पालीग्राफ टेस्ट करवाने के मामले में कोर्ट में पेश होंगे पूर्व मुख्‍य सचिव पी मित्रा, जानिए पूरा मामला

सीडी प्रकरण में पूर्व मुख्‍य सचिव पी मित्रा का पालीग्राफ टेस्‍ट हो सकता है।
Publish Date:Mon, 28 Sep 2020 09:07 AM (IST) Author: Rajesh Sharma

शिमला, जेएनएन। सीडी प्रकरण से जुड़े मामले में विजिलेंस ने अपनी पूर्व की थ्योरी बदल दी है। पहले जांच एजेंसी ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। करीब ढाई वर्ष की जांच के बाद अब पूर्व मुख्य सचिव एवं मौजूदा राज्य निर्वाचन आयुक्त पी मित्रा के खिलाफ चार्जशीट दायर होगी। सीडी मामले की गूंज प्रदेश की सियासत तक हो चुकी है। अब सोमवार को मित्रा की इसी संबंध में शिमला की एक कोर्ट में पेशी होगी। विजिलेंस ने उनका पालीग्राफ टेस्ट करवाना चाहा है। पिछली पेशी में वह उपस्थित नहीं हो पाए थे।

जांच के दौरान उनके खिलाफ नए तथ्य सामने आए थे। इनको फोरेंसिक साइंस के आधार पर जांचा जाएगा। हालांकि मित्रा इस टेस्ट को करवाने से इंकार कर रहे हैं। इसी कारण मामला कोर्ट तक पहुंचा। आरोपित अभी अहम ओहदे पर तैनात हैं। सरकार ने इन्हें इस पद से हटाने की दिशा में अभी पहल नहीं की है। पूर्व आइपीएस डॉ. जगतराम ने सरकार को पत्र लिखा था और मित्रा को पद से हटाने की मांग की थी। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार के मामले में सरकार को सख्त कार्रवाई करने की पहल करनी चाहिए।

क्या है मामला

पूर्व मुख्य सचिव पी मित्रा धारा 118 के उल्लंघन के आरोप में फंसे हैं। आरोप है कि उन्होंने अन्य राज्य के लोगों को हिमाचल में जमीन खरीदने के बदले कथित तौर पर रिश्वत ली। 21 मार्च, 2011 को आरोपित विनोद मित्तल राजस्व विभाग के आला अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए पांच लाख रुपये लेकर शिमला आया था। उसे पुराने बस अड्डा शिमला में विजिलेंस द्वारा पकड़ लिया गया था, लेकिन मित्रा पर कोई आंच नहीं आई। कथित घूसखोरी मामले में विजिलेंस की सीडी में राज्य सचिवालय के एक पूर्व कर्मचारी की आवाज भी कैद है। सीडी में कथित तौर पर मित्रा और बिचौलिए के बीच धारा-118 की स्वीकृतियों के बदले लेन-देन का वार्तालाप हुआ है।

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