सेब बागवानों से ठगीः कारोबार 5500 करोड़, डकारी राशि 300 करोड़ के पार

हिमाचल में सेब का सालाना कारोबार 5500 करोड़ रुपये का है लेकिन बागवानों से डकारी राशि ही 300 करोड़ के पार पहुंच गई है। आढ़ती तो मालामाल हो गए लेकिन उत्पादक के चेहरों की लाली गायब है। बागवानों के पैसों की मलाई आढ़ती और लदानी (कारोबारी) डकार रहे हैं।

Vijay BhushanWed, 20 Oct 2021 11:55 PM (IST)
सेब बागवानों से ठगी का आंकड़ा तीन सौ करोड़ से अधिक हुआ।

रमेश सिंगटा, शिमला। हिमाचल में सेब का सालाना कारोबार 5500 करोड़ रुपये का है, लेकिन बागवानों से डकारी राशि ही 300 करोड़ के पार पहुंच गई है। आढ़ती तो मालामाल हो गए, लेकिन उत्पादक के चेहरों की लाली गायब है। बागवानों के पैसों की मलाई आढ़ती और लदानी (कारोबारी) डकार रहे हैं।

लूट का तंत्र इतना बड़ा है कि ढाई साल से सीआइडी भी इन मामलों को समेट नहीं पाई है। जब तक एक शिकायत का निपटारा होता है, दूसरी आ जाती है। अब 100 नई शिकायतें आई हैं, इससे डकारी राशि बढ़ गई। बागवानों के संगठनों की मानें तो बागवानों से डकारी राशि करीब 300 करोड़ के पार हो गई है। सीआइडी की जांच मेंं भी सवा सौ करोड़ की धोखाधड़ी होना पाया गया है। लेकिन, इसमें पिछले वर्षों में हुई घटनाओं को जोड़ दिया जाए तो यह करोड़ों का गड़बड़झाला साबित होगा। सीआइडी ने गहन जांच-पड़ताल के बाद मौखिक और लिखित शिकायतों के आधार पर करीब 41 करोड़ की रिकवरी करवाई है। इसमें कुछ रिकवरी कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) के माध्यम से हुई है। लिखित शिकायत के आधार पर ही करीब 26 करोड़ की रिकवरी हुई है। इसमें चार से पांच करोड़ की रिकवरी एपीएमसी की है। बाकी सभी सीआइडी की है। जांच एजेंसी 32 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। जबकि कुल 114 एफआइआर दर्ज हैं।

कुल 1700 शिकायतें आई

अब तक सीआइडी के पास कुल 1700 शिकायतें आ गई हैं। इनमें से करीब 500 शिकायतें लंबित हैं।

एपीएमसी सही भूमिका निभाने में रही नाकाम

एपीएमसी सही भूमिका निभाने में नाकाम रही है। एपीएमसी एक्ट 2005 का सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा। इस एक्ट के अनुसार जिस दिन मंडी में सेब बिकता है, उसी दिन बागवान को इसकी अदायगी करनी होती है। एक्ट के अनुसार अगर ऐसा नहीं हुआ तो एपीएमसी उत्पाद को जब्त कर इसकी नीलामी कर इससे मिले पैसों का भुगतान बागवान को करे। खरीदारों से बैंक गारंटी लें, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। कायदे से अगर कहीं बागवानों से धोखाधड़ी हुई तो इसकी पुलिस में शिकायत भी एपीएमसी को करनी चाहिए। लेकिन सारी शिकायतें और एफआइआर प्रभावित बागवानों ने खुद दर्ज करवाई हैं। चंद शिकायतें ही एपीएमसी ने की है।

ऐसे होती है धोखाधड़ी

सेब सीजन के दौरान आढ़ती बागवानों से सेब खरीद लेते हैं, पर इसके पैसे चुकता नहीं करते। थोड़ा भुगतान कर पांच से 15 दिन के अंदर पैसे देने का वादा करते हैं। बागवानों को तब तक भरोसे में लिया जाता है, जब तक कारोबार चलता है। सीजन समाप्त होने के बाद उन्हें धमकाने लगते हैं। एक साल तक अन्य राज्यों में दूसरा कारोबार करते हैं जैसे संतरे, आम और केलेे का। बागवान के पास विकल्प न होने से आढ़ती पर भरोसा करना पड़ता है। इनमें से स्थानीय आढ़तियों की मिलीभगत भी रहती है।

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तीन साल में बागवानों को पांच करोड़ से अधिक की रिकवरी करवाई है। मौखिक शिकायत पर भी कार्रवाई की गई हैं। बागवानों को चाहिए कि वे चालू सीजन में शिकायत करें। बाद में शिकायतें आती हैं, तब कार्रवाई करनी संभव नहीं रहती। आढ़ती भागे तो हमारी जिम्मेदारी है। लेकिन अगर लदानी भागे तो उसके लिए आढ़ती जिम्मेदार है। हमारी ही पहल पर एसआइटी गठित की गई।

-नरेश शर्मा, अध्यक्ष, एपीएमसी शिमला।

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मौखिक व शिकायतों के आधार पर रिकवरी की गई। लिखित शिकायतों पर ही 21 करोड़ से अधिक की रिकवरी करने में सफलता मिली है। आरोपितों में हिमाचल समेत कई राज्यों के आढ़ती व लदानी शामिल हैं।

-वीरेंद्र कालिया, एसपी, सीआइडी एवं एसआइटी प्रमुख।

आर्थिक अपराध ङ्क्षवग तो बना पर तंत्र नहीं हुआ विकसित

आर्थिक अपराधों की जांच के लिए प्रदेश में अलग से ङ्क्षवग तो बना है पर तंत्र विकसित नहीं हो पाया। इस ङ्क्षवग में एसपी की तैनाती भी कर रखी है, लेकिन उनके पास स्टाफ और सुविधाएं नहीं हैैं। सेब बागवानों के मामलों को इस ङ्क्षवग के पास सौंपा जा सकता था।

दैनिक जागरण ने उठाया था मामला

बागवानों से करोड़ों रुपयों की लूट होने का मामला सबसे पहले दैनिक जागरण ने उठाया था। इसके बाद तत्कालीन डीजीपी एसआर मरडी ने सीआइडी की विशेष जांच टीम गठित की थी। इस टीम की अगुवाई पुलिस अधीक्षक सीआइडी (क्राइम) वीरेंद्र कालिया कर रहे हैं।

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