जसूर में टैक्स की दर 12 फीसद किए जाने के प्रस्ताव पर कारोबारियों में रोष

रेडीमेट कपड़े स्टेशनरी फुटवीयर सहित अनेक चीजों पर एक जनवरी से टैक्स की दर 12 फीसद कर दिए जाने के प्रस्ताव पर कारोबारी वर्ग की चिंता बढ़ गई है। पहले यह कर महज 5 फीसदी था जिसे कारोबारी वर्ग सहज रूप में भर रहे थे।

Richa RanaThu, 02 Dec 2021 12:17 PM (IST)
टैक्स की दर 12 फीसद कर दिए जाने के प्रस्ताव पर कारोबारी वर्ग की चिंता बढ़ गई है।

जसूर, संवाद सहयोगी। रेडीमेट कपड़े, स्टेशनरी , फुटवीयर सहित अनेक चीजों पर एक जनवरी से टैक्स की दर 12 फीसद कर दिए जाने के प्रस्ताव पर कारोबारी वर्ग की चिंता बढ़ गई है। पहले यह कर महज 5 फीसदी था जिसे कारोबारी वर्ग सहज रूप में भर रहे थे। लेकिन अब इस कर को ढाई गुणा बढ़ा दिए जाने के कारण महंगाई और बढ़ जाएगी और उसकी मार उपभोक्ता वर्ग पर ही पड़ेगी जोकि वर्तमान परिस्थिति में कतई तर्कसंगत नहीं है।

कारोबारी वर्ग अनुसार कोरोना महामारी के कारण पहले ही व्यापारियों का कारोबार डांवाडोल हालत में है ऊपर से कर में बढ़ोतरी एक बड़े आघात में देखी जा रही है तो दूसरी ओर लंबे लाकडाउन की मार झेल चुके उपभोक्ता के हित में भी सरकार द्वारा की गई यह बढ़ोतरी किसी भी तरह से न्यायोचित कदम नहीं है। प्रमुख व्यापारिक कस्बा जसूर सहित क्षेत्र के अन्य व्यापारी वर्ग ने इस बढ़े हुए कर का कड़ा विरोध किया है और तर्क दिया है कि इस बढ़े टैक्स का बोझ आखिरकार जनता पर ही पड़ेगा जिसे खारिज कर पहले वाली स्थिति से काम चलाना दोनों वर्गों के हितों में होगा।जिसपर सरकार को गंभीर चिंतन करना चाहिए।

यह बोले व्यापार मंडल के कार्यकारी अध्यक्ष

व्यापार मंडल जसूर के कार्यकारी अध्यक्ष राजू महाजन ने कहा किएक तरफ सरकार द्वारा खाद्यान पदार्थों पर पांच फीसदी मार्किट फीस लगाकर पड़ोसी राज्यों के मुकाबले प्रदेश में खाद्य पदार्थ महंगे कर जनता पर अतिरिक्त भार डाला गया है तो दूसरी ओर केंद्र सरकार ने भी अनेक चीजों के टैक्स स्लैब 5 से 12 फीसदी बढ़ाकर प्रतिकूल माहौल बनाया है। इसलिए प्रदेश व केंद्र सरकार को इस टैक्स बढ़ोतरी के फैसले को वापस लेकर महंगाई को बढ़ाने की लगने वाली तोहमत से बचना चाहिए ।

यह बोले प्रदेश व्यापार संघ के अध्यक्ष

प्रदेश व्यापार संघ के अध्यक्ष सुमेश शर्मा ने कहा कि कोरोना महामारी और विगत में लगे लंबे लाकडाउन के चलते कारोबारी व उपभोक्ता दोनों की हालत बद से बदतर बनी हुई है । ऐसे में अब अधिकांश चीजों पर टैक्स स्लैब 5 से 12 फीसदी करना एक बेहद खेदजनक कदम है। जिसे खारिज कर देना कारोबारी व उपभोक्ता वर्ग के हित में है ।

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