्कर्म व हत्या मामले में सीबीआइ ने दोबारा जांच करने से इंकार किया है।

Kotkhai Physically Assault and Murder Case बहुचर्चित कोटखाई दुष्कर्म व हत्या मामले में सीबीआइ ने दोबारा जांच करने से इंकार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म नहीं हुआ था। दुष्कर्म के बाद हत्या करने वाला चिरानी अनिल कुमार उर्फ नीलू उर्फ कमलेश ही था।

Rajesh Kumar SharmaMon, 05 Apr 2021 07:33 AM (IST)

शिमला, रमेश सिंगटा। Kotkhai Physically Assault and Murder Case, बहुचर्चित कोटखाई दुष्कर्म व हत्या मामले में सीबीआइ ने दोबारा जांच करने से इंकार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म नहीं हुआ था। दुष्कर्म के बाद हत्या करने वाला चिरानी अनिल कुमार उर्फ नीलू उर्फ कमलेश ही था। जांच के दौरान एक से अधिक व्यक्ति की संलिप्तता के कोई भी साक्ष्य नहीं मिले हैं। सीबीआइ की स्पेशल क्राइम यूनिट वन, दिल्ली की ओर से विशेष अभियोजक के माध्यम से हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में दाखिल किए जवाब में दावा किया है कि जांच में सभी पहलुओं, एंगल को शामिल किया गया। इसमें पीडि़त परिवार की ओर से दायर याचिका को बेबुनियाद करार दिया है।

दो चार्जशीट हुई दाखिल

जवाब में कहा कि इस केस की हाईकोर्ट ने ही निगरानी की थी। समय-समय पर स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की गई। इसमें आरोपित नीलू के खिलाफ 29 मई 2018 को पहली चार्जशीट शिमला की निचली कोर्ट में दाखिल की गई थी। 15 जून 2018 को स्पेशल जज की कोर्ट ने आरोपित के खिलाफ चार्ज फ्रेम किए।इसके बाद 26 जुलाई 2018 को इसी आरोपित के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट कोर्ट में पेश की। इसी पर 10 अगस्त 2018 को अतिरिक्त चार्जेज फ्रेम किए। अभी केस का ट्रायल अंतिम चरण में है।

सीबीआइ को जारी हुआ नोटिस

याचिकाकर्ता की मानें तो पीडि़त परिवार को अभी तक न्याय नहीं मिला है। उन्होंने सीबीआइ जांच पर भी सवाल उठाए हैं। पहले मृतका की मां की ओर से सुप्रीमकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुप्रीमकोर्ट के निर्देश के बाद बीते अक्टूबर महीने में शिमला स्थित प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसी के आधार पर सीबीआइ को नोटिस जारी हुआ था। उधर, मां का मानना है कि अकेला व्यक्ति बेटी के साथ दरिंदगी नहीं कर सकता था। कोर्ट तक केस को मदद सेवा ट्रस्ट के माध्यम से पहुंचाया। इस ट्रस्ट ने शिमला में आंदोलन भी किया था।

अकेला व्‍यक्ति दुष्‍कर्म व हत्‍या नहीं कर सकता

मदद सेवा ट्रस्ट के सचिव विकास थापटा का कहना है सुप्रीमकोर्ट में मृतका की मां की ओर से याचिका दाखिल की गई थी। बाद में यही याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई। इसमें कई ग्राउंड लिए गए हैं। अकेेला व्यक्ति दुष्कर्म, हत्या नहीं कर सकता था।

क्या है मामला

कोटखाई के गांव हलाईला क्षेत्र में 15 साल की स्कूली छात्रा के साथ 4 जुलाई को 2017 को दुष्कर्म हुआ और फिर हत्या कर दी गई। पहले जांच पुलिस ने की। पुलिस ने जिन आरोपितों को गिरफ्तार किया, उनमें से सूरज की कोर्टखाई थाने की हवालात में मौत हो गई थी। इससे जनता सड़क पर उतर आई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने दोनों मामलों की सीबीआइ जांच के आदेश दिए थे। जांच में पुलिस की थ्योरी गलत साबित हुई। सीबीआइ ने सभी आरोपितों को क्लीन चिट दी, जबकि बाद में छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या मामले में चिरानी अनिल कुमार उर्फ नीलू को गिरफ्तार किया।

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