Jagran Special...इस स्कूल के 70 बच्चे राष्ट्र स्तर पर कर चुके हैं प्रदेश का नाम रोशन, पढ़ें कहां का है यह स्कूल

राष्ट्रीय स्तर के पूर्व खिलाडिय़ों का खेल के प्रति जज्बा और लगन ही है कि धूल में भी खेल के फूल खिल रहे हैं। हमीरपुर की देई का नौण में राजकीय उच्च पाठशाला नरेली के छह बच्चे नेशनल ओपन खो-खो टूर्नामेंट में चयनित हुए और ऊना में खेल रहे हैं।

Neeraj Kumar AzadTue, 30 Nov 2021 11:55 PM (IST)
राष्ट्रीय ओपन अंडर-14 खो-खो प्रतियोगिता में भाग लेने ऊना पहुंचे खिलाड़ी प्रशिक्षक संजीव कुमार के साथ। जागरण

मुनीत शर्मा, हमीरपुर। राष्ट्रीय स्तर के पूर्व खिलाडिय़ों का खेल के प्रति जज्बा और लगन ही है कि धूल में भी खेल के फूल खिल रहे हैं। उनके पसीने से आज मैदान में प्रतिभा लहलहा रही है। नतीजा यह कि हमीरपुर जिले की देई का नौण में राजकीय उच्च पाठशाला नरेली के छह बच्चे नेशनल ओपन खो-खो टूर्नामेंट में चयनित हुए और ऊना में खेल रहे हैं। इसी स्कूल केविभिन्न खेलों में अब तक करीब 70 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं। इन्हीं में से विजय कुमार, संजीव कुमार सोनू और भानू भी हैं, जिन्होंने युवाओं को सुबह और शाम स्कूल खुलने से पहले और बंद होने के बाद प्रशिक्षण देकर तैयार किया। इसमें स्कूल के शिक्षकों का मार्गदर्शन और सहयोग भी रहा। इसकी बदौलत आज यह स्कूल खेल के क्षेत्र में प्रदेशभर में नाम कमा रहा है।

जलवाहक सींच रहा नई पौध, पेंटर निखार रहा गुण

बच्चों को प्रशिक्षण देने वाले पूर्व खिलाडिय़ों में कोई जलवाहक है तो कोई पेंटर। कोई सरकारी कर्मचारी है जो दिनचर्या से समय निकालकर इन बच्चों को निश्शुल्क खेल के गुर सिखा रहा है। प्रतिदिन सुबह-शाम तीन से चार घंटे का प्रशिक्षण देेते हैं।

ये बच्चे हुए चयनित

स्कूल की कक्षा सात से शिवानी, आकृति व आरक्षित और कक्षा आठ से सोनिका, कृतिका व अवनीश का चयन अंडर 14 नेशनल ओपन खो-खो टूर्नामेंट के लिए हुआ है। हिमाचल से कुल 24 बच्चों का चयन हुआ है, जिसमें छह इसी स्कूल से हैं। प्रतियोगिता हिमाचल के ऊना में आयोजित की जा रही है।

सुविधाएं मिलें तो कर सकते हैं देश का नाम रोशन

शिक्षकों व पूर्व खिलाडिय़ों का कहना है कि अगर सुविधाएं मिलें तो प्रतिभा और भी निखर सकती है। स्कूल में बैडमिंटन कोर्ट पक्का न होने से भी खिलाडिय़ों को समस्या का सामना करना पड़ता है। जब वे बड़ी प्रतियोगिताओं में खेलने जाते हैं तो वहां पक्का कोर्ट होता है। जिस पर खेलने के ये बच्चे अभ्यस्त नहीं होते।

स्कूल के विद्यार्थियों का चयन होना गर्व की बात है। स्कूल प्रबंधन समिति, पूर्व खिलाडिय़ों व अध्यापकों के संयुक्त प्रयास से इस उपलब्धि को हासिल किया जा सका। बच्चों, उनके कोच व स्वजन को बधाई।

-सनम, मुख्याध्यापिका, राजकीय उच्च पाठशाला नरेली।

खेल ने बच्चों को कोरोना काल में भी शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में सहायता की। बच्चों का राष्ट्रीय स्तर पर चयन होने से स्कूल व क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है।

-राज कुमार, शारीरिक शिक्षा शिक्षक।

स्कूल छोडऩे के बाद भी मैदान से नाता नहीं टूटा। जब भी इन बच्चों को खेलता देखता हूं तो अपने संघर्ष के दिन याद आ जाते हैं। इन बच्चों को सुविधाएं मिलें तो ये विदेश में भी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं।

-संजीव कुमार, पूर्व खिलाड़ी।

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