गुरु की फटकार रवीना को बना दिया राष्ट्रीय स्तर की हॉकी खिलाड़ी

नितिन शर्मा, यमुनानगर

शिष्य की सफलता के लिए गुरु अपने शिष्य के प्रति कठोरता बरतता है, तो यह संजीवनी समान है। ये लक्ष्य प्राप्ति में सहयोग करती है। गुरु की डांट-फटकार, जीवन को दिशा देती है। भटकने से रोकती है। ऐसी ही फटकार गोशाला जगाधरी कॉलोनी की रवीना को उसकी टीचर ने लगाई। जिसके बाद से वह हॉकी में गोल कर रिकॉर्ड बना रही है। स्कूल में हॉकी सही प्रकार से नहीं खेलने पर प्रशिक्षक ने उसको कड़ी फटकार लगाई। इससे आहत होने के बजाय रवीना ने ताकत बना लिया। प्रतियोगिताओं में सफलता की सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ती चली गई। अब राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन कर रही है। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित हॉकी प्रतियोगिता में भाग लेकर कई कैश अवार्ड और ट्रॉफी जीत कर जिले का नाम रोशन कर चुकी है। 11वीं कक्षा की छात्रा हैं। इनके पिता रामगोपाल श्रमिक हैं। मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। जब खेलने बाहर जाती है तो सरकार की ओर से आर्थिक सहायता मिलती है। इनका सपना भारतीय टीम में प्रतिनिधित्व करने का है। हॉकी कोच हरजीत कौर के मार्गदर्शन में प्रतिभा निखार रही हैं।

रवीना रानी बताती हैं जब उन्होंने हॉकी खिलाड़ी रानी रामपाल को खेलते देखा तो उनकी भी इच्छा हुई कि वे भी इस खेल में भाग्य आजमाए। जब स्कूल स्तर पर गेम की शुरुआत की तो सही तरह से खेल नहीं सकी। इस पर उनकी मैडम ने कहा भी कि ये तुम्हारे लिए नहीं है। कोई दूसरी गेम में हाथ आजमाओ। उनकी जिद थी। उन्होंने ठान लिया कि इसी खेल को खेलना है। इसी में आगे बढ़ना है। अपना भविष्य वे स्वर्णिम बनाएगी। उनको पता था कि स्पोर्ट वालों को सरकारी नौकरी मिलने में सहायक है। फिलहाल उनके मन में ऐसी कोई इच्छा नहीं है। उनका पूरा फोकस गेम पर किया है। पांच से छह घंटे अभ्यास करती हैं। पहली बार स्कूल के लिए खेला तो प्रथम स्थान आया। पुरस्कार देकर सम्मानित की गई। यकीन नहीं हो रहा था कि कल तक तो हॉकी ठीक से नहीं पकड़ पा रही थी। आज बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है। उनका पहला नेशनल गेम अंबाला में हुआ। यहां प्रथम आई। खेलों इंडिया दिल्ली में खेलने का मौका मिला। यहां भी प्रथम पायदान पर रही। इसके आगे तमिलनाडु राष्ट्रीय में खेलने का मौका भी मिला। यहां भी प्रतिद्वंद्वी को पछाड़ने में सफल रही। प्रथम स्थान प्राप्त किया। ट्रॉफी व केश जीतकर लौटी।

भारतीय टीम के लिए खेलना चाहती है

रवीना का कहना है कि उनकी इच्छा है कि वे भारतीय हॉकी टीम में खेलकर प्रतिभा दिखाए। इस लक्ष्य को साध कर खेल क्षेत्र में आगे बढ़ रहीं हैं। सुबह और शाम दोनों समय तेजली खेल परिसर में पांच घंटे अभ्यास करती हैं। जहां भी प्रतियोगिता होती है उनको जरूर भेजा जाता है। उन पर कोच को यकीन है कि अगर वे गेम में जा रहीं हैं, तो निश्चित ही पदक जीतकर आएगी। इसके लिए मेहनत और ज्यादा करने की जरूरत है।

माता पिता करते हैं गर्व

जब खेला शुरू किया गया तो उनको बताया गया कि गेम महंगी है। खेलने के लिए हॉकी अपनी होनी चाहिए। अच्छी हॉकी दो हजार रुपये से कम नहीं है। शुरुआत वैसे ही हॉकी से की थी। अब अच्छी हॉकी खरीद रखी है। पिता रामगोपाल और माता कृष्णा का कहना है कि उनकी बेटी ने उनका नाम देशभर में रोशन किया है। उनका यही प्रयास रहता है कि हर कदम पर रवीना का साथ दें, जिससे वे बिना तनाव खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकें। पढ़ाई में भी अव्वल रहती है।

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