हैवान बनी मां : एक साल प्रेमी के साथ रहने के बाद खड्ड किनारे छोड़ी बच्चियों का दो दिन नहीं देखा मुंह

कहते हैं बच्चों को दर्द हो तो सबसे पहले आह मां के मुंह से निकलती है लेकिन ङ्क्षजदगी बनाने के लिए हैवान बनी मां की ममता भी उसी के लालच में मर गई। शुक्रवार रात को दो बच्चियों को खड्ड किनारे छोडऩे के बाद उनका चेहरा देखना जरूरी नहीं समझा

Virender KumarSun, 19 Sep 2021 10:30 PM (IST)
सुहड़ा मोहल्ला में सकोडी पुल के नीचे मिले बेटियों के शव को निकालते पुलिस कर्मी व स्थानीय युवा। जागरण

मंडी, मुकेश मेहरा। कहते हैं बच्चों को दर्द हो तो सबसे पहले आह मां के मुंह से निकलती है, लेकिन अपनी ङ्क्षजदगी बनाने के लिए हैवान बनी मां की ममता भी उसी के लालच में मर गई। शुक्रवार रात को दो दुधमुंही बच्चियों को खड्ड किनारे छोडऩे के बाद दो दिन तक उनका चेहरा तक देखना जरूरी नहीं समझा और ससुराल में डटी रही।

रविवार को पुल के नीचे बच्चियों के शव मिलने के बाद हर किसी के मुंह से बच्चियों के लिए दुआ और मां के लिए बददुआ निकल रही थी। हैरत तो इस बात की है कि इस मां की पहले भी दो बेटियां हैं जो इसके पति के पास थीं। इनमें से एक पांच व दूसरी एक वर्ष की है। जिला कांगड़ा के धर्मशाला से संबंधित उक्त आरोपित महिला जालंधर के युवक के प्रेम में कुछ इस तरह से पागल हुई कि लिखित तौर पर देकर गई कि वह लौटकर नहीं आएगी।

एक साल तक वहां रहने और दो बच्चियों को जन्म देने के बाद जालंधर में उसकी पिटाई आदि होने के बाद परिवार की याद सताई तो वहां से भागकर मंडी पहुंच गई। शुक्रवार रात को यह सुहड़ा मोहल्ला स्थित अपने घर पहुंची और गलती मानकर रहने की जिद करने लगी।

ससुराल आने से पहले बेटियों को मरने के लिए खड्ड किनारे छोड़ आई थी। ससुराल पक्ष को इस बात का ज्ञान नहीं था कि यह दो बेटियों की मां बनी है। वह इसे रखना नहीं चाहते थे, तो उन्होंने पुलिस को बताना सही समझा। इस बीच इसने परिवार को धमकाने की भी कोशिश की तो पति एसपी के पास पहुंच गया। रविवार को जब बच्चियों के शव मिले तो एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री ने सबसे पहले इस पहलू को खंगाला कि बाहर से कौन आया और उक्त महिला को तलब किया गया। पूछताछ में सारा पर्दाफाश हो गया। हालांकि यह सवाल उठ रहा है कि महिला मंडी तक अकेली कैसी आई क्योंकि जिस वक्त यह घर पहुंची उसके पास दो बड़े बैग भी थे। ऐसे में दो बच्चों के साथ जालंधर से अकेले नहीं आ सकती। इसके साथ कोई ओर भी था।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

शुक्रवार रात को भीड़भाड़ वाले इस क्षेत्र में जिस समय बच्चियों को छोड़ा गया, वहां गश्त पर भी सवाल उठे हैं। यहां पर सीसीटीवी मुख्य चौक पर भी है। पुलिस के जवान भी यहां दिन में घूमते हैं और रात को भी गश्त रहती है। बावजूद इसके चुपचाप इनको छोड़ गई और किसी को कानोंकान भनक नहीं लगी।

अस्पताल में छोड़ सकती थी बच्चियां

जिस स्थान पर बच्चियों को मरने के लिए छोड़ा गया, उसके साथ क्षेत्रीय अस्पताल में पालना शिशु स्वास्थ्य केंद्र है जहां पर बच्चों को छोडऩे के लिए पालना लगाया था। यहां पर बच्चों को छोडऩे वालों की जानकारी भी गुप्त रखी जाती है, लेकिन महिला ने बच्चों को यहां न छोड़कर खड्ड किनारे मरने के लिए छोड़ दिया।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.