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जज्बे को सलाम : लोकतंत्र के प्रहरी बने सौ की उम्र पार गए मतदाता

जागरण संवाददाता, यमुनानगर : जोश और जनून उम्र से नहीं इच्छाशक्ति से आता है। इसकी बानगी विस चुनाव में सौ साल की उम्र पार गए मतदाताओं ने पेश की है। जोश के साथ मतदान केंद्रों पर पहुंचे और लोकतंत्र के इस महापर्व पर अपनी आहुति डाली। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न बूथों पर इन बुजुर्गो को लोकतंत्र का प्रहरी बनते हुए देखा गया। परिजन सहारा देकर इनको मतदान केंद्र पर लेकर आए। ये लोग हर वर्ग के मतदाता के लिए मिसाल बने हैं।

मतदान का उपयोग जरूरी

मुकंदलाल स्कूल के बूथ नंबर-127 पर 110 वर्षीय रामलाल ने मतदान कर युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने। उनका कहना है कि मजबूत लोकतंत्र के लिए मतदान जरूरी है। मैंने अपने जीवन में कई सरकारों का कार्यकाल देखा। आजादी से लेकर अब तक हर चुनाव में मतदान किया। मैं तो कहूंगा कि हर व्यक्ति को मतदान जरूर करना चाहिए। क्योंकि एक-एक वोट का अपना महत्व होता है।

हर चुनाव में करती मतदान

पीरूवाला में मतदान केंद्र संख्या 108 में गांव की 101 वर्षीय गुरिद्र कौर मतदान केंद्र तक पैदल गई ओर मतदान किया। उन्होंने बताया कि 70 सालों से प्रत्येक लोकसभा, विधानसभा और पंचायती चुनावों में मतदान का उपयोग करती आ रही है। पिछले दिनों संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में भी चंडीगढ़ में विवाह समारोह को छोड़कर मतदान करने के लिए गांव में पहुंची थी। उन्होंने विकास और देशहित को लेकर मतदान किया है।

लाठी के सहारे पहुंची

बाकरपुर निवासी 104 जग्गो देवी लाठी के सहारे मतदान केंद्र तक पहुंचीं। सुबह भीड़ कम थी। लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ी। हर चुनाव में मतदान करती हूं। मैंने आज तक न तो किसी के बहकावे में आकर वोट दी है और न लालच में आकर। यह मेरा अधिकार है। अपनी मर्जी से वोट डालती हूं। परिवार के किसी सदस्य को भी साथ मतदान केंद्र पर साथ लेकर नहीं आती। इस बार भी मैने वोट डाली है।

पौत्र व पड़पौत्र का सहारा

बहादुरपुर गांव में मतदान केंद्र पर पहुंचे सौ वर्षीय जय सिंह पौत्र और पड़पोत्र के साथ मतदान करने आए। मतदान कभी नहीं छोड़ा, विकास की बात करने वालों के पक्ष में वोट दिया है। हमेशा से ही उन्होंने जरूरी काम काज छोड़कर पहले मतदान किया है। यदि किसी चुनाव में बाहर भी हुए तो मतदान के लिए गांव में जरूर पहुंचे।

अपना दायित्व निभाया

साढौरा मतदान केंद्र पर पहुंची शांति देवी ने कहा कि उम्र बढ़ रही है। चलने में दिक्कत होती है, लेकिन पहले ही सोच रखा था कि वोट डालने जरूर जाएगी। हमारी वोट से ही सरकारें बनती हैं। हम सभी का दायित्व बनता है कि मतदान जरूर करें। इसको लेकर बहानेबाजी नहीं होनी चाहिए। बुजुर्ग होने पर जब हम दूसरे काम कर सकते हैं, तो मतदान क्यों नहीं।

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