हिमाचली बाक्सर आशीष से बोले पीएम, सचिन की राह पर चल आपने दिखाई खिलाडिय़ों को नई दिशा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा ओलंपिक खेल में अपनी प्रतिभा का जादू दिखाने को बेताब मंडी जिले के छातर गांव के मुक्केबाज आशीष चौधरी ने महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की राह पर चलकर देश के खिलाडिय़ों को नई दिशा दिखाई है। इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं।

Vijay BhushanTue, 13 Jul 2021 07:15 PM (IST)
मुक्केबाज आशीष चौधरी के साथ बातचीत करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। जागरण

मंडी, जागरण संवाददाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा ओलंपिक खेल में अपनी प्रतिभा का जादू दिखाने को बेताब मंडी जिले के छातर गांव के मुक्केबाज आशीष चौधरी ने महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की राह पर चलकर देश के खिलाडिय़ों को नई दिशा दिखाई है। इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं। सचिन तेंदुलकर के पिता का 1999 विश्वकप के दौरान निधन हो गया था। टीम इंडिया अपना पहला मैच दक्षिण अफ्रीका से हार चुकी थी। दूसरा मैच जिम्बाब्वे से था। पिता के अंतिम संस्कार के बाद सचिन स्वदेश लौट गए थे। जिम्बाब्वे के साथ मैच में भारत को शिकस्त मिली थी। विश्व कप से बाहर होने का खतरा मंडरा गया था। सचिन के बिना टीम इंडिया के लिए विश्वकप में राह और कठिन थी। यहीं से सचिन ने महानता की इबारत लिखी थी। पिता का अंतिम संस्कार कर वह केन्या के खिलाफ मैच खेलने पहुंच गए थे। 101 गेंदों में धमाकेदार 140 रन बनाए थे और भारत को 94 रन से जीत दिलाई थी। शतक पूरा करने पर सचिन ने आसमान की ओर बल्ला दिखाया था और अपने पिता को याद किया था।

बकौल नरेंद्र मोदी, सचिन तेंदलुकर महत्वपूर्ण खेल खेल रहे थे। उन्होंने खेल को प्राथमिकता दी ओर उसी के माध्यम से पिता को श्रद्धांजलि दी थी। आशीष चौधरी ने भी वही किया है। पिता को खोने के बावजूद देश व खेल के लिए पूरा मन वचन दिया है। खिलाड़ी के तौर पर हर बार विजेता साबित हुए हैं। शारीरिक व भावनात्मक रूप से विजय पाई है। देश को उम्मीद है ओलंपिक के प्लेटफार्म पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे।

मुक्केबाजी खेल क्यों चुना?

प्रधानमंत्री ने आशीष चौधरी से पूछा उन्होंने मुक्केबाजी खेल ही क्यों चुना। आशीष चौधरी ने बताया वह स्कूल के समय बहुत दुबले पतले थे। पिता कबड्डी के अच्छे खिलाड़ी थे। वह चाहते थे कि मैं मुक्केबाज बनूं। भाई मुक्केबाजी करता था। कुश्ती करने लायक सेहत नहीं थी, इसलिए मुक्केबाजी की तरफ रुझान हो गया।

आपने कोविड से भी लड़ाई लड़ी, एक खिलाड़ी के तौर पर कितना कठिन रहा?

प्रधानमंत्री ने आशीष चौधरी से पूछा कि आपने कोविड से भी लड़ाई लड़ी और इसी बीच अपने पिता को भी खो दिया। एक खिलाड़ी के तौर पर इस सदमे से कैसे उभरे और एक खिलाड़ी के तौर पर कितना कठिन रहा। आशीष चौधरी ने बताया जार्डन में ओलंपिक क्वालीफाई मैच से ठीक 25 दिन पहले पिता की मौत हो गई थी। मैं सदमे में था। मानसिक तौर पर टूट चुका गया था। स्वजन ने सहारा दिया। दोस्तों ने हौसला बंधाया कि उन्हें अपने पिता का अधूरा सपना पूरा करना है। सारा काम छोडकर कैंप ज्वाइन करने के लिए प्रेरित किया। क्वालीफाई करने में सफल रहा। स्पेन में प्रशिक्षण के दौरान कोविड पाजिटिव हो गया था। कुछ दिन मानसिक तनाव में रहा। परिवार के लोगों व डाक्टरों ने राह दिखाई। प्रैक्टिस के लिए वहां पर अगल से स्पेस दिया गया था। खुद की फिटनेस पर ध्यान केंद्रित किया। रिकवरी के बाद वापस स्वदेश आया तो कोच धर्मेंद्र ङ्क्षसह यादव ने रिकवरी में काफी मदद की।

मां की आंखों से छलके आंसू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब आशीष चौधरी से उनके पिता के निधन को लेकर बात की तो बीडीओ कार्यालय में उपस्थित उनकी मां दुर्गा देवी की आंखें छलक गई। आशीष चौधरी कार्यक्रम में इटली से वर्चुअली जुड़े हुए थे।

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