22 वार्डों में स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था दुरुस्त करने की कवायद, नए सिरे से होगा टेंडर

22 वार्डों में स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था दुरुस्त करने की कवायद, नए सिरे से होगा टेंडर
Publish Date:Mon, 28 Sep 2020 05:00 AM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता, यमुनानगर : नगर निगम के 22 वार्डों में स्ट्रीट लाइट के लिए टेंडर अब सरकार अपने स्तर पर करेगी। नगर निगम अधिकारियों को इससे दूर कर दिया है। टेंडर प्रक्रिया में पारदिर्शता लाने व लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के मद्देनजर सरकार ने यह निर्णय लिया है। नगर निगम एरिया में फिलहाल स्ट्रीट लाइटों के करीब 2500 प्वाइंट्स हैं। हालांकि तमाम प्वाइंट्स को एलइडी में बदलने के लिए आठ वार्डों से प्रक्रिया शुरू हो गई थी, लेकिन टेंडर प्रक्रिया में बरती गई अनियमितताओं के कारण शिकायत विधानसभा की पिटीशन कमेटी में चली गई। उसके बाद यह प्रक्रिया रुक गई है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक स्ट्रीट लाइटों से संबंधित जो काम जिस स्थिति में है, उसी में रहेगा। जल्दी की शहरी स्थानीय निकाय विभाग इसके लिए नए सिरे से टेंडर करेगा। यह होगा फायदा

इस बदलाव का बड़ा फायदा यह होगा कि अधिकारी अपने स्तर पर टेंडर प्रक्रिया को लटका कर नहीं रखेंगे। अपने चहेतों को टेंडर देने के आरोप नहीं लग पाएंगे। अधिकारिक स्तर पर हुई टेंडर प्रक्रिया में कई बार अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। लाइटों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठते रहे हैं। हाउस की बैठक में जन प्रतिनिधि कई बार यह मुद्दा उठा चुके हैं। निगम के रिकार्ड में चार साल में लाइटों पर ये हो चुका खर्च वर्ष खर्च

2016-17 तीन करोड़ 10 लाख

2017-18 चार करोड़ 41 लाख

2018-19 70 लाख 80 हजार

2019-20 चार करोड़ 80 लाख। यह हैं मौजूदा हालात

हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद ट्विनसिटी में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था ठीक नहीं है। शाम ढलते ही अंधेरा पसर जाता है। सेक्टर-18, पुराना नेशनल हाइवे, बिलासपुर रोड, हमीदा रोड, हमीदा कालोनी, जम्मू कालोनी, मॉडल कालोनी, मॉडल टाउन, कैंप एरिया, बैंक कालोनी, सहारनपुर रोड, गोविदपुरा रोड, माया कालोनी, आजाद नगर, चौधरी कालोनी, दशमेश कालोनी, जसवंत कालोनी, लाजपत नगर, राजीव गार्डन, गंगा नगर, दुर्गा गार्डन, वार्ड चार में अधिकांश लाइटें खराब हैं। यहां के लोग नगर निगम की बिगड़ती व्यवस्था से बेहद त्रस्त है। पार्षद निर्मला चौहान और देवेंद्र सिंह का कहना है कि स्ट्रीट लाइट पर हुई खर्च की जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके। शिकायत के बावजूद नहीं होती ठीक

स्ट्रीट लाइटों से संबंधित 80-100 शिकायतें रोजाना आ रही हैं। मरम्मत के लिए नगर निगम एरिया को दो जोन में बांटा हुआ है। खराब हुई लाइट को 48 घंटे में ठीक कराने का प्रावधान है, जबकि दो-दो माह तक लाइटें ठीक नहीं कराई जाती। जन प्रतिनिधियों का कहना है कि बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद स्ट्रीट लाइटों को ठीक नहीं किया जाता। यह भी जानिए

स्ट्रीट लाइटों के मामले में पिटीशन कमेटी की जांच के दौरान हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड से शहरी स्थानीय निकाय विभाग में डेपुटेशन पर आए एक एक्सइएन व एक असिस्टेंट इंजीनियर को वापस उनके मूल विभाग में भेजा जा चुका है। इसके अलावा चार अन्य अधिकारियों को नोटिस भी जारी हुए हैं। गौर हो कि एक पार्षद व पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर ने स्ट्रीट लाइटों के टेंडर में अनियमितताओं की शिकायत विधानसभा की पिटीशन कमेटी को की हुई है।

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