संविधान निर्माता को याद किया, अखंड समाज में उनके योगदान को सराहा

संविधान निर्माता को याद किया, अखंड समाज में उनके योगदान को सराहा

जिलेभर में संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर की जयंती धूमधाम से मनाई गई। संविधान बनाने में उनके योगदान को याद किया गया।

JagranThu, 15 Apr 2021 04:31 AM (IST)

संवाद सहयोगी, चंबा : जिलेभर में संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर की जयंती धूमधाम से मनाई गई। संविधान बनाने में उनके योगदान को याद किया गया। चंबा में आंबेडकर मिशन सोसायटी, आंबेडकर यूथ क्लब, श्री गुरु रविदास सभा चंबा, भीमा बाई महिला मंडल, अनुसूचित जाति कल्याण समिति चंबा, गुरु रविदास महासभा, आंबेडकर सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण संघ चंबा के सयुंक्त तत्वावधान जयंती मनाई गई।

प्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति विकास निगम के उपाध्यक्ष जय सिंह मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम से पहले जिलाधीश कार्यालय स्थित भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। आंबेडकर मिशन सोसायटी चंबा के अध्यक्ष शिवकरण चंद्रा ने कहा कि इस कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं में तिलक राज हितैषी, शिवकरण चंद्रा, सुभाष शर्मा, शिवचरण चंद्रा, विजय कुमार, जय सिंह एडवोकेट, अब्दुल गनी, विजय कुमार, योगेश्वर अहीर, अविनाश पाल ने अपने अपने शब्दों में संविधान निर्माता के जीवन पर प्रकाश डाला।

संविधान निर्माता ज्ञान के प्रतीक, महान विचारक थे। वक्कताओं ने उनका समाज के विभिन्न वर्गो के उत्थान में दिए गए योगदान के विषय में अपने-अपने विचार रखे । इसके उपरांत आंबेडकर भवन मोहल्ला धड़ोग में भाषण, पोस्टर बनाओ, नारा लेखन, निबंध लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। मुख्य कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सह शैक्षणिक गतिविधियों, शिक्षा, खेलकूद, संस्कृति व विभिन्न क्षेत्रों में अपना बेहतरीन व उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों, खिलाड़ियों व कोरोना योद्धाओं को मुख्य अतिथि की ओर से पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

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एबीवीपी ने मनाई जयंती

संवाद सहयोगी, तेलका : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जिला चंबा की ओर से बुधवार को भीमराव आबेडकर की जयंती पर गूगल मीट के माध्यम से संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में अशोक शर्मा तथा लेखराज कुमार बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। एबीवीपी के जिला संयोजक अभिलाष शर्मा ने कहा कि भारतीय सभ्यता सबसे प्राचीनतम सभ्यता रही है। यह सभ्यता सबसे सर्वश्रेष्ठ थी। जब मनु काल में भारतीय समाज को वर्ण व्यवस्था में बांटा गया तो उसके बाद भारत का स्वर्णिम युग शुरू हुआ।

उस समय भारत को सोने की चिड़िया भी कहा गया। उस समय की व्यवस्था जातिगत आधार पर न होकर कर्म के आधार पर तथा कार्य कुशलता के आधार पर थी। यदि व्यक्ति शिक्षण कार्य, धर्म, वेद तथा आध्यात्म में रुचि रखता था तो उसे ब्राह्मण का वर्ण दिया गया। युद्ध कला में निपुण को क्षत्रिय वर्ण, व्यापार करने में कुशल व्यक्ति को वैश्या व सेवा कार्य करने वाले को शुद्र वर्ण दिया गया। इसके बाद व्यवस्था अच्छे तरीके से चलने लगी तथा भारत पूरे विश्व के लिए एक आदर्श स्थापित हुआ जिसमें नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय थे।

पूरे विश्व को शिक्षा देने का काम भारत कर रहा था। भारत की संस्कृति व सभ्यता को खराब करने के लिए विदेशी आक्रांताओं व विदेशी शक्तियों द्वारा भारत में जातिवाद का जहर घोला गया। इस विचार को खत्म करने के लिए कई बार प्रयास किया गया। सामाजिक चितकों व सामाजिक सुधारकों ने भारतीय समाज को अखंड बनाने के प्रयास किए, जिसमें डा. भीमराव आंबेडकर ने भी विशेष भूमिका अदा की। उन्होंने भारत के संविधान की रचना में अहम योगदान दिया। भारत में एक समाज की परिकल्पना की, जिसमें सभी व्यक्तियों के पास समानता का अधिकार के साथ शिक्षा का अधिकार हो।

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