कुशाल भारद्वाज ने डिपुओं में बायोमेट्रिक्स मशीन से राशन वितरण बंद करने की उठाई मांग

कुश्‍ााल भारद्वाज ने एबायोमीट्रिक प्रणाली से राशन देने की व्यवस्था को स्थगित करने की मांग की है।

कुशाल भारद्वाज ने चिंता जताई है कि बायोमीट्रिक प्रणाली को इस दौर में भी जारी रखने से हर घर तक संक्रमण के फैलने का खतरा और भी बढ़ गया है। इसलिए जब तक कोरोना संक्रमण का खतरा बरकरार है तब तक बायोमीट्रिक प्रणाली को रोक दिया जाए।

Richa RanaFri, 07 May 2021 12:44 PM (IST)

राजेश शर्मा, जोगेंद्रनगर। हिमाचल किसान सभा ने कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के दौर में भी प्रदेश भर के राशन डिपुओं में बायोमीट्रिक प्रणाली से राशन देने की व्यवस्था को स्थगित करने की मांग की है। हिमाचल किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष व जिला परिषद के सदस्य कुशाल भारद्वाज ने इस पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि बायोमीट्रिक प्रणाली को इस दौर में भी जारी रखने से हर घर तक संक्रमण के फैलने का खतरा और भी बढ़ गया है। इसलिए जब तक कोरोना संक्रमण का खतरा बरकरार है तब तक बायोमीट्रिक प्रणाली को रोक दिया जाए।

उन्होंने कहा कि ऐसे दौर में जब विश्व स्वास्थ्य संगठन से लेकर केंद्र व राज्यों की सरकारें व समस्त प्रशासन संक्रमण से बचने के उपाय सूझा रहे हैं, उस दौर में इस प्रणाली के जारी रहने से उपभोक्ताओं के साथ-साथ डिपो होल्डर व अन्य कर्मचारी अपने व अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर खौफ में हैं। कई लोग तो राशन लेने के लिए जाने से भी कतराने लगे हैं। क्योंकि डिपुओं में राशन लेने के लिए सभी उपभोक्ताओं को मशीन में अंगूठा लगाना पड़ता है। यदि अंगूठे से बात नहीं बनती है तो दोनों हाथ की सभी उंगलियों को बार-बार लगवाना पड़ता है, जिससे हर किसी के संक्रमित होने का खतरा बना रहता है।

कुशाल भारद्वाज ने कहा कि डिपुओं में बायोमेट्रिक प्रणाली को बिना नेटवर्क, बिना सेनेटाइजर व बिना किसी सेफ़्टी किट के सरकार और खाद्यपूर्ति विभाग के अधिकारियों के द्वारा डिपोसंचालकों पर अनावश्यक दबाव बना कर लागू करवाया जा रहा है। जो सिम डिपो संचालकों को उपलब्ध कारवाई हैं वे चलती ही नहीं हैं तथा उनको अपने खर्च से इंटरनेट डाटा इस्तेमाल करना पड़ता है। इस के अलावा सेनिटाइज़र, मास्क, गलब्स  व अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध नहीं करवाए जाते हैं। अगर डिपो होल्डर स्वयं ये खर्चा वहन करेंगे तो फिर वे अपने परिवार को कैसे पालेंगे। 

उन्होंने सवाल किया कि मात्र 2 हजार रूपये महीना कमाने वाला अपने परिवार को खाना खिलायेगा या सेनेटाइजर छिड़कवाएगा। यह तो सरकार और खाद्यपूर्ति विभाग के लिए शर्म की बात है। इस बात की क्या गारंटी है कि कोई डिपोसंचालक व आम उपभोक्ता बायोमीट्रिक प्रणाली की वजह से संक्रमित नहीं हो रहे होंगे। उन्होंने कहा कि संक्रमण के खतरे को देखते हुए इस समय आधार केंद्र बन्द कर दिये हैं, सरकारी व निजी दफ्तर बाद कर दिये गए हैं। इससे पहले सरकारी कार्यालयों में बायोमीट्रिक उपस्थिती लगवाना बन्द कर दी गई थी तो क्या सरकार ये मानती है कि डिपुओं में बायोमीट्रिक सिस्टम से राशन वितरण करने से कोरोना नही फैलता है।

उन्होंने कहा कि जब डिपो में राशन लेने आए उपभोक्ताओं का मशीन से राशन कार्ड स्कैन किया जाता है, राशन की सारी डिटेल ऑनलाइन दर्ज की जाती है तो फिर बायोमीट्रिक प्रणाली का कोरोना संक्रमण के दौर में क्या औचित्य है। इस लिए सरकार को चाहिए कि आम उपभोक्ताओं, डिपोधारकों व कर्मचारियों तथा उनके परिजनों की सुरक्षा को ध्य्यान में रखते हुए तुरंत बायोमीट्रिक प्रणाली को रोकने के आदेश जारी करे।

यदि इसमें केंद्र सरकार की तरफ से कोई अड़चन है तो भी प्रदेश सरकार केंद्र सरकार से बात करके इस बाधा को दूर करे। क्योंकि इस समय जनता को कोविड के खतरे से दूर रखने से बड़ा कोई काम नहीं है। कुशाल भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश सरकार, खाद्य आपूर्ति निगम और सभी जिलों के उपायुक्त इस बारे में तुरंत संज्ञान लें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्दी ही इस बायोमीट्रिक प्रणाली को बंद या स्थगित नहीं किया गया तो किसान सभा उपभोक्ताओं के साथ मिल कर हर राशन डिपो के बाहर प्रदर्शन करेगी।

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